पीएम आवास फर्जीवाड़ा, अधूरे मकानों पर गृह प्रवेश कराना पड़ा भारी, जनपद सदस्य परमेश्वर जैन ने खोली पोल, हटाईं गईं जनपद की CEO श्वेता वर्मा
PM Housing scam: House warming ceremonies for unfinished houses proved costly; District Council member Parameshwar Jain exposed the matter, and District CEO Shweta Verma was removed.
गरियाबंद : गरियाबंद जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत सामने आई गंभीर अनियमितताओं के आरोप के बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है. मैनपुर जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सुश्री स्वेता वर्मा को पद से हटा दिया गया है. जिला पंचायत गरियाबंद के सीईओ प्रखर चंद्राकर ने आदेश जारी कर उन्हें जनपद सीईओ के दायित्व से मुक्त कर दिया है.
मिली जानकारी के मुताबिक कई मकानों में न तो छत की ढलाई हुई थी और न ही निर्माण कार्य अंतिम चरण तक पहुंचा था. इसके बावजूद उन्हें पूर्ण आवास घोषित कर 1 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सामूहिक गृह प्रवेश कार्यक्रम में शामिल कर दिया गया.
जांच में यह भी सामने आया कि आवास पोर्टल पर ऑनलाइन एंट्री की तकनीकी व्यवस्था का दुरुपयोग कर अधूरे मकानों को पूरा दिखाया गया. कुछ मामलों में तो मकानों की नींव तक नहीं रखी गई थी. लेकिन सहायक सचिव और आवास मित्रों द्वारा मनरेगा मद से मजदूरी की राशि निकाल ली गई. इससे वास्तविक हितग्राहियों को नुकसान हुआ और उनके आवासों का निर्माण अधर में लटक गया.
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने गृह प्रवेश कार्यक्रम की सूची का जमीनी सत्यापन किया. मैनपुर जनपद सदस्य परमेश्वर जैन ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र की सरईपानी पंचायत में गोवर्धन नागेश, कन्हल राम और गजेंद्र के आवास अधूरे थे, फिर भी उन्हें पूर्ण दिखाया गया. इसी तरह उसरी जोर पंचायत में दुर्गा टांडिया तथा गुढ़ियारी पंचायत में सुखचंद का आवास भी अधूरा पाया गया.
परमेश्वर जैन के मुताबिक सामूहिक गृह प्रवेश सूची में शामिल 40 से ज्यादा आवासों में से तकरीबन आधे अधूरे थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में मनरेगा की मजदूरी राशि गलत तरीके से अन्य व्यक्तियों के नाम पर निकाल ली गई.
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे बड़ी प्रशासनिक चूक मानते हुए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरु की. प्रारंभिक जांच में जनपद पंचायत स्तर पर लापरवाही और निगरानी में कमी सामने आने के बाद जनपद सीईओ सुश्री स्वेता वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की गई. मामले की जांच जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही कागज के इन घरों को जमीन पर उतारने वाले असली गुनहगारों पर कड़ी कार्रवाई होगी.
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