बारिश से जतमई में सैलानियों की भीड़, निर्माणाधीन पुलिया बनी आफत, कई गांवों का संपर्क टूटा, रात भर पेड़ पर रहे 14 मजदूर, पेड़ पर गिरी आकाशीय बिजली

Rain draws crowds of tourists to Jatmai; an under-construction culvert causes trouble, cutting off access to several villages; 14 laborers spent the night in a tree after lightning struck it.

बारिश से जतमई में सैलानियों की भीड़, निर्माणाधीन पुलिया बनी आफत, कई गांवों का संपर्क टूटा, रात भर पेड़ पर रहे 14 मजदूर, पेड़ पर गिरी आकाशीय बिजली

पहली ही बारिश में डूबा इलाका,
राजिम : मानसून की पहली ही बारिश ने क्षेत्र में प्रशासन और ठेकेदार के विकास के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं. कोपरा-पोखरा मार्ग पर समय रहते पुलिया का निर्माण कार्य पूरा न होने की वजह से पहली ही झमाझम बारिश लोगों के लिए बड़ी आफत बनकर टूटी है. निर्माण में हुई घोर लापरवाही की वजह से पूरा इलाका जलमग्न हो चुका है. और मुख्य मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है.
अधूरे निर्माण ने बढ़ाई मुसीबत, कई गांवों का संपर्क टूटा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस पुलिया का निर्माण कार्य लंबे समय से कछुआ गति से चल रहा था. नियमानुसार बारिश का मौसम शुरू होने से पहले इस काम को पूरा किया जाना था. लेकिन ठेकेदार की सुस्ती और अफसरों की अनदेखी का खामियाजा अब हजारों ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है. पहली ही बारिश के बाद निर्माणाधीन पुलिया के आसपास का बड़ा हिस्सा नदी-नाले में तब्दील हो गया है. इस मार्ग से जुड़े आसपास के कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय और अन्य प्रमुख कस्बों से पूरी तरह कट गया है. जिससे आपातकालीन स्थितियों में भी लोगों का निकलना दूभर हो गया है.
आवागमन ठप, वैकल्पिक रास्ता न होने से राहगीर परेशान
सड़क पर पानी का तेज बहाव होने और भारी कीचड़ की वजह से दोपहिया और चार पहिया वाहनों का निकलना नामुमकिन हो गया है. कई राहगीर और आवश्यक सेवाओं वाले वाहन बीच रास्ते में ही फंस गए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार को बार-बार चेतावनी देने के बाद भी न तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए और न ही आवागमन के लिए कोई मजबूत वैकल्पिक रास्ता (डाइवर्जन रोड) तैयार किया गया.
अधिकारियों की संवेदनहीनता: सुध लेने नहीं पहुंचा PWD का कोई जिम्मेदार
इस बड़ी आपदा ने आपदा प्रबंधन के सरकारी दावों की पोल खोल दी है. सबसे ज्यादा आक्रोश इस बात को लेकर है कि मार्ग बंद होने और कई गांवों का संपर्क टूटने के बावजूद लोक निर्माण विभाग (PWD) का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी स्थिति का जायजा लेने मौके पर नहीं पहुंचा है. दफ्तरों में बैठे अफसरों की इस संवेदनहीनता से ग्रामीणों में भारी गुस्सा है। वर्तमान में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है. ग्रामीण अब इस मामले में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप, जल्द से जल्द वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की मांग कर रहे है.
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रात भर पेड़ पर मौत से जंग, सुबह प्रशासन ने बचाई 14 मजदूरों की जान
गरियाबंद/छुरा : गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत बीजापाल में निर्माणाधीन पुल पर काम कर रहे 14 मजदूर बगनई नदी के तेज बहाव की वजह से  बीच धारा में फंस गए. लगातार बढ़ते जलस्तर के चलते मजदूर बाहर नहीं निकल सके और जान बचाने के लिए पूरी रात नदी के बीच एक पेड़ पर चढ़कर बितानी पड़ी.
घटना की खबर मिलने के बाद रविवार सुबह गरियाबंद और महासमुंद जिला प्रशासन ने संयुक्त रेस्क्यू अभियान शुरू किया. प्रशासन, पुलिस और बचाव दल ने समन्वित प्रयास करते हुए सभी 14 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. रेस्क्यू किए गए मजदूरों में 10 पुरुष और 4 महिला मजदूर शामिल हैं. समय रहते चलाए गए अभियान के कारण एक बड़ा हादसा टल गया.
