अंकिता भंडारी हत्याकांड: भाजपा महासचिव दुष्यंत गौतम की शिकायत पर पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार, गिरफ्तारी से मची हलचल
Ankita Bhandari murder case: Former BJP MLA Suresh Rathore arrested following a complaint by BJP General Secretary Dushyant Gautam; arrest sparks a stir.
देहरादून : अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. देहरादून पुलिस ने उन्हें हरिद्वार के बुग्गावाला क्षेत्र से गिरफ्तार किया है.
मिली जानकारी के मताबिक अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले से जुड़े एक ऑडियो के वायरल होने के बाद देहरादून के डालनवाला थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था. इसी मामले में यह कार्रवाई की गई है. सुरेश राठौर पर आरोप है उन्होंने अंकिता से जुड़े उन कथित ऑडियो को वायरल कर दिया था. इसी मामले में भाजपा महासचिव दुष्यंत गौतम ने शिकायत दर्ज करवाई थी और अब सुरेश ठाकुर की गिरफ्तारी हो गई.
पूर्व विधायक सुरेश राठौर ज्वालापुर विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक रह चुके हैं. पिछले दिनों सहारनपुर की रहने वाली अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर कई ऑडियो साझा किए थे. उन ऑडियो को कथित तौर पर अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़कर देखा गया था.
इन्ही ऑडियो को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज एफआईआर में से दो को रद्द कर दिया था. लेकिन बाकी दो FIR में पुलिस को जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी.
शिकायतकर्ता दुष्यंत गौतम और आरती कौर ने आरोप लगाया था कि जानबूझकर उस ऑडियो को वायरल किया गया. वहीं, सुरेश राठौर ने देहरादून और हरिद्वार जिलों में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को पूरी तरह निराधार बताया है. फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है.
अंकिता भंडारी हत्याकांड क्या है?
19 साल की अंकिता वनंतरा रिजॉर्ट में काम करती थीं. रिजॉर्ट के मैनेजर पुलकित आर्य ने एक वीआईपी को अश्लील सेवा देने से इंकार करने पर उनकी हत्या कर दी. पुलकित आर्य, पूर्व बीजेपी नेता विनोद आर्य का बेटा है. अंकिता का शव 24 सितंबर 2022 को लापता होने के छह दिन बाद ऋषिकेश की एक नहर से मिला था.
कोर्ट ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. लेकिन जांच में वीआईपी एंगल शामिल नहीं किया गया. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने संकेत दिया था कि रिजॉर्ट में एक वीआईपी की मौजूदगी थी और अंकिता आरोपियों के अश्लील प्रस्तावों से परेशान थी.
जांच के दौरान सबूतों के नष्ट होने के भी आरोप लगे. घटना के बाद रिजॉर्ट में अंकिता के कमरे पर बुलडोजर चला दिया गया. उसका फोन, बेडशीट और मुख्य आरोपी का फोन बरामद नहीं हो पाए. सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाएं दायर हुईं, लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया.
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