पत्रकारों और राष्ट्रीय पर्व के नाम पर 35 लाख की वसूली का आरोप, जिला पंचायत CEO व पूर्व DPRO पर शिकंजा कसने खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत

Complaint lodged with the Chief Minister regarding the alleged extortion of ₹35 lakh in the name of journalists and a national festival, and against the move to shield the District Panchayat CEO and former DPRO from scrutiny.

पत्रकारों और राष्ट्रीय पर्व के नाम पर 35 लाख की वसूली का आरोप, जिला पंचायत CEO व पूर्व DPRO पर शिकंजा कसने खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत

मुंगेली : राष्ट्रीय पर्व भी क्या अब वसूली का जरिया बन गया है? पत्रकारों के नाम पर मिठाई और सौजन्य भेंट के बहाने शासकीय विभागों से कथित तौर पर लाखों रुपये जुटाए जाने की शिकायत ने मुंगेली के प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पत्रकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ने मुख्यमंत्री के नाम शिकायत कर जिला पंचायत CEO गोकुल रावटे और तत्कालीन जिला जनसंपर्क अधिकारी सुजीत सिंह के खिलाफ करीब 32 से 35 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए हैं.
शिकायत क्रमांक WP260900176043 में आरोप है कि स्वतंत्रता दिवस के नाम पर जिले के विभिन्न विभागों से कथित तौर पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक की राशि जुटाई गई. सवाल यह है कि आखिर किस आदेश के तहत विभागों से यह रकम मांगी गई? किस खाते में गई? किसे सौंपी गई? और सबसे बड़ा सवाल—अगर रकम पत्रकारों के लिए थी तो उसका हिसाब कहां है?
विभागों पर दबाव या “सहयोग” के नाम पर वसूली?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर कई विभागों से राशि इकठ्ठा कराई गई और करीब 32 से 35 लाख रुपये तत्कालीन जिला जनसंपर्क अधिकारी को सौंपे गए. आरोप यहीं खत्म नहीं होते हैं. शिकायत में रकम के उपयोग और लेखा-जोखा पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कथित बंदरबांट की आशंका जताई गई है.
अगर आरोप सही हैं तो यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं, बल्कि शासकीय पद, राष्ट्रीय पर्व और पत्रकारिता की प्रतिष्ठा—तीनों के कथित दुरुपयोग का मामला बन सकता है.
CEO का बयान भी खड़े कर रहा सवाल
जिला पंचायत CEO गोकुल रावटे ने आरोपों से दूरी बनाते हुए कहा कि उन्हें “बड़े साहब” के कहने पर कुछ विभागों को सहयोग करने कहा गया था. लेकिन किसी राशि का निर्धारण नहीं किया गया था. उन्होंने इसके लिए जिला जनसंपर्क अधिकारी को जिम्मेदार बताया.
CEO का यह बयान अपने आप में कई सवाल छोड़ जाता है—अगर राशि तय नहीं थी तो विभागों से रकम जुटाने की बात कहां से आई? किसने किसे निर्देश दिए? और अगर रकम जुटी तो उसका हिसाब किसके पास है?
अब जांच से खुलेगा “मिठाई” का असली हिसाब!
शिकायतकर्ता ने मामले की जांच ACB/EOW से कराने, जिले के सभी संबंधित DDOs के वित्तीय लेनदेन का ऑडिट कराने तथा जांच प्रभावित होने से रोकने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है.
अब गेंद शासन के पाले में है। अगर शिकायत में लगाए गए आरोप निराधार हैं तो जांच से तस्वीर साफ हो जाएगी। लेकिन अगर आरोपों में दम है, तो सवाल सिर्फ 32-35 लाख रुपये का नहीं होगा—सवाल यह होगा कि सरकारी तंत्र में राष्ट्रीय पर्व और पत्रकारों के नाम पर कथित वसूली का यह खेल आखिर किसके संरक्षण में चल रहा था?
मुंगेली के पत्रकार भी अब जानना चाहते है  मिठाई बटी थी या सरकारी तंत्र में करोड़ों की बीमारी का छोटा-सा बिल बनाया गया था? या फिर मिठाई भी चुनिंदा पत्रकारों के बीच ही बंटवारा कर अन्य पत्रकारों को बदनाम कर दिया गया.
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले में जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
गुप्त ऑडिट और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। इसके अलावा-
* ACB अथवा EOW से कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराई जाए।
* मुंगेली जिले के सभी DDOs के खातों का गुप्त वित्तीय ऑडिट कराया जाए।
* संबंधित विभागों से कथित रूप से ली गई राशि के स्रोत और भुगतान का सत्यापन किया जाए।
* जांच प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
* कथित लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों एवं वित्तीय अभिलेखों की जांच की जाए।
शिकायत सामने आने के बाद प्रशासनिक और विभागीय हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
CEO ने आरोपों से किया किनारा
मामले को लेकर मिडिया ने जिला पंचायत CEO गोकुल रावटे से संपर्क किया. उन्होंने कथित अवैध वसूली में अपनी भूमिका से इंकार करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले से दूर रखा जाए. उनके मुताबिक, “बड़े साहब ने कहा था, इसलिए मैंने कुछ विभागों को सहयोग करने के लिए कहा था. कोई राशि तय नहीं की गई थी. इसके लिए जिला जनसंपर्क अधिकारी खुद जिम्मेदार हैं.”
इस बयान के बाद मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं. शिकायत में लगाए गए आरोपों और CEO के बयान के बीच तथ्यात्मक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
वहीं, मामले में तत्कालीन जिला कलेक्टर कुन्दन कुमार का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया. लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका. उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा.
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