रेस्क्यू अभियान के दौरान कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित दोनों जिलों के प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और पूरे अभियान की निगरानी करते रहे. सभी मजदूर सुरक्षित बताए जा रहे हैं.
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दुगली में पहली बारिश ने खोली पंचायत की पोल, नालियां जाम तो घरों में घुसा पानी
धमतरी : धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के दुगली ग्राम पंचायत में पहली तेज बारिश ने पंचायत की तैयारियों की पोल खोल दी. नालियों की समय पर सफाई नहीं होने से स्टेशन पारा वार्ड के कई घरों और बाड़ियों में बारिश का पानी भर गया. जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.
शनिवार रात से रुक-रुक कर हो रही लगातार बारिश के कारण नालियां जाम हो गईं और पानी की निकासी रुक गई. हालात ऐसे बने कि पानी सीधे ग्रामीणों के घरों और बाड़ियों में घुसने लगा…
परेशानी बढ़ने पर ग्रामीणों ने पंचायत का इंतजार करने के बजाय खुद मोर्चा संभाला. सुरेन्द्र राज ध्रुव, कन्हैया यादव, हलालखोर यादव, घुराऊ राम यादव, सुरेश कुमार मंडावी, राजेश नेताम, जगेश्वर नेताम और राजेश्वर नेताम सहित अन्य ग्रामीणों ने बारिश के बीच श्रमदान कर नालियों में जमा मिट्टी और कचरा हटाया, जिससे पानी की निकासी फिर से शुरू हो सकी.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बारिश से पहले ग्राम पंचायत द्वारा नालियों की साफ-सफाई और स्वच्छता मद से आवश्यक कार्य कराए गए होते, तो यह स्थिति नहीं बनती. उनका आरोप है कि पंचायत ने समय रहते मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया.
फिलहाल ग्रामीणों के प्रयास से जल निकासी की व्यवस्था तो बहाल हो गई है. लेकिन गांव की सभी नालियों की तत्काल साफ-सफाई की जरूरत बनी हुई है. ताकि आने वाले दिनों में भारी बारिश के दौरान लोगों को दोबारा ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े.
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बुरजाबहाल में नारियल के पेड़ पर गिरी आकाशीय बिजली, पेड़ धू-धू कर जला

गरियाबंद : गरियाबंद जिले के ग्राम बुरजाबहाल में शनिवार रात तेज गड़गड़ाहट के साथ आकाशीय बिजली गिरने से अफरा-तफरी मच गई. नारियल के पेड़ पर गिरी बिजली
रात करीब 8:30 बजे बादलों की जोरदार गड़गड़ाहट के बीच ग्राम की शिक्षक तिरन नागेश की बाड़ी में लगे एक नारियल के पेड़ पर आकाशीय बिजली गिरी। बिजली गिरते ही पेड़ में आग लग गई और समाचार लिखे जाने तक वह धू-धू कर जलता रहा.
पेड़ पर बिजली गिरने की तेज आवाज और आग की लपटों को देखकर आसपास के ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। घटना स्थल के आसपास रहने वाले लोग दहशत में आ गए. हालांकि इस घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है। प्रशासन और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली कि बड़ा हादसा टल गया.
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झमाझम बारिश से जतमई का वाटरफॉल हुआ गुलजार, सैलानियों की लग रही भीड़
पांडुका : प्रदेश व गरियाबंद जिले के प्रसिद्ध देवी मंदिर जतमई का वाटरफॉल बीती रात से हो रही बारिश से चालू हो गया. जो पर्यटको को लुभाने के लिए काफी है. बीती रात से हो रही झमाझम बारिश से जहां खेत खलियानों में पानी बह रहा है. तो जतमई वा घटारानी जंगल का प्राकृतिक सौंदर्य अपने पूरे शबाब पर है. और यहां का वॉटरफॉल चालू हो गया है. साथ ही पूरी वादियां हरी-भरी हो गई है. जहां लोग इन वादियों का लुफ्त उठाने पहुंचेंगे. जून के महीने से यह जलप्रपात चालू हो जाता है. लेकिन इस बार जुलाई में चालू हुआ है. देर सही बारिश आई और पूरे मौसम को सुहावना बना दिया, रविवार होने की वजह से सुबह से ही लोग पानीं में भीगते हुए. मौसम का मजा लेते हुए नजर आए यह प्राकृतिक जलप्रपात अनायास ही सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है जिसका लोग आनंद ले रहे हैं.
