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Tuesday, March 3, 2020

किडनी की बीमारी से निपटने के लिए ठोस पहल की जरूरत

देवभोग अस्पताल की हालत
 किडनी की बीमारी से निपटने के लिए ठोस पहल की जरूरत

सरकार गरियाबंद के किडनी मरीजों के ईलाज के लिए हमेशा बहुत कुछ करने का दावा करती रही है मगर अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है, सबसे ज्यादा जरूरत मरीजों को ईलाज की है, सही ईलाज के अभाव में मरीजो की लगातार मौते हो रही है, मरीजो की संख्या में भी लगातार बढ़ौतरी हो रही है, सरकार ने रायपुर मेकाहारा में निशुल्क ईलाज का भरोसा मरीजो को दिलाया है, साथ ही डायलसिस के लिए देवभोग में ही मशीन लगाने का दावा भी किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत ये है कि ना तो मरीजो को मेकाहारा में बेहतर ईलाज मिल पा रहा है और ना ही देवभोग अस्पताल में लगी डायलसिस मशीन अभी तक चालू हो पायी है, ग्रामीणों को आज भी ईलाज के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है


        लगातार फैल रही बीमारी

कुछ दिनों पहले तक किडनी के मरीज सिर्फ सुपेबेड़ा में मिलते थे मगर अब ये बीमारी आसपास के दर्जनभर गांवों में अपने पैर पसार चुकी है, यहां भी मौत और मरीजो की संख्या बढ़ने का सिलसिला जारी हो गया है,

देवभोग के जगदीश की बेबसी 

देवभोग में बेहतर ईलाज नही होने का खामियाजा देवभोग के जगदीश अग्रवाल को भी भुगतना पड़ रहा है, आपबीती सुनाते हुए उन्होंने बताया कि तीन साल पहले उसकी दोनो किडनी खराब हो जाने पर पिता ने अपनी किडनी देकर उन्हें नई जिंदगी दी थी, लेकिन कुछ दिन बाद वह किडनी भी खराब हो गयी, पिछले ढाई साल से वह डायलसिस पर है, मेकाहारा और देवभोग में बेहतर सुविधा नही होने के कारण उन्हें ईलाज के लिए ओडिसा जाना पड़ता है, अब तक वह 50 लाख रुपये खर्च कर चुका है, 


जगदीश की पत्नी विद्या अग्रवाल और भाई सत्यनारायण अग्रवाल ने बताया कि बीमारी के कारण उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गयी है, उन्होंने सरकार से देवभोग में डायलसिस मशीन चालू करने की अपील की है। 

      सबसे बड़ी परेशानी

सुपेबेड़ा में किडनी की बीमारी से निपटने में सरकार की सबसे बड़ी परेशानी जनता के विश्वास की है, पूर्वर्ती भजपा सरकार रही हो या फिर वर्तमान की कांग्रेस सरकार हो, दोनो ही सरकारें जनता का विश्वास जुटाने में सफल नही हो पायी, मेकाहारा में ईलाज की बात हो या फिर बीमारी के कारणों का पता लगाने की बात हो सरकार दोनो ही मामलों में जनता की उम्मीदों पर खरा नही उतर पायी, जब तक सरकार जनता का भरोसा जितने में कामयाब नही होगी तबतक सुपेबेड़ा से बीमारी खत्म करना सरकार के लिए आसान नही होगा।