टाटा मोटर्स और गल्फ ऑयल के नाम पर नकली इंजन ऑयल बिक्री का भंडाफोड़, आरोपी दिनेश गिरफ्तार, 4.30 लाख रुपये के डुप्लीकेट लुब्रिकेंट बरामद

Racket selling counterfeit engine oil under the names of Tata Motors and Gulf Oil busted; accused Dinesh arrested, and duplicate lubricants worth ₹4.30 lakh seized.

टाटा मोटर्स और गल्फ ऑयल के नाम पर नकली इंजन ऑयल बिक्री का भंडाफोड़, आरोपी दिनेश गिरफ्तार, 4.30 लाख रुपये के डुप्लीकेट लुब्रिकेंट बरामद

बलौदाबाजार-भाटापारा : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में नामी कंपनियों के नाम पर नकली लुब्रिकेंट बेचने का मामला सामने आया है. भाटापारा ग्रामीण पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है. आरोपी के कब्जे से टाटा मोटर्स और गल्फ ऑयल की पैकिंग वाले 246 नकली डिब्बे जब्त किए गए हैं, जिनकी कीमत करीब  बताई गई है.
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम अर्जुनी स्थित जय जगन्नाथ यूरिया-पानी एवं ग्रीसिंग सेंटर में नकली उत्पाद बेचे जाने की शिकायत मिली थी. ईआईपीआर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि शनि घोष की शिकायत पर पुलिस टीम ने दुकान की जांच की. यहां टाटा मोटर्स के 149 और गल्फ ऑयल के 97 नकली डिब्बे मिले. पुलिस ने आरोपी दिनेश रजक उम्र 20 साल को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
थाना प्रभारी के मुताबिक आरोपी असली कंपनियों के नाम, लोगो और पैकिंग जैसी दिखने वाली सामग्री का इस्तेमाल कर नकली इंजन ऑयल और डीजल एग्जॉस्ट फ्लुइड बेच रहा था. पुलिस ने नकली उत्पादों के कारोबार पर सख्त कदम उठाया है. पकड़े गए आरोपी को अदालत के सामने पेश कर जेल भेज दिया गया है. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इन डिब्बों की सप्लाई चेन कहां से जुड़ी है और कौन-कौन लोग इस अवैध निर्माण में शामिल हैं.
सप्लाई नेटवर्क की पड़ताल जारी
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, घटिया या नकली इंजन ऑयल का इस्तेमाल वाहनों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित होता है. अमानक लुब्रिकेंट के इस्तेमाल से वाहन के इंजन का तापमान अचानक बढ़ जाता है. जिससे पिस्टन और अन्य अंदरूनी कलपुर्जे घिसकर ब्लॉक हो जाते हैं. इस तरह के मामलों से जहां आम उपभोक्ताओं को हजारों रुपये का नुकसान झेलना पड़ता है. वहीं ब्रांडेड कंपनियों की साख पर भी असर पड़ता है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन नकली डिब्बों की पैकिंग कहां प्रिंट कराई जा रही थी.
नकली सामान से बचने के लिए क्या करें?
होलोग्राम और क्यूआर कोड: डिब्बे पर लगा कंपनी का आधिकारिक सिक्योरिटी होलोग्राम और क्यूआर कोड अवश्य स्कैन करें
बैच नंबर और एमआरपी: पैकेट पर छपे बैच नंबर, निर्माण तिथि और एमआरपी की छपाई स्पष्ट है या नहीं, यह ध्यान से देखें
पक्का बिल लें: किसी भी दुकान से ऑटो पार्ट्स या ऑयल खरीदते समय जीएसटी युक्त पक्का बिल जरूर मांगें
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