खबर का हुआ बड़ा असर, कामधेनु विश्वविद्यालय अंजोरा में बैकडेट व नियम विरुद्ध भर्तियों तथा निर्माण कार्यों की जांच के आदेश, सभी प्रक्रियाओं पर तत्काल रोक
News report has significant impact: Orders issued for an inquiry into backdated and irregular recruitments and construction works at Kamdhenu University, Anjora; an immediate halt has been placed on all related processes.
पत्रकारिता प्रभाव:
हमारी खबर का हुआ बड़ा असर, राजभवन ने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर कसा शिकंजा
अंततः मनमर्जी पर लगा विराम:
कामधेनु विश्वविद्यालय में बैकडेट व नियम विरुद्ध भर्तियों तथा निर्माण कार्यों की जांच के आदेश, सभी प्रक्रियाओं पर तत्काल रोक
रायपुर/दुर्ग : दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, अंजोरा (दुर्ग) में लंबे समय से चल रही मनमानी, वित्तीय अनियमितताओं और शैक्षणिक पदों पर चहेतों को लाभ पहुंचाने के खेल पर अंततः विराम लग गया है.
ताजा खबर द्वारा प्रमुखता व निष्पक्षता से प्रकाशित की गई खबर पर महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने कड़ा संज्ञान लिया है. राजभवन से जारी एक कड़े आदेश के तहत विश्वविद्यालय में चल रही सभी शैक्षणिक भर्तियों, साक्षात्कारों और नियुक्तियों की संपूर्ण प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है
राजभवन द्वारा जारी आदेश के मुख्य बिंदु:
भर्तियों पर पूर्ण रोक: विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों पर चल रही भर्ती, इंटरव्यू और नियुक्ति से संबंधित समस्त प्रक्रियाओं व कार्यवाहियों को आगामी आदेश तक तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया है.
भ्रष्टाचार की जांच में तेजी:
भवनों के निर्माण एवं रखरखाव कार्यों में बड़े पैमाने पर हुई धांधली और भ्रष्टाचार की प्राप्त शिकायतों पर चल रही जांच की प्रगति का निरीक्षण करने के निर्देश कुलाधिपति द्वारा दिए गए हैं.
विधिक प्रावधान लागू:
यह पूरी कार्यवाही 'दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय अधिनियम 2011' की धारा-52 में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है.
हमारी खबर का दिखा व्यापक असर
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नियमों को ताक पर रखकर की जा रही भर्तियों और ढांचागत निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार को लेकर ताजा खबर ने पूर्व में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था. लगातार फॉलो-अप रिपोर्टिंग के जरिए इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया गया. जिसके बाद राजभवन को इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा.
राजभवन के इस फैसले से जहां नियम विरुद्ध काम करने वाले अधिकारियों और सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है. वहीं पारदर्शिता की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों और आम जनता में न्याय की उम्मीद जगी है. राजभवन का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.
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