भाई ने डांटा तो बच्ची ने उठाया खौफनाक कदम, 10 वर्षीय छात्रा ने लगाई फांसी, मामूली विवाद के बाद चुन्नी से पंखे पर झूली, टेबल पर चढ़कर बनाया फंदा

After being scolded by her brother, the girl took a horrific step; the 10-year-old student hanged herself; after a minor dispute, she hung herself from a fan with her scarf and climbed onto a table to make a noose.

भाई ने डांटा तो बच्ची ने उठाया खौफनाक कदम, 10 वर्षीय छात्रा ने लगाई फांसी, मामूली विवाद के बाद चुन्नी से पंखे पर झूली, टेबल पर चढ़कर बनाया फंदा

दुर्ग/भिलाई : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां 10 साल की एक बच्ची ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली. वह अपने छोटे भाई के डांटने से नाराज थी. बच्ची 4 क्लास में पढ़ती थी. जब छात्रा ने फांसी लगाया उस वक्त घर में परिवार का कोई बड़ा सदस्य मौजूद नहीं था. बताया जा रहा है कि कि भाई बहन के बीच झगड़ा हुआ. जिसके बाद भाई ने उसे डांट दिया. यह मामला जामुल थाना क्षेत्र का है.
मिली जानकारी के मुताबिक गणेश नगर वार्ड नम्बर 5 में रहने वाली गुरप्रीत कौर चौथी क्लास में पढ़ती थी. वह स्वामी आत्मानंद स्कूल की छात्रा थी. उसके पिता ड्राइवर हैं और मां ब्यूटी पार्लर चलती है. 19 मार्च को दोनों काम पर गए हुए थे. इसी दौरान भाई और बहन के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ.
घर में भाई और बहन थे. किसी बात को लेकर उसका अपने छोटे भाई से विवाद हो गया. जिसके बाद भाई ने उसे जमकर डांटा. भाई की डांट से छात्रा नाराज हो गई. वह अंदर कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया. वहां उसने टेबल लगाकर सिलिंग फैन पर चुनरी से फांसी का फंदा बनाया और लटक गई.
परिजन जब काम से लौटे तो उन्होंने बेटी को आवाज दी लेकिन उसने बहुत देर तक गेट नहीं खोला. उसके बाद जब परिजनों ने देखा तो वह फांसी के फंदे पर लटक रही थी. इसके बाद आनन-फानन में परिजन और पड़ोसियों ने बच्ची को फंदे से उतारा और उसे अस्पताल लेकर गए. लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
बच्ची का अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया गया. परिजनों ने मामले की जानकारी पुलिस को भी दी है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मर्ग कायम कर लिया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है. पुलिस सभी एंगल से घटना की जांच कर रही है.
इस दर्दनाक घटना ने पूरे वार्ड और इलाके के निवासियों में शोक और चिंता पैदा कर दी है. पड़ोसियों और स्कूल के शिक्षक भी बच्ची की अकस्मात मौत से स्तब्ध हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार को इस घटना से उबरने में लंबा समय लगेगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं में परिवार और समाज की मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता बहुत अहम होती है. बच्चे की छोटी-सी बात या विवाद भी भावनात्मक रुप से गहरी चोट पहुंचा सकता है. ऐसे मामलों में परिजनों को समय पर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए.
घटना ने स्कूल और आसपास के इलाके में सुरक्षा और निगरानी के महत्व को भी उजागर किया है. स्कूल प्रशासन ने भी छात्राओं और छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य और आपसी समझदारी के बारे में जागरूक करने की योजना बनाई है. जामुल पुलिस इस मामले में सख्ती बरत रही है और परिवार को हर संभव मदद देने का आश्वासन दे रही है. पुलिस ने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी तरह की अनदेखी या आपसी विवाद को गंभीरता से लेना जरुरी है. इस दुखद घटना ने जिले में मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों की सुरक्षा के प्रति चेतना बढ़ाने की जरुरत को फिर से उजागर किया है.
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