ग्राम पंचायत पारागांव अंतर्गत पार्किंग शुल्क को लेकर। 10 लाख से ज्यादा की वसूली!, मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल में शिकायत के बाद भी दबाया गया मामला!
Regarding parking fees in Gram Panchayat Paragaon: Over ₹10 lakh collected! The matter was suppressed even after a complaint was lodged on the Chief Minister's grievance portal!
गरियाबंद : गरियाबंद जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत पारागांव अंतर्गत सावन महीने में भूतेश्वर नाथ दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं से पार्किंग शुल्क के नाम पर अवैध पचास रुपये के वसूली का मामला सामने आया था. जिसकी मौखिक शिकायत जिले के पुलिस अधीक्षक कलेक्टर लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक भी की गई. लेकिन मामले को दोनों हीं जगह दबा दिया गया.
पुलिस प्रशासन ने इसे जिला प्रशासन का मामला बता कर पल्ला झाड़ लिया गया. वंही कलेक्टर से शिकायत करने पर देखते हैं कह दिया. मुख्यमंत्री पोर्टल में शिकायत के बाद जांच तो हुई लेकिन जांच के बाद भी हुआ कुछ नहीं. किसी ने संज्ञान भी नहीं लिया कि आखिर जनता से वसूली गई राशि का हुआ क्या?
"जन सेवा " करना बताए जाने वाला निकला मास्टर माइंड!
समाचार संकलन के दौरान जब पत्रकारों की टीम ने जानना चाहा कि आखिर इस पार्किंग का संचालन कौन कर रहा हैं तब सामने आए भाजयूमो के छूटभैया नेता के हाथो में कमान थी और बार-बार हमसे कहा जा रहा था कि कोई ठेका नहीं हैं. ग्राम पंचायत काम कर रहा हूँ " मै तो जनसेवा में लगा हू " बिल बुक में कंही भी कार्बन पेपर का उपयोग नहीं किया गया था. वंही फोन पे पर भी पार्किंग की वसूली की जा रही थी. बगैर कार्बन कॉपी के हिसाब जैसे कार का 50 रूपये लिया गया. कैसे पता चलेगा?. सारा गोलमाल यही से शुरू हुआ.
जनसेवा के नाम पर लाखों की कमाई..
यंहा यह बताना लाजमी होगा कि किसी भी पार्किंग का ठेका वैधानिक रूप से ग्राम पंचायत को देने का अधिकार हीं नहीं हैं. अब पंचायत यह कह रहा हैं कि ठेका हुआ था. न तो ठेकेदार के नाम का कोई बोर्ड था न हीं वैधानिक रूप से कोई ठेका हुआ पूरी मिलीभगत पार्किंग से आई रकम राशि को हड़पने का हैं. ताकि यह राशि लोकहित में न लगकर खुद के हित में लगाया जाए.
सचिव को अभी तक नहीं मिला पार्किंग वसूली का रिकार्ड.. न खाते में आई रकम
देखने में आया हैं कि मुख्यमंत्री पोर्टल में शिकायत के बाद भी पार्किंग शुल्क के रूप में वसूली गई राशि का न तो सचिव को हिसाब दिया गया और नहीं पर्चीयो का हिसाब दिया गया हैं. रोजाना वसूली की राशि भी बैंक में पचांयत के खाते में जमा करने के बजाय यह राशि जो कि करीब 10 से 15 लाख के आसपास होने का अनुमान हैं. निजी व्यक्ति अपने पास रखा हुआ हैं. सचिव उधारी कर सड़को पर लाइटिंग की व्यवस्था किया था. जिसका भूगतान अब तक नहीं हो पाया हैं. बावजूद इसके अब भी पार्किंग की राशि गांव वालो के पास हीं रखी हुई हैं. बगैर हिसाब किताब के...
ग्राम में हीं लोगो ने बताया कि ग्राम के पटेल, बैगा औऱ कुछ लोगो के दिमाग कि यह उपज हैं कि ठेकेदारी बोलकर राशि का आपस में बंदरबाट कर लिया जाए. इनसे सवाल किए जाने में इन्होने बताया कि प्रशासन ने हमें कहा हैं कि पार्किंग लगा कर वसूली की जाए.
पहले हीं किया गया था आगाह।
इस अवैध वसूली में बंदरबाट कि आशंका पहले हीं जताई गयी थी. पुलिस के बड़े अफसरों से लेकर जिले के कलेक्टर तक से शिकायत पर कुछ नहीं किए जाने के बाद मुख्यमंत्री शिकायत में शिकायत के बाद भी सिर्फ जांच किस बिंदु में किस मुद्दे में किया जाए अता पता नहीं.. जांच हो भी गई क्या फैसला हुआ किसी को पता नहीं. श्रद्धालु जनता की मेहनत की कमाई पार्किंग शुल्क के नाम पर लुटती रही. प्रशासन मुक दर्शक बन देखता रहा. ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत तक कलेक्टर से लेकर SDM तक खामोश रहे लुटेरे तंत्र अपना काम कर सबको अपने झांसे में लेकर छत्तीसगढ़ के भोले श्रद्धांलु लोगो को पार्किंग के नाम पर लुटते रहे..
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