सुशासन तिहार में तहसीलदार की मंच से माफी भी नहीं शांत कर पाई नाराजगी, 16 पंचायतों के सरपंचों ने किया बहिष्कार, अपमान का लगाया आरोप

Even the Tehsildar's apology from the stage failed to assuage anger at Good Governance Festival; Sarpanches from 16 Panchayats boycotted the event, alleging insult.

सुशासन तिहार में तहसीलदार की मंच से माफी भी नहीं शांत कर पाई नाराजगी, 16 पंचायतों के सरपंचों ने किया बहिष्कार, अपमान का लगाया आरोप

गरियाबंद/मैनपुर : गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत झरगांव में आयोजित जिला स्तरीय सुशासन तिहार समाधान शिविर प्रशासन के लिए उपलब्धि से ज्यादा विवादों का कारण बनता नजर आया. एक तरफ शासन-प्रशासन द्वारा जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण और सुशासन के बड़े दावे किए गए. वहीं दूसरी तरफ सरपंचों के बहिष्कार, तहसीलदार पर अपमान के आरोप और किसानों की शिकायतों ने पूरे आयोजन को कटघरे में खड़ा कर दिया.
राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप आयोजित शिविर में प्रशासन ने 20 गांवों से लोगों की भागीदारी और 934 से ज्यादा आवेदन मिलने का दावा किया. इनमें मांग और शिकायत से जुड़े सैकड़ों आवेदन शामिल रहे. मंच से जनसमस्याओं के समाधान और योजनाओं के लाभ पहुंचाने की बातें कही गईं.
इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, कलेक्टर बी.एस. उइके, जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर, एसडीएम हितेश्वरी बाघे सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद रहे. लेकिन कार्यक्रम के बीच ही प्रशासनिक व्यवस्था पर असंतोष खुलकर सामने आ गया. मैनपुर सरपंच संघ ने झरगांव में आयोजित सुशासन तिहार का बहिष्कार करते हुए अमलीपदर तहसीलदार को हटाने की मांग कर दी.
“SDM खाना खाएंगे” कहकर हटाने का आरोप
सरपंच संघ द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 7 मई 2026 को ग्राम पंचायत अमलीपदर-नवापारा में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान 16 पंचायतों के सरपंचों का सार्वजनिक रूप से अपमान किया गया. ज्ञापन के मुताबिक भोजन व्यवस्था सरपंचों द्वारा कराई गई थी. लेकिन भोजन के दौरान अमलीपदर तहसीलदार गेंद लाल साहू ने यह कहते हुए सरपंचों को वहां से हटवा दिया कि “SDM खाना खाने बैठेंगे.”
सरपंचों का आरोप है कि इस व्यवहार से जनप्रतिनिधियों के सम्मान को ठेस पहुंची. साथ ही आदिवासी सरपंचों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किए जाने का भी आरोप लगाया गया है. घटना के बाद नाराज सरपंचों ने झरगांव कार्यक्रम का बहिष्कार कर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
भरे मंच से तहसीलदार ने मांगी माफी, फिर भी नहीं थमा विवाद
मामला बढ़ता देख तहसीलदार गेंद लाल साहू ने भरे मंच से सफाई देते हुए कहा कि पहचान नहीं होने के कारण यह भूल हुई. उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगकर मामला शांत कराने की कोशिश की. लेकिन सरपंच संघ इस माफी से संतुष्ट नहीं दिखा और कार्रवाई की मांग पर अड़ा रहा.
पटवारी के खिलाफ भी किसानों का गुस्सा फूटा
इसी बीच ग्राम पंचायत धरनीडांड एवं मदांगमुड़ा के किसानों ने पटवारी हल्का नंबर 17 में पदस्थ पटवारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. किसानों द्वारा दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया कि पटवारी समय पर काम नहीं करता है. किसानों को बार-बार चक्कर कटवाता है और कार्य के बदले पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि भूमि और कृषि संबंधी कार्य समय पर नहीं होने से किसान परेशान हैं और प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं. किसानों ने संबंधित पटवारी के तत्काल स्थानांतरण की मांग की है.
सुशासन के दावों पर उठे सवाल
एक तरफ प्रशासन सुशासन तिहार के जरिए योजनाओं का लाभ और समस्याओं के समाधान का दावा कर रहा है. वहीं दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों के अपमान, किसानों की नाराजगी और अधिकारियों के खिलाफ बढ़ती शिकायतों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. झरगांव का समाधान शिविर अब समाधान से ज्यादा विवाद, नाराजगी और विरोध के कारण चर्चा में बना हुआ है.
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