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गरियाबंद में मूसलाधार बारिश ने खोली फिंगेश्वर नगर पंचायत की व्यवस्थाओं की पोल, घरो में घुसा पानी
गरियाबंद : फिंगेश्वर में मॉनसून ने आखिरकार जोरदार दस्तक दे दी है. देर रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने जहां लोगों को उमस से राहत दी है. वहीं नगर पंचायत की व्यवस्थाओं की पोल भी खोलकर रख दी है. कुम्हार मोहल्ले के कई घरों में बारिश का पानी घुस गया. जिससे लोगों का सामान और कुम्हारों की मेहनत से तैयार मिट्टी के बर्तन खराब हो गए. लोगों ने जलभराव के लिए नालियों के अभाव को जिम्मेदार ठहराते हुए नगर पंचायत के खिलाफ नाराजगी जताई है. वही वार्ड क्रमांक 14 के पार्षद हरीश कुमार हरित ने नगर पंचायत के खिलाफ आक्रोश जताया. उन्होंने कहा कि कई बार नाली निर्माण की मांग किया गया. लेकिन अनसुना कर दिया गया जिसका नतीजा है.
फिंगेश्वर क्षेत्र में कई दिनों से मॉनसून कमजोर पड़ा हुआ था और लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे थे. लेकिन रविवार तड़के मॉनसून ने ऐसी दस्तक दी कि कुछ ही घंटों की बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया. रात करीब तीन बजे कुम्हार मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई. जब बारिश का पानी कई घरों में घुस गया। घरों में पानी भरने से कुम्हारों द्वारा तैयार किए गए मिट्टी के बर्तन पूरी तरह भीगकर खराब हो गए. इससे कुम्हार परिवारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. स्थानीय लोगों का कहना है कि मोहल्ले में वर्षों से पक्की नालियां नहीं बनी हैं. जिसके कारण हर बारिश में पानी सीधे घरों में घुस जाता है. लोगों ने नगर पंचायत पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जल्द स्थायी समाधान की मांग की है.
बारिश के चलते फिंगेश्वर की कई सड़कें भी जलमग्न हो गईं और जगह-जगह जलभराव की स्थिति बन गई। हालांकि लगातार हो रही बारिश से मौसम सुहाना हो गया है और तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. पिछले कई दिनों से उमस से परेशान लोगों को राहत मिली है. वहीं किसान भी अच्छी बारिश से खुश नजर आ रहे हैं. किसानों का कहना है कि यह बारिश खरीफ फसलों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी.
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। ऐसे में एक ओर बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आई है, तो दूसरी ओर फिंगेश्वर नगर पंचायत की अधूरी व्यवस्थाओं ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अब देखना होगा कि जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन कब तक ठोस कदम उठाता है.
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रायपुर के कई इलाकों में घरों तक घुसा पानी, सड़कें बनीं तालाब; अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट
रायपुर : राजधानी रायपुर में शनिवार दोपहर से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया. रात भर हुई लगातार बारिश की वजह से शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति बन गई. उफनते नालों का गंदा पानी घरों में घुस गया. जिससे लोगों का घरेलू सामान, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पानी में डूब गए. कई परिवारों ने पूरी रात जागकर घरों से पानी निकालने की कोशिश की. लेकिन बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी.
बारिश का सबसे ज्यादा असर टाटीबंध, लाखेनगर, अश्वनी नगर, कुशालपुर, तुलसी नगर, बंजारी नगर और प्रोफेसर कॉलोनी समेत कई इलाकों में देखने को मिला. सड़कें पानी से लबालब भर गईं और कई जगहों पर हालात ऐसे बन गए कि सड़क और नाले में फर्क करना मुश्किल हो गया. जलभराव के चलते लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. जबकि कई वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए.
कई कॉलोनियों में बारिश का पानी सीधे घरों के अंदर घुस गया. कमरों, रसोई और आंगन में पानी भरने से लोगों का लाखों रुपये का सामान खराब हो गया. कुछ घरों में पलंग तक पानी पहुंच गया. जिससे परिवारों को रातभर जागकर बाल्टियों और मोटर पंप की मदद से पानी बाहर निकालना पड़ा। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित रही. जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गईं.
स्थानीय लोगों ने नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर साल बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है। उनका कहना है कि नालियों और नालों की नियमित सफाई नहीं होने की वजह से बारिश का पानी समय पर नहीं निकल पाता. लोगों ने बताया कि करीब एक माह पहले नाले की सफाई और चौड़ीकरण का कार्य किया गया था. लेकिन पहली ही तेज बारिश में व्यवस्था की पोल खुल गई.
इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अगले 48 घंटे तक भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है. मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने, जलभराव वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने और प्रशासन की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है. प्रशासन ने भी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखते हुए स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं.
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