अमित शाह के सामने विरोध टालने जनसुनवाई रद्द करने का आरोप, अमेरिका में अडानी के खिलाफ दर्ज केस खत्म, $10 अरब निवेश के वादे के बाद फैसला

Allegations of canceling public hearings to avoid protests in front of Amit Shah; case against Adani in US dismissed, decision after $10 billion investment promise

अमित शाह के सामने विरोध टालने जनसुनवाई रद्द करने का आरोप, अमेरिका में अडानी के खिलाफ दर्ज केस खत्म, $10 अरब निवेश के वादे के बाद फैसला

अमित शाह के सामने विरोध टालने जनसुनवाई रद्द करने का आरोप
रायपुर : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में गारे पेलमा सेक्टर-1 कोयला खदान परियोजना को लेकर माहौल लगातार गरमाता जा रहा है. 19 मई को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले इलाके में भारी तनाव की स्थिति बन गई.  इस तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए एक बार फिर जनसुनवाई को टाल दिया गया. चूँकि अमित शाह छत्तीसगढ़ में हैं.
सरकार नहीं चाहती कि उनके सामने विरोध को लेकर किरकिरी हो. आदिवासी समुदाय ने इस परियोजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. लोगों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व, जंगल और आजीविका की लड़ाई है. हालात को देखते हुए प्रशासन ने तमनार चौक से लेकर पेलमा गांव तक पुलिस बल तैनात कर दिया.
ग्रामीणों का विरोध:
ग्रामीणों का आरोप है कि एसईसीएल और अडानी समूह की इस संयुक्त परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए गांवों में लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. स्थानीय लोगों का दावा है कि जनसुनवाई से पहले कुछ लोग गांवों में जाकर पेटी, कुर्सी, दरी और छाता जैसे सामान बांट रहे हैं. ताकि विरोध को कमजोर किया जा सके.
लोगों का गुस्सा फूटा:
जैसे ही यह जानकारी गांवों में फैली लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. महिलाओं और युवाओं ने विरोध जताते हुए सामान बांटने पहुंचे लोगों को गांव से वापस लौटा दिया. इस घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी तरह के लालच में आने वाले नहीं हैं और अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करेंगे.
9 लाख पेड़ों पर चलेगी आरी:
इस विरोध की सबसे बड़ी वजह पर्यावरण को होने वाला नुकसान बताया जा रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक प्रस्तावित ओपन-कास्ट कोयला खदान के लिए करीब 362 हेक्टेयर जंगल क्षेत्र प्रभावित होगा. स्थानीय लोगों का दावा है कि इस परियोजना के चलते करीब 9 लाख पेड़ों की कटाई हो सकती है. जिससे पूरे इलाके का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा.
जल,जंगल,ज़मीन की लड़ाई:
आदिवासी समुदाय का कहना है कि जंगल ही उनकी पहचान और जीवन का आधार है. खेती, पशुपालन और वन उपज पर निर्भर हजारों परिवारों को इस परियोजना से सीधा खतरा है. एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा कि अगर जंगल खत्म हो गया तो आदिवासी समाज के सामने जीवन का संकट खड़ा हो जाएगा.
पहले भी हो चुका है विरोध:
यह पहला मौका नहीं है जब इस परियोजना को लेकर विरोध सामने आया हो. इससे पहले भी जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखा टकराव हो चुका है. उस समय हालात इतने बिगड़ गए थे कि प्रशासन को जनसुनवाई स्थगित करनी पड़ी थी. अब दोबारा प्रक्रिया शुरू होने से लोगों में पुराना आक्रोश फिर उभर आया है.
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है. कांग्रेस और कई स्थानीय आदिवासी संगठनों ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं. विपक्ष का आरोप है कि नियमों और स्थानीय लोगों की सहमति को नजरअंदाज कर परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है. ताकि निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके. सरकार को जनसुनवाई टालने की जगह इसकी अनुमति रद्द करनी चाहिए.
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अमेरिका में अडानी के खिलाफ दर्ज केस खत्म, $10 अरब निवेश के वादे के बाद फैसला

अमेरिका में गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को बड़ी कानूनी राहत मिली है. अमेरिकी न्याय विभाग ने दोनों के खिलाफ सभी आपराधिक मामला हमेशा के लिए वापस ले लिए हैं. न्यूयॉर्क में चल रहा हाई-प्रोफाइल सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड केस अब पूरी तरह बंद हो गया है. अरबपति गौतम अडानी पर लगे रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के सभी आपराधिक मामलों को वापस ले किया.
रिश्वत का आरोप
SEC का आरोप था कि अडानी ग्रुप ने भारत में एक बहुत बड़े सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट का सरकारी ठेका ऊंचे दामों पर हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करोड़ों डॉलर (सैकड़ों मिलियन डॉलर) की रिश्वत देने का वादा किया था.
निवेशकों से धोखाधड़ी
इसी दौरान, कंपनी ने वॉल स्ट्रीट (अमेरिकी शेयर बाजार) के निवेशकों से अरबों डॉलर का फंड भी जुटाया. निवेशकों को यह भरोसा दिलाया गया था कि कंपनी में रिश्वतखोरी को रोकने के लिए सख्त नियम हैं और टॉप मैनेजमेंट ने वादा किया था कि कोई भी गलत काम नहीं होगा. SEC के मुताबिक, निवेशकों से यह बात छिपाना अमेरिकी कानूनों के तहत धोखाधड़ी है.
गौतम अडानी 60 लाख डॉलर का जुर्माना भरेंगे. उनके भतीजे सागर अडानी 1 करोड़ 20 लाख डॉलर (लगभग $12 मिलियन) का जुर्माना भरेंगे. न्यूयॉर्क में दोनों पर धोखाधड़ी और साजिश रचने के क्रिमिनल चार्ज भी लगे थे. द न्यूयॉर्क टाइम्स और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अब इन आपराधिक मामलों को भी रद्द किया जाएगा.
क्या है 10 अरब डॉलर और 15 हजार नौकरियों का ऑफर?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में अडानी की लीगल टीम ने वाशिंगटन में अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की. इस दौरान वकीलों ने सरकार के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा- उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे केस को खत्म कर देता है. तो अडानी समूह अमेरिका की अर्थव्यवस्था में 10 अरब डॉलर (लगभग 90 हजार करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश करेगा. इसके अलावा इस निवेश के जरिए अमेरिका में 15,000 नई नौकरियां पैदा की जाएंगी.
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