धमतरी में उफनते नालों ने ली 2 मासूमों की जान, 14 वर्षीय छात्रा तराना का शव भी तीन दिन बाद बरामद, इधर तालाब में डूबा 15 साल का मासूम, 7 घंटे बाद मिली लाश
Swollen drains claimed the lives of two children in Dhamtari; the body of 14-year-old student Tarana was recovered after three days, while a 15-year-old boy drowned in a pond, with his body found seven hours later.
धमतरी : धमतरी जिले में लगातार बारिश और उफनते नालों के बीच सुरक्षा व्यवस्था की कमी दो परिवारों के लिए भारी साबित हुई. सोरिद वार्ड में नाले में बहे 7 साल के बच्चे लक्ष्य साहू का शव 24 घंटे की तलाश के बाद सोमवार शाम बरामद किया गया था. वहीं शनिवार से लापता 14 साल की छात्रा तराना निषाद का शव भी तीन दिन बाद मंगलवार को महानदी के परखंदा-सौंगा टापू के पास मिला. दोनों हादसों के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है.
मिली जानकारी के मुताबिक मेघा निवासी 14 साल की छात्रा तराना निषाद पिता उदे राम निषाद, शनिवार को महानदी में आई बाढ़ देखने गई थी. इसी दौरान मातारानी पेट्रोल पंप के पास सड़क किनारे बने नाले के तेज बहाव में वह गिर गई और पानी के साथ बह गई. हादसे की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीम ने नाले और आसपास के क्षेत्रों में तलाश शुरू की.
लगातार तीन दिनों तक छात्रा की खोजबीन की गई. लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका. मंगलवार को मगरलोड ब्लॉक के ग्राम सौंगा और परखंदा के बीच महानदी के एक टापू के पास ग्रामीणों ने एक शव फंसा हुआ देखा. इसकी खबर कोटवार और सरपंच को दी गई. जिसके बाद मगरलोड पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया और परिजनों को जानकारी दी.
परिजनों ने शव की पहचान तराना निषाद के रूप में की. इसके बाद पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. तीन दिन से बेटी की तलाश कर रहे परिवार पर शव मिलने के बाद दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.
इससे पहले रविवार शाम सोरिद भरीपारा निवासी 7 वर्षीय लक्ष्य साहू, पिता गौतम साहू, खेलते समय खुले नाले में गिरकर बह गया था। बच्चे के लापता होने के बाद परिजन और स्थानीय लोग उसकी तलाश में जुट गए थे. हादसे से नाराज नागरिकों ने नेशनल हाईवे पर चक्काजाम भी किया था. इसके बाद प्रशासन ने तलाश तेज की और पुल को तुड़वाकर पाइपों की जांच कराई गई. सोमवार शाम करीब 5:30 बजे चौथे पाइप में लक्ष्य का शव फंसा हुआ मिला. दो दिनों के भीतर दो बच्चों की मौत के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश के दिनों में खुले नालों, पुल-पुलियों और तेज बहाव वाले स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे. नागरिकों का कहना है कि कई जगहों पर सुरक्षा रेलिंग, चेतावनी बोर्ड, जालियां और बैरिकेडिंग का अभाव है. बारिश के दौरान ऐसे स्थान बच्चों और राहगीरों के लिए खतरनाक बन जाते हैं. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन ऐसे सभी संवेदनशील स्थानों की पहचान कर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करे. विशेष रूप से खुले नालों और तेज बहाव वाले हिस्सों में बैरिकेडिंग और जाली लगाने की आवश्यकता बताई जा रही है. लक्ष्य साहू और तराना निषाद की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। दोनों परिवारों में मातम पसरा हुआ है. वहीं लोगों में प्रशासन की तैयारियों को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है.
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तालाब में डूबा 15 साल का मासूम, 7 घंटे बाद मिला शव
कांकेर : छत्तीसगढ़ के कांकेर स्थित ठेमा गांव में दर्दनाक हादसा हो गया. 15 साल का संतकुमार दोस्तों के साथ तालाब में नहाने गया था. तैरते समय वह तालाब के गहरे पानी में चला गया. प्रशासन और रेस्क्यू टीम ने 7 घंटे तक तलाश की. आखिरकार ग्रामीणों ने खुद गोता लगाकर शव बाहर निकाला.
तालाब में नहाने गया था किशोर
कांकेर जिले के ठेमा गांव में सोमवार सुबह 15 साल का संतकुमार यादव सुबह करीब 9:30 बजे घर से निकला था. वह अपने दोस्तों के साथ गांव के तालाब में नहाने गया था. उसके साथ ईशान यादव पानी में उतरा था. दो अन्य दोस्त खिलेश वट्टी और खगेश्वर वट्टी सीढ़ियों पर बैठे थे. नहाते-नहाते संतकुमार तैरकर तालाब के बीच में चला गया. गहरे पानी में जाने के कारण वह अचानक डूबने लगा. दोस्तों ने उसे बचाने का प्रयास किया. लेकिन वे नाकाम रहे. हादसे की खबर तुरंत गांव में फैल गई. परिजन और ग्रामीण बदहवास होकर तालाब की ओर भागे.
7 घंटे तक चला रेस्क्यू
घटना की खबर फौरन पुलिस को दी गई. पुलिस और होमगार्ड की टीम मौके पर पहुंची. टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. तालाब में मोटरबोट उतारी गई. जवान बांस की मदद से पानी में तलाश करते रहे. करीब 7 घंटे तक लगातार तलाश जारी रही. लेकिन रेस्क्यू टीम को कामयाबी नहीं मिली. समय बीतने के साथ परिजनों की उम्मीद टूटने लगी. ग्रामीण भी राहत कार्य में जुट गए.
ग्रामीणों ने निकाला शव
ग्रामीणों ने खुद पानी में उतरने का फैसला किया. स्थानीय ग्रामीणों ने तालाब में गोता लगाया. संतकुमार का शव बाहर निकाला गया. शव बाहर आते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई. गांव का माहौल गमगीन हो गया. जिस बेटे का इंतजार घर पर हो रहा था. उसका शव पहुंचा। मासूम का शव देखकर हर कोई रो पड़ा. पूरे गांव में मातम फैल गया.
दो बहनों का इकलौता भाई
संतकुमार दो बहनों का इकलौता भाई था. परिवार को उससे बहुत उम्मीदें थीं. महज 15 साल की उम्र में वह दुनिया छोड़ गया. इस हादसे से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. दोनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है. माता-पिता सदमे में हैं। गांव के लोग परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं. इस घटना ने पूरे ठेमा गांव को झकझोर दिया है.
रेस्क्यू व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन की तैयारी की पोल खोल दी है. सात घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन ने सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं. ग्रामीणों ने रेस्क्यू टीम की सुस्ती पर नाराजगी जताई. स्थानीय होमगार्ड के पास आधुनिक उपकरणों की कमी दिखी. टीम के पास विशेषज्ञ गोताखोर भी मौजूद नहीं थे. गहरे जलस्रोतों में बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं. समय पर विशेषज्ञ मिलते तो शायद स्थिति अलग होती. ग्रामीणों ने प्रशासन से बेहतर उपकरण तैनात करने की मांग की है.
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