मासूम की संदिग्ध मौत, परिजनों ने करंट लगने से मृत्यु का किया दावा, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग, 40 दिन बाद पुलिस ने कब्र से निकाला शव

Suspicious death of a child; family claims death was caused by electrocution and demands action against the guilty; police exhume the body after 40 days.

मासूम की संदिग्ध मौत, परिजनों ने करंट लगने से मृत्यु का किया दावा, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग, 40 दिन बाद पुलिस ने कब्र से निकाला शव

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही : गौरेला जिले के गौरेला विकासखंड के रानीझांप गांव में डेढ़ साल के मासूम की करंट लगने से हुई मौत का मामला अब नया मोड़ ले चुका है. घटना के करीब 40 दिन बाद प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में मासूम के शव को कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया. परिजनों का आरोप है कि स्थानीय पंचायत और बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही की वजह से बच्चे की जान गई. वहीं पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कह रही है.
30 मई को हुआ था दर्दनाक हादसा
मिली जानकारी के मुताबिक 30 मई 2026 की सुबह रानीझांप गांव निवासी योगेश कुमार राठौर का डेढ़ साल का बेटा पुत्र पार्थ राठौर अपनी मां के साथ आंगनबाड़ी केंद्र गया था. पार्थ की मां वहां सहायिका के पद पर कार्यरत हैं.
बताया गया कि सुबह करीब 7 बजे योगेश अपनी पत्नी को आंगनबाड़ी छोड़कर पास में नहाने चले गए. इसी दौरान मासूम पार्थ अपने पिता की तरफ बढ़ा और रास्ते में लगे सोलर हैंडपंप के लोहे के स्टैंड के संपर्क में आ गया. आरोप है कि स्टैंड में करंट प्रवाहित हो रहा था. जिसकी चपेट में आने से बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई.
पिता ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक बच्चे के पिता योगेश राठौर ने मीडिया से बातचीत में स्थानीय पंचायत और बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि आंगनबाड़ी से करीब 50 कदम की दूरी पर सोलर सिस्टम से संचालित हैंडपंप लगा हुआ था.
योगेश के मुताबिक हैंडपंप की मोटर खराब होने के बाद पंचायत ने कथित तौर पर बिना स्टार्टर लगाए सीधे सोलर स्टैंड से बिजली का पंप जोड़ दिया। उनका आरोप है कि इसी तकनीकी लापरवाही के कारण बिजली आने पर पानी ओवरफ्लो होकर आसपास फैल गया और पूरे लोहे के स्टैंड व गीले क्षेत्र में करंट दौड़ गया.
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपने बेटे को बचाने के लिए उठाया. तब उन्हें भी तेज करंट का झटका लगा. हालांकि वे वयस्क होने के कारण बच गए. लेकिन मासूम पार्थ की मौके पर ही मौत हो गई.
40 दिन बाद क्यों निकाला गया शव?
परिजनों के मुताबिक हादसे के समय परिवार गहरे सदमे में था. इसी वजह से पुलिस को खबर दिए बिना और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना बच्चे के शव का अंतिम संस्कार कर उसे दफना दिया गया था.
बाद में जब परिजनों ने मामले में शिकायत दर्ज कराई तो पुलिस ने घटना की गंभीरता को देखते हुए मर्ग कायम किया. चूंकि पोस्टमार्टम नहीं हुआ था. इसलिए जांच और वैधानिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही थी. ऐसे में पिता ने खुद दोबारा पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया. इसके बाद पेंड्रारोड के एसडीएम से विधिवत अनुमति लेने के बाद पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में शव का उत्खनन (कब्र से बाहर निकालने) कराया गया.
डीकंपोज हो चुका था शव
खोडरी चौकी प्रभारी सनत मात्रे ने बताया कि एसडीएम की अनुमति मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में शव को कब्र से बाहर निकाला गया. करीब 40 दिन बीत जाने की वजह से शव काफी हद तक डीकंपोज हो चुका था. पंचनामा की कार्रवाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
मृतक के पिता ने की फोरेंसिक जांच की मांग
मृतक के पिता योगेश राठौर का कहना है कि डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि शव के अत्यधिक गल जाने की वजह से शरीर पर चोट के स्पष्ट निशान नहीं मिल सके. सिर्फ सिर की हड्डी के कुछ अवशेष ही मिले हैं.
उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए शव के अवशेषों की फोरेंसिक जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. रिपोर्ट आने के बाद मौत की असल वजह का खुलासा होने पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. वहीं परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो उनका मासूम बेटा आज जिन्दा होता.
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