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Thursday, October 21, 2021

गरियाबंद : आस्था का मेला, जहां दूर-दूर से उमड़ती है भीड़

गरियाबंद : आस्था का मेला, जहां दूर-दूर से उमड़ती है भीड़



गरियाबंद : भारत को त्यौहारों का देश कहा जाता है। देश के किसी ना किसी कोने में हर रोज कोई ना कोई तीज त्यौहार अवश्य मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में भी लोग त्यौहारो को धूमधाम से मनाते है। श्रद्धा और आस्था का ऐसा ही एक मेला गरियाबंद के दुर्गम चौकसील पहाड़ पर आयोजित होता है। जिसे चौकसील मेला कहा जाता है। मैनपुर विकासखण्ड मुख्यालय से तकरीबन 40 किमी उदंती सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र के बीहड़ जंगल मे यह स्थान स्थित है।

शरद पूर्णिमा की दूधिया रोशनी में आयोजित होने वाला यह अपने आप मे अनोखा मेला है। जिसे देखने के लिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते है। मेले की एक खास बात ये है कि इसमे शासन प्रशासन की कोई सहभागिता नही होती बल्कि 6 पंचायत के लोग मिलकर इस भव्य मेले का आयोजन करते है।

छत्तीसगढ़ी आदिवासी परंपरा के तहत मनाए जाने वाले इस मेले में समाज के लोग अपने देवी -देवता और ध्वज पताका डांग -डोली लेकर पहुंचे है और फिर सभी की एक साथ गढ़िया माता के दरबार मे पूजा अर्चना करते है। रातभर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।

आयोजक समिति के सदस्यों के मुताबिक चौकसील पहाड़ आदिवासी समाज का पवित्र स्थल है। जहाँ उनके देवी देवताओं का वास माना जाता है। उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात में यहां समाज के लोगो द्वारा देवी-देवताओं की पूजा-पाठ सदियों की जा रही है। लेकिन 2014 के बाद से समाज ने इसे भव्य रूप में मनाने का फैसला लिया और फिर 6 पंचायत के लोगो ने समिति बनाकर इस परंपरा को आगे बढ़ाया।


अधिक जानकारी देते हुए समिति के सदस्यों ने बताया कि अब यहां तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है। गढ़िया माता के दर्शन करने और अपनी मनोकामना लेकर श्रद्धालु दूर-दूर से यहां आते है। उन्होंने बताया कि लोगो की भीड़ का सिलसिला हर साल बढ़ रहा है। बस्तर, कांकेर और ओडिसा से भी श्रद्धालु यहां बड़ी संख्या में पहुंचते है।

समिति के सदस्यों ने बताया कि चौकसील पहाड़ी एक दुर्गम स्थल है। यहां पहुंचने के लिए ना तो कोई सड़क है ओर ना ही रास्ता। समिति द्वारा ही हर साल आवागमन के लिए अस्थायी रास्ता तैयार किया जाता है। धार्मिक आस्था के केन्द्र के साथ-साथ यह इलाका एक प्राकृतिक दृष्टि से भी परिपूर्ण है। आयोजन समिति ने शासन से इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है।