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Wednesday, October 20, 2021

गरियाबंद : प्रिंसिपल कर रहे बाबूगिरी, प्रोफेसर बनकर रह गए चपरासी और कॉलेज छात्रों का हो रहा टाइम पास

गरियाबंद : प्रिंसिपल कर रहे बाबूगिरी, प्रोफेसर बनकर रह गए चपरासी और कॉलेज छात्रों का हो रहा टाइम पास



गरियाबंद। जब कॉलेज प्रिंसिपल को किसी बाबू की तरह छात्रों के एडमिशन फॉर्म भरने पड़े और प्रोफेसर्स को चपरासी की तरह उन फार्म पर फोटो चिपकानी पड़े तो बदहाल व्यवस्था का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। कुछ ऐसे ही हालात इन दिनों गरियाबंद जिले के सरकारी महाविद्यालयों का है। ये हालात किसी एक महाविद्यालय के नही बल्कि राजिम से लेकर देवभोग तक जिले में संचालित सभी सरकारी कॉलेज का है। ऐसे हालात में बेहतर शिक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

आंकड़ो पर बात की जाए तो जिले में संचालित कुल 7 सरकारी महाविद्यालयो में केवल 22 प्राध्यापक पदस्थ है जबकि इन महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों की संख्या 8 हजार के पार है। साइंस, कॉमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषय तो दूर की बात कला संकाय के प्राध्यापकों की भी भारी कमी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इन 7 महाविद्यालयों के लिए प्राध्यापकों के 68 पद स्वीकृत है। जबकि पिछले दो साल से 22 प्राध्यापकों से ही काम चल रहा है। 2017 में ट्रांसफर के तहत 25 प्राध्यापकों ने अपना तबादला करवा लिया उनके स्थान पर एक भी नया प्राध्यापक नही मिला।

सबसे गंभीर स्थिति तो मैनपुर, गोहरापदर और देवभोग महाविद्यालय की है। देवभोग के पं. श्यामशंकर महाविद्यलय में 767 छात्र अध्ययनरत है जबकि प्रोफेसर महज 2 है। गोहरापदर में 400 से अधिक छात्र एक प्रोफेसर के भरोसे है। इसी प्रकार मैनपुर के हालात भी कुछ ऐसे ही है। यहां 700 से अधिक छात्रों की पढ़ाई का जिम्मा 3 प्राध्यापक संभाल रहे है। जिला मुख्यालय के हालात जानना भी बेहद जरूरी है। यहां तकरीबन 17 सौ छात्र अध्ययनरत है जबकि साइंस का एक भी प्रोफेसर नही है।

गरियाबंद के वीर सुरेन्द्र सिंह साय महाविद्यालय की प्राचार्य आरसी जेम्स ने जिले में अध्ययन और अध्यापन की स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बच्चों में पढ़ाई की ललक है मगर विषयवार प्राध्यापकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई सही ढंग से नही हो पा रही है। ऐसी ही पीड़ा देवभोग महाविद्यलय के प्राचार्य टीएस मरकाम ने जाहिर करते हुए बताया कि प्राध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए छात्रों को ऑनलाइन क्लास से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके कॉलेज में प्राध्यापकों के अलावा ऑफिशियली स्टॉफ की भी कमी है। छात्रों के एडमिशन फार्म भरने से लेकर उनपर फोटो चिपकाने तक काम उन्हें स्वयं अपने सहयोगी प्राध्यापकों के साथ करना पड़ता है।

कॉलेजों में प्राध्यापकों की कमी का सीधा असर यहां पढ़ने वाले छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। बिना प्राध्यापकों की पढ़ाई करना छात्रों के लिए मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में नेटवर्क समस्या के कारण ऑनलाइन क्लासेस भी सफल नही हो पा रही है। कहना गलत नही होगा कि ऐसे हालातो में महाविद्यलय छात्रों के लिए महज टाइमपास बनकर रह गए।

छात्रों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि बेहतर पढ़ाई व्यवस्था नही होने के कारण उनका जीवन अंधकारमय हो गया है। छोटी से नौकरी के लिए कम्पीटिशन बढ़ गए है ऐसे में बिना शिक्षकों के अच्छे अंक लाना उनके लिए मुश्किल हो गया है। कुछ छात्रों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में अच्छे अंक लाना तो दूर पास होना भी दूभर है। छात्र अपने कॉलेजों में जल्द से जल्द शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग कर रहे है।