होली मनाने हॉस्टल से घर पहुंचे आदिवासी छात्र की मौत, छात्रावास प्रबंधन पर परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप, अधीक्षक रामबिलास सस्पेंड
Tribal student who returned home from hostel to celebrate Holi dies, family members make serious allegations against hostel management, superintendent Rambilas suspended
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : जिले के लाटा स्थित एकलव्य आदर्श संयुक्त आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में प्रबंधन की लापरवाही की वजह से एक आदिवासी छात्र की मौत हो गई. मृतक छात्र के परिजनों का आरोप है कि छात्र पहले से ही बीमार था. लेकिन इसकी जानकारी उनसे छुपाई गई. होली की छुट्टी मनाने जब वह घर पहुंचा. तो उसकी हालत अचानक नाजुक हो गई. उसे फौरन प्राइवेटअस्पताल ले जाया गया. जहां से उसकी हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर किया गया. वहां से भी डॉक्टरों ने उसे बिलासपुर रेफर कर दिया. लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया.
मिली जानकारी के मुताबिक पेंड्रा के सरखोर गांव का रहने वाला आदिवासी शिवम सिंह श्याम संयुक्त आवासीय विद्यालय लाटा में पढ़ाई करता था. 12 मार्च को शिवम की मौत हो गई. घर में शिवम ने छात्रावास को लेकर कई गंभीर शिकायत की थी. छात्रावास अधीक्षक के द्वारा बच्चो को परिजनों से मोबाइल पर बात तक नहीं करवाते हैं. अगर वहां का चौकीदार परिजनों से बच्चों की बात कराता है तो पैसा लेता है. परिजनों का कहना था कि उनका शिवम पिछले तीन से चार दिनों से बीमार था. लेकिन उसकी बात परिजनों से नही कराई न ही उसे इलाज़ के लिए अस्पताल लाया गया. आखिर कार शिवम की मौत हो गई .
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने आदिवासी विभाग गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के अधीक्षक रामबिलास को लापरवाही के आरोप में सस्पेंड करने की अनुशंसा की है. यह मामला 11 मार्च को कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले छात्र शिवम सिंह की मौत से संबंधित है.
परिजनों का कहना है कि बच्चे के शरीर में खून की कमी थी और घटना से 3 दिन पहले से ही उसकी तबीयत खराब थी. लेकिन इसकी कोई जानकारी उन्हें नहीं दी गई. गौरेला पुलिस ने मामले की जांच कर रही है.
वहीं स्कूल के प्रिंसिपल अमित कुमार पायल ने बताया कि शिवम सिंह होली की छुट्टी लेकर घर गया था. छुट्टी पर जाने से पहले हॉस्टल प्रबंधन ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया था. जिसमें कोई गंभीर बात सामने नहीं आई थी. घर पहुंचने के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई.
परिजनों का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते कार्रवाई करता तो शायद शिवम की जान बच सकती थी. यह घटना प्रशासन और हॉस्टल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है. जिससे आदिवासी छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं.
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