दीवाली से पहले गरियाबंद में 2 नवम्बर को कटोरा लेकर सड़क में उतरेंगे सरपंच, मांगेंगे अपना हक, इधर छात्रावास अधीक्षकों की हड़ताल की चेतावनी

Ahead of Diwali, Sarpanchs in Gariaband will take to the streets on November 2, carrying bowls to demand their rights; meanwhile, hostel superintendents have issued a strike warning.

दीवाली से पहले गरियाबंद में 2 नवम्बर को कटोरा लेकर सड़क में उतरेंगे सरपंच, मांगेंगे अपना हक, इधर छात्रावास अधीक्षकों की हड़ताल की चेतावनी

विकास की गाड़ी में तेल खत्म, गरियाबंद के सरपंच अब कटोरा लेकर निकलेंगे, दीपावली से पहले शासन से मांगेंगे अपना हक
गरियाबंद : छत्तीसगढ़ आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है. राज्योत्सव के मंच सजेंगे. उपलब्धियों का बखान होगा और विकास के दावों की गूंज सुनाई देगी. लेकिन इसी उत्सवी माहौल के बीच प्रदेश की एक दूसरी तस्वीर भी सामने आ रही है. यहां जनप्रतिनिधि हों या लोक सेवक, अपनी मांगों और बकाया भुगतान के लिए उन्हें अब आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है. एक तरफ सरपंच संघ 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की लंबित राशि के भुगतान के लिए कटोरा लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ छात्रावास अधीक्षक संघ ने भी मांगें पूरी नहीं होने पर हड़ताल का ऐलान कर दिया है. सवाल यही है कि जब व्यवस्था के जिम्मेदार ही अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने लगें. तो आम जनता की फरियाद कौन सुनेगा?
गांवों में विकास की गंगा बहाने की जिम्मेदारी जिन जनप्रतिनिधियों के कंधों पर है. अब वही अपने हक की राशि मांगने के लिए कटोरा लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं. तस्वीर थोड़ी अजीब जरूर है. लेकिन पंचायतों की आर्थिक बदहाली का हाल बयां करने के लिए काफी है. दीपावली पर जहां लोग घरों में दीये जलाने और खुशियां मनाने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं गरियाबंद जिले के सरपंच अपनी पंचायतों के खाली खजाने का हिसाब लेकर शासन-प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक देने जा रहे हैं.
जिला सरपंच संघ गरियाबंद और सभी उपसरपंच-पंचगण ने 2 नवंबर 2026 को कटोरा लेकर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. आंदोलन की शुरुआत सुबह 11 बजे कुमार भवन, सिविल लाइन गरियाबंद से होगी. इसके बाद सरपंचों की रैली बस स्टैंड होते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचेगी. यहां प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा जाएगा. आंदोलन के पोस्टर में कटोरा लेकर प्रदर्शन, घेराव और चक्काजाम की चेतावनी भी दी गई है.
पंचायतों का लंबित भुगतान 30 करोड़ के काम, भुगतान के नाम पर इंतजार का इनाम
सरपंच संघ का दावा है कि जिले में मनरेगा के तहत लगभग 30 करोड़ रुपये के कार्य कराए गए. लेकिन मजदूरी और सामग्री की राशि करीब 8 महीने से लंबित है. यानी काम गांव में हो गया. मजदूरों ने पसीना बहा दिया. निर्माण में सामग्री भी लग गई. लेकिन भुगतान की बारी आई तो फाइलें शायद सरकारी दफ्तरों की लंबी यात्रा पर निकल गईं.
मूलभूत और 16वें वित्त आयोग की राशि भी लंबित बताई जा रही है. निर्माण कार्यों का मूल्यांकन और सत्यापन पूरा होने के बाद भी 5 से 6 महीने से भुगतान नहीं मिलने की बात संघ ने कही है. उपसरपंच और पंचों का मानदेय भी अटका हुआ है. ऐसे में पंचायतों के सामने विकास कार्यों का संचालन करना चुनौती बन गया है.
गांव में विकास कराएं या उधारी का हिसाब चुकाएं?
पंचायत प्रतिनिधियों की स्थिति भी कुछ ऐसी हो गई है कि गांव वाले विकास मांग रहे हैं और पंचायतें अपनी लंबित राशि। सड़क बनवानी है. नाली बनवानी है, दूसरे जरूरी काम कराने हैं. लेकिन भुगतान के लिए इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. सवाल यह है कि जब काम पूरा होने के बाद भी महीनों तक भुगतान नहीं मिलेगा तो पंचायतें आखिर विकास का पहिया कैसे घुमाएंगी?
संघ ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें मनरेगा की लंबित मजदूरी और सामग्री राशि तत्काल जारी करना, मूलभूत एवं 16वें वित्त आयोग की राशि उपलब्ध कराना, उपसरपंच और पंचों का मानदेय जारी करना, सत्यापन पूर्ण निर्माण कार्यों का भुगतान करना और बारिश से फसल क्षति का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा देना शामिल है.
दीपावली पर दीये जलेंगे, लेकिन पंचायतों के खाते कब रोशन होंगे?
जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष हरीश साहू की ओर से 21 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक गरियाबंद को रैली और प्रदर्शन की सूचना दी गई है. संघ का कहना है कि लंबित भुगतान के चलते पंचायतों का संचालन प्रभावित हो रहा है. अब 2 नवंबर को कटोरा लेकर निकलने का फैसला इसी नाराजगी का नतीजा है.
विडंबना देखिए, गांवों में विकास की योजनाएं चलाने वाले जनप्रतिनिधियों को अब अपने ही काम की राशि के लिए कटोरा लेकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है. दीपावली के इस मौसम में सवाल सिर्फ इतना है कि गांवों में विकास के दीये जलाने वालों के खातों में आखिर कब रोशनी पहुंचेगी?
निराकरण नहीं होने पर आगे बड़े आंदोलन की भी तैयारी
सरपंच संघ ने बताया है कि अपनी मांगों के लिए वह सड़क पर अभी शांति पूर्ण प्रदर्शन करेंगे मगर उनकी बातें नहीं सुनी गई और उनकी मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो सरपंच संघ ने आगे घेराव और चक्काजाम जैसे आंदोलन करने की चेतावनी दी है.। अब देखना होगा कि दिवाली जैसे त्यौहार के पहले प्रशासन इस कटोरा प्रदर्शन को गंभीरता से लेता है या पंचायतों को भुगतान के इंतजार में एक और तारीख मिलती है.
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छत्तीसगढ़ में उत्सव के बीच छात्रावास अधीक्षक भी आंदोलन की राह पर
गरियाबंद : छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ की जिला इकाई गरियाबंद ने भी अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है. संघ ने 30 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि छात्रावास-आश्रमों के संचालन में आ रही समस्याओं, जरूरी सुविधाओं की कमी और कार्य संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर लंबे समय से मांग की जा रही है. लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ है.
संघ के मुताबिक छात्रावासों में पर्याप्त संसाधनों और आवश्यक सुविधाओं का अभाव है. ऐसी परिस्थितियों में अधीक्षकों के लिए जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है. संघ ने 12 नवंबर को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल करने की घोषणा की है. साथ ही चेतावनी दी है कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो नियमित और प्रभारी अधीक्षक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे.
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