पारागांव में राम मंदिर के नाम पर सड़क किनारे के दुकानदारों से जबरन वसूला जा रहा 1000, रसीद मंदिर की-ले रहे दूकान का टैक्स!, जांच की उठ रही मांग
In Paragaon, roadside shopkeepers are being forcibly charged ₹1,000 in the name of the Ram Mandir; while the receipt issued is for the temple, the money is being collected as a shop tax—demands for an investigation are being raised.
गरियाबंद/पारागांव : धार्मिक आयोजन के नाम पर लगने वाले मेलों और बाजारों में दुकानदारों से शुल्क वसूली आम बात है. लेकिन पारागांव में कथित तौर पर सड़क किनारे दुकान लगाने वाले कारोबारियों से ₹1000 प्रति दुकान वसूले जाने का मामला सामने आया है. खास बात यह है कि इसके लिए दी जा रही रसीद पर “राम जानकी समिति पारागांव, ग्राम पंचायत पारागांव (गरियाबंद)” अंकित है.
सामने आई रसीद में “दुकान रसीद” स्पष्ट रूप से लिखा है और राशि के स्थान पर ₹1000 दर्ज है. वहीं मौके की तस्वीरों में बड़ी तादाद में सड़क किनारे अस्थायी दुकानें और स्टॉल लगे दिखाई दे रहे हैं. दुकानदारों का आरोप है कि उनसे दुकान लगाने के एवज में यह रकम ली जा रही है.
मंदिर की रसीद से दुकान टैक्स वसूली?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर राशि दुकान लगाने के शुल्क या टैक्स के रूप में ली जा रही है, तो इसकी वैधानिक अनुमति किसके द्वारा दी गई है? क्या ग्राम पंचायत ने इसके लिए कोई प्रस्ताव या आदेश जारी किया है? अगर शुल्क मंदिर समिति द्वारा लिया जा रहा है, तो उसे दुकान शुल्क/टैक्स के रूप में वसूलने का अधिकार किस नियम के तहत मिला है?
दुकानदारों का कहना है कि सड़क किनारे दुकान लगाने के लिए उनसे कथित तौर पर ₹1000 मांगे जा रहे हैं. राशि नहीं देने पर दुकान लगाने में परेशानी होने की बात भी सामने आ रही है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि अभी बाकी है.
प्रशासन की नाक के नीचे वसूली के आरोप
मामले ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. अगर सार्वजनिक सड़क या पंचायत क्षेत्र में अस्थायी दुकानें लग रही हैं और उनसे शुल्क वसूला जा रहा है तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वसूली किसके आदेश से और किस मद में की जा रही है.
वहीं अगर यह राशि किसी धार्मिक समिति द्वारा आयोजन के लिए स्वैच्छिक सहयोग के रूप में ली जा रही है, तो दुकानदारों से जबरन वसूली के आरोपों की जांच होना जरूरी है.
जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई
इस मामले में ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला प्रशासन को पूरे मामले की जांच कर यह साफ करना चाहिए कि ₹1000 की वसूली का आधार क्या है. रसीद किस अधिकार से काटी जा रही है और वसूली गई राशि का उपयोग किस काम में किया जाएगा. दुकानदारों से जबरन वसूली के आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी उठ रही है.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—राम मंदिर समिति की रसीद से आखिर दुकानदारों से ₹1000 किस अधिकार के तहत वसूले जा रहे हैं?
इस बारे में मिडिया ने sdm गरियाबंद से बात करने और प्रशासन का पक्ष जानने के लिए बार कॉल किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया.
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