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Monday, October 18, 2021

गरियाबंद : मान गए नाराज कांग्रेसी, वापिस लिया इस्तीफा, आखिर किन शर्तो पर हुआ समझौता

गरियाबंद : मान गए नाराज कांग्रेसी, वापिस लिया इस्तीफा, आखिर किन शर्तो पर हुआ समझौता




गरियाबंद। कोपरा के 200 से अधिक नाराज कांग्रेसियों के इस्तीफे मामले का पटाक्षेप हो गया है। तकरीबन सप्ताहभर बाद सभी नाराज कांग्रेसियों ने अपना इस्तीफा वापिस ले लिया है। सभी ने एक पत्र जारी कर सामूहिक इस्तीफा वापसी की घोषणा की है। इस्तीफा किन शर्तो पर वापिस हुआ है और जारी पत्र में क्या कुछ जिक्र किया गया है, लोगो के मन मे ऐसे सवाल उठने लाजमी है।

दरअसल 12 अक्टूबर की सुबह कोपरा के 200 से अधिक कांग्रेसी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओ ने अपने पद और पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा कर सभी को चौका दिया था। इस्तीफे की खबर राजनीतिक गलियारों में आग की तरह फैल गयी थी। पार्टी ने इस्तीफा नामंजूर करते हुए तत्काल नाराज कार्यकर्ताओ को मनाने की कौशिशे शुरू कर दी थी। तकरीबन सप्ताहभर के अंदर ही पार्टी को सफलता भी मिल गयी। आज सभी नाराज कांग्रेसियों ने अपना सामूहिक इस्तीफा वापिस ले लिया है।

अब ऐसे में हर कोई यह जरूर जानना चाहेगा कि इस्तीफा किन शर्तो पर वापिस हुआ है। नाराज कार्यकर्ताओ ओर उनके द्वारा लिखे पत्र के मुताबिक वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा उनकी मांग पर सहयोग करने के आश्वासन के बाद उन्होंने इस्तीफा वापिस लिया है। मतलब नाराज कांग्रेसियों की जो गांव की सरपंच को हटाने की मांग थी उसमें वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा सहयोग करने के आश्वासन के बाद अपना इस्तीफा वापिस लिया है। नाराज वरिष्ठ नेताओं ने बाकायदा फोन पर बड़े नेताओं से बात करने के बाद यह फैसला लिया है।

जारी पत्र में नाराज कांग्रेसियों ने गलत फहमी और भाववेश में इस्तीफा देने की बात कही है। विधायक अमितेष पर लगाये आरोपो का भी खंडन किया। लिखा है कि अमितेष शुक्ल पर जो आरोप लगाए गए थे उसके लिए वे अपनी गलती स्वीकार करते हुए खेद प्रकट करते है एवं विधायक अमितेष के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते है।

जानकारों की माने तो पूरे मामले में विधायक अमितेष की कूटनीति और जिलाध्यक्ष भावसिंह साहू की मेहनत से यह संभव हुआ है। अमितेष नही चाहते थे कि इतनी तादाद में एक ही गांव से कांग्रेसी पार्टी से इस्तीफा दे। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी जिलाध्यक्ष भावसिंह साहू को सौंपी। भावसिंह सप्ताहभर की मेहनत के बाद नाराज कार्यकर्ताओ को मनाने में सफल हुए।

भाजपा ने भी इसे बड़ा मुद्दा बना लिया था। पूर्व विधायक संतोष उपाध्याय ने इस पूरे प्रकरण के लिए विधायक अमितेष को जिम्मेदार ठहराते हुए दोषियों का साथ देने का आरोप लगाया था। उन्होंने सेदर, भैंसातरा और कोपरा पंचायत में हुए भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करवाने की मांग की थी। इस घटना के बाद अमितेष बैकफुट पर चले गए थे और हाल फिलहाल में खुद को मंत्रीमंडल में शामिल होने के अपने सपने को बिखरता देख रहे थे।

दरअसल ये पूरा मामला कोपरा सरपंच पर कार्रवाई से जुड़ा है। गांव के कुछ लोगो "जिसमे कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी शामिल है" को यकीन है कि सरपंच डॉ डाली साहू भ्रष्टाचार में संलिप्त है और ग्रामीणों द्वारा कार्रवाई की मांग के बावजूद भी विधायक अमितेष सरपंच को बचाने में लगे है।

जिला महामंत्री ठाकुर साहू और राजेश यादव ने "ताजा खबर" से जानकारी साझा करते हुए बताया कि सभी नाराज पदाधिकारियों ओर कार्यकर्ताओ ने अपना इस्तीफा वापिस ले लिया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले फोन पर वरिष्ठ नेताओं से चर्चा हुई है जिसमे उन्होंने उनकी मांगों पर सहयोग करने का आश्वासन दिया है। उसके बाद गांव में बैठक कर सर्वसमति से इस्तीफा वापिस लेने का फैसला लिया गया।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष भावसिंह साहू ने भी इस मामले में "ताजा खबर" से बात की है। उन्होंने बताया कि मामला सामने आने के बाद उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के निर्देशन में नाराज कार्यकर्ताओ से बात की। कोपरा पहुंचकर नाराज कार्यकर्ताओ की वरिष्ठ नेताओं से फोन पर बात कराई। सभी वरिष्ठ नेताओं ने उनका साथ देने का भरोसा दिलाया। नाराज कार्यकर्ताओ को भी अपनी गलती का अहसास हुआ और आज सभी ने अपना सामूहिक इस्तीफा वापिस ले लिया।