ऑपरेशन क्लीन हंट : कम समय में ज्यादा रकम का झांसा देकर कराया इन्वेस्टमेंट, फिर कंपनी बंद कर फरार, चिटफंड कंपनी का डायरेक्टर सुनील तिवारी गिरफ्तार
Operation Clean Hunt: Chit fund company director Sunil Tiwari arrested; he lured investors with promises of high returns in a short period, then shut down the company and absconded.
रायगढ़/घरघोड़ा : रायगढ़ जिले में फरार व लंबित आरोपियों की तलाशी व गिरफ्तारी के लिए “ऑपरेशन क्लीन हंट” चलाया जा रहा है. अभियान के तहत रायगढ़ पुलिस द्वारा लगातार फरार आरोपियों एवं वारंटियों की धरपकड़ की जा रही है. इसी कड़ी में घरघोड़ा पुलिस ने चिटफंड कंपनी के फरार डायरेक्टर सुनील तिवारी को जशपुर से हिरासत में लेकर रायगढ़ लाया है.
थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू को मुखबिर से खबर मिली कि चिटफंड मामले का फरार आरोपी सुनील तिवारी जशपुर आया हुआ है. खबर पर पुलिस टीम ने आरोपी को जशपुर से हिरासत में लिया और थाना घरघोड़ा लाकर पूछताछ की. पूछताछ में आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर जुर्म करना कबूल किया. आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया. जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया.
मिली जानकारी मुताबिक 27 मार्च को प्रार्थी लालबाबू गुप्ता निवासी नवापारा घरघोड़ा द्वारा थाना घरघोड़ा में रिपोर्ट दर्ज कराई कि नवापारा घरघोड़ा में राजकुमार कोसे द्वारा “शुष्क इंडिया लिमिटेड” नामक कंपनी संचालित की जा रही थी. कंपनी के जरिए लोगों को कम समय में ज्यादा रकम देने का लालच देकर पैसा जमा कराया जाता था.
प्रार्थी ने भी कंपनी की बातों में आकर वर्ष 2012 से अपने और अपने पति/पिता बसंती गुप्ता के नाम पर हर महिने 601 रुपये की दर से रकम जमा करना शुरू किया था. इसी तरह वार्ड के कई अन्य लोगों ने भी मासिक और फिक्स डिपॉजिट के रूप में कंपनी में रकम जमा की थी.
वर्ष 2016 में राजकुमार कोसे बिना निवेशकों की रकम वापस किए नवापारा घरघोड़ा से फरार हो गया. बाद में उसके वापस आने पर निवेशकों द्वारा रकम वापस मांगी गई तो कंपनी बंद होने और कंपनी के ऊपर केस चलने की बात कहकर रकम वापस करने से इंकार कर दिया गया.
इस तरह कंपनी संचालक द्वारा कई लोगों को कम समय में ज्यादा रकम देने का झांसा देकर पैसा जमा कराया गया और निवेशकों को बांड पेपर भी दिए गए. कंपनी बंद होने के बाद रकम वापस नहीं करने की शिकायत पर थाना घरघोड़ा में धारा 420, 467, 468 भादवि व धारा 6, 10 छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत जुर्म दर्ज किया गया.
जांच के दौरान प्रार्थी व निवेशकों के बयान दर्ज किए गए और निवेशकों को दिए गए बांड पेपर और आरोपी राजकुमार कोसे द्वारा संचालित कार्यालय का सामान जप्त किया गया. आरोपी राजकुमार कोसे को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था. मामले में पुख्ता सबूत पाए जाने पर धारा 467, 468 भादवि जोड़ी गई और जांच पूरी कर 11 जून 2017 को अभियोग पत्र अदालत में पेश किया गया.
ROC से सामने आई कंपनी के डायरेक्टरों की जानकारी
इस मामले में कंपनी के मुख्य डायरेक्टरों के बारे में जांच धारा 173(8) जाफौ के तहत जारी रखते हुए आरओसी ग्वालियर से कंपनी के डायरेक्टरों की जानकारी ली गई.
जांच में कंपनी के डायरेक्टर के रूप में
1. दिनेश सैनी पिता नंदकिशोर लोधी, निवासी मक्सी, जिला शाजापुर (म.प्र.)
2. नरेंद्र लोधी पिता हरिसिंह लोधी, निवासी मक्सी, जिला शाजापुर (म.प्र.)
3. सुनील तिवारी पिता दशरथ प्रसाद तिवारी, निवासी इंदौर, मध्यप्रदेश का नाम सामने आया.
पतासाजी के दौरान आरोपी दिनेश सैनी के केंद्रीय जेल उज्जैन में बंद होने की जानकारी मिलने पर अदालत के आदेशानुसार उसे प्रोडक्शन वारंट पर केंद्रीय जेल उज्जैन से हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. पूछताछ में जुर्म कबूल करने पर उसे 28 जून 2022 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल उज्जैन में बंद कराया गया.
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देश पर मामले के बाकी आरोपियों की पतासाजी लगातार की जा रही थी. इसी दौरान थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू को फरार डायरेक्टर सुनील तिवारी के जशपुर आने की खबर मिलने पर घरघोड़ा पुलिस ने 3 सितम्बर को उसे जशपुर से हिरासत में लेकर थाना घरघोड़ा लाया.
पूछताछ में आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर जुर्म करना कबूल किया. इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया. जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया.
फरार आरोपी सुनील तिवारी पिता दषरथ प्रसाद तिवारी 41 साल द्वारिकापुरी जिला इंदौर (म.प्र.) की गिरफ्तारी में निरीक्षक कुमार गौरव साहू, थाना प्रभारी घरघोड़ा, एएसआई डेविड टोप्पो व आरक्षक हरीश पटेल की अहम भूमिका रही.
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