गरियाबंद जिला में धूमधाम से मनाया गया कमरछठ, सैकड़ों महिलाओं ने एक साथ की पूजा, बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की मांगी कामना

Kamar-Chhath was celebrated with great enthusiasm in Gariaband-Chhura; hundreds of women performed the rituals together and prayed for the long life, happiness, and prosperity of their children.

गरियाबंद जिला में धूमधाम से मनाया गया कमरछठ, सैकड़ों महिलाओं ने एक साथ की पूजा, बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की मांगी कामना

गरियाबंद : शहर में बुधवार को आस्था, श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ कमरछठ यानी हलषष्ठी पर्व मनाया गया. गरियाबंद के वार्ड नम्बर 14 और 15 की महिलाओं ने पुराना मंगल बाजार चौक पर सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की. इस दौरान सैकड़ों महिलाएं व्रत और पूजा में शामिल हुईं.
सुबह से ही पुराना मंगल बाजार चौक पर महिलाओं की भीड़ जुटने लगी थी. पारंपरिक वेशभूषा में पहुंची महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और कमरछठ पर्व की सदियों पुरानी परंपराओं का निर्वहन किया. महिलाओं ने सगरी बनाकर उसमें पारंपरिक पूजन सामग्री अर्पित की तथा षष्ठी माता की पूजा कर अपने बच्चों के स्वस्थ, सुखी और दीर्घ जीवन की कामना की.
कमरछठ या हलषष्ठी पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा और मातृत्व की आस्था से जुड़ा प्रमुख पर्व है. भादो मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर माताएं अपनी संतान की दीर्घायु के लिए निर्जला अथवा परंपरा अनुसार व्रत रखती हैं. पूजा के दौरान सगरी बनाने, भैंस के दूध, दही और घी से पूजन करने के साथ ही लाई, महुआ, तिल, अरहर सहित पारंपरिक सामग्री का भोग अर्पित किया गया.
पर्व की एक विशेष परंपरा यह भी रही कि इस दिन हल से जोते गए खेतों में उपजे अनाज का उपयोग नहीं किया जाता. पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने परंपरा के अनुसार पसहर चावल और विभिन्न प्रकार की भाजियों से तैयार प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया.
छत्तीसगढ़ में कमरछठ या खमरछठ के रूप में विशेष श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है.
भारती सिन्हा ने कहा, “कमरछठ केवल व्रत या पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह मां और संतान के अटूट रिश्ते, ममता और विश्वास का प्रतीक है। आज वार्ड 14 और 15 की सैकड़ों महिलाएं एक साथ यहां जुटीं और पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। हमने अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के साथ पूरे परिवार की सुख-शांति की कामना की है। ऐसी सामूहिक पूजा हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता को भी मजबूत करती है.”
अंजलि सिन्हा ने कहा, “आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी परंपराएं ही हमें अपनी जड़ों से जोड़कर रखती हैं। कमरछठ छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति की आस्था का बहुत बड़ा पर्व है। सैकड़ों महिलाओं का एक साथ जुटकर पूजा करना इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता के दौर में भी हमारी लोकसंस्कृति और परंपराएं पूरी मजबूती से जीवित हैं। हमारी कामना है कि हर बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और खुशहाल जीवन मिले और हर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहे।”
पुराना मंगल बाजार चौक पर आयोजित सामूहिक पूजा के दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक और पारंपरिक माहौल बना रहा। महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति से जुड़े इस महत्वपूर्ण पर्व को सामूहिक रूप से मनाया।
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI?

छुरा नगर में आस्था, परंपरा और उल्लास के साथ मनाया गया हलषष्ठी पर्व
गरियाबंद/छुरा : संतान की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना को लेकर मनाया जाने वाला पारंपरिक हलषष्ठी पर्व आज छुरा नगर में श्रद्धा और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया गया. पर्व को लेकर नगर के विभिन्न मोहल्लों में सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा. बड़ी संख्या में माताओं ने व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपनी संतानों के सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
छुरा में हलषष्ठी पर्व
हलषष्ठी पर्व के अवसर पर महिलाओं ने सुबह से ही पूजा की तैयारियां शुरू कर दी थीं. पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा स्थल पर भगवान बलराम और हलषष्ठी माता की पूजा-अर्चना की गई. महिलाओं ने सामूहिक रूप से हलषष्ठी व्रत की कथा सुनी तथा पूजा के दौरान संतान की लंबी आयु और परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना की.
पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला. कई स्थानों पर महिलाएं समूह में एकत्रित होकर पूजा-अर्चना करती नजर आईं। पूजा के दौरान पारंपरिक गीत और धार्मिक वातावरण से नगर में पर्व की रौनक बढ़ गई। महिलाओं ने एक-दूसरे को हलषष्ठी पर्व की शुभकामनाएं भी दीं.
सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन
हलषष्ठी पर्व को मातृत्व और संतान के प्रति ममता एवं आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. इस दिन माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं. छुरा नगर में वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महिलाओं ने पूरी श्रद्धा के साथ निर्वहन किया। व्रत और पूजा-अर्चना के चलते नगर में दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा. पर्व ने जहां धार्मिक आस्था को मजबूत किया, वहीं पारिवारिक और सामाजिक जुड़ाव को भी बढ़ावा दिया.
शाम तक विभिन्न पूजा स्थलों पर महिलाओं की आवाजाही बनी रही। पर्व के समापन पर महिलाओं ने अपनी संतानों के सुखी, स्वस्थ और उज्ज्वल जीवन की कामना की. हलषष्ठी पर्व के कारण पूरा छुरा नगर आज आस्था और उत्साह के रंग में रंगा नजर आया.