अब तक नहीं टूटी प्रशासन की नींद, आजादी के दिन भी जारी रहा धरना, स्कूल भवन की मांग को लेकर पांचवें दिन छात्रों के साथ पालकों का आंदोलन लगातार जारी

The administration remains unmoved; the sit-in protest continued even on Independence Day, with students and parents persisting for the fifth consecutive day in their demand for a school building.

अब तक नहीं टूटी प्रशासन की नींद, आजादी के दिन भी जारी रहा धरना, स्कूल भवन की मांग को लेकर पांचवें दिन छात्रों के साथ पालकों का आंदोलन लगातार जारी

गरियाबंद : देशभर में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का उत्साह देखने को मिला. लेकिन गरियाबंद जिले के ग्राम रुवाड़ में ग्रामीण और छात्र-छात्राएं विद्यालय भवन की मांग को लेकर धरने पर बैठे रहे. स्कूल भवन की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन पांचवें दिन भी जारी रहा. इसी दौरान बच्चों ने धरना स्थल पर ही तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाया.
गरियाबंद जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र रसेला रूवाड़ में सैकड़ों छात्र-छात्राओं और पालकों ने स्कूल भवन की मांग को लेकर जर्जर स्कूल भवन के सामने जहां एक तरफ ताला लगा दिये है. वहीं दूसरी तरफ 11 अगस्त से लगातार शासन प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर अपने मांग मंगवाने लगे हुए हैं. लेकिन शिक्षा विभाग के जिला स्तर के अफसर बेखबर बने हुए हैं. शायद उन्हे कोई बड़ा आंदोलन का इंतजार है. बदहाल सिस्टम के चलते गांव के छात्र छात्राएं पढाई लिखाई को छोड़कर मजबूरन स्कूल भवन जैसे महत्वपूर्ण मांगो को लेकर आंदोलन करने को मजबूर हो रहे है और तो और आजादी के 80 वर्ष 15 अगस्त को स्कूल के सामने छात्र-छात्राओं व पालको ने ध्वजारोहण कर आजादी का त्यौहार मनाया साथ ही अपना धरना प्रदर्शन आंदोलन जारी रखा है.
ग्राम के वरिष्ठ नागरिक यशवंत सोरी, कृष्ण कुमार ठाकुर (ग्राम पटेल), उदेराम नेताम, अलाल सिंह नागेश, ललितराम नेताम, दयाराम नागेश, गंगाराम नेताम, बलदेव सिंह, दाऊलाल, विजयकृष्ण नागेश, महेश सोरी, हरिसिंह दीवान, दयालु राम दीवान, मोहन सिंह, प्रेम कुमार, दिलेश नेताम, दशरथ नेताम, रोहित नेताम, तुलसराम, लादाबाहरा से हीरालाल, परसराम, बिसाहू राम, केरगांव से हीरा राम, खगेश मरकाम, भगतराम ने बताया सरकार द्वारा यहां मिडिल स्कूल का जो निर्माण किया गया है.
वह बेहद जर्जर हो गया है और इसी जर्जर स्कूल मे मिडिल स्कूल में हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित हो रहा है. पालकों और ग्रामीणों के द्वारा चंदा इकठ्ठा कर दो लाख रूपए की लागत से एक टिन का शेड का निर्माण किया गया है. उस टिन शेड के नीचे बच्चे पढाई करने मजबूर हो रहे हैं.
इस समस्या से छत्तीसगढ के शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव एवं गरियाबंद जिले के आला अफसरो को कई बार आवेदन किया गया. लेकिन अबतक समस्या का समाधान नहीं किया गया है. बच्चों को पढाई करने के लिए जहां एक तरफ जगह नही है. वहीं उन्हे जो सुविधाएं मिलनी चाहिए नहीं मिल पा रही है. मजबूरन पढाई लिखाई छोड़कर बच्चे और पालक पिछले 6 दिनों से स्कूल के सामने गेट मे ताला जड़कर आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं.
अफसरो के उदासीन रवैये से बढ़ी नाराजगी
एक तरफ राज्य व केन्द्र सरकार द्वारा बेहतर शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की दावे करती नही थकी जा रही है. आज शह्रों के स्कूलों मे तमाम तरह की सुविधाएं और डिजिटल क्लास संचालित हो रहा है. ठीक इसके विपरित आदिवासी वनांचल क्षेत्र के ग्रामीण इलाके के बच्चो को जहां एक ओर पढाई करने के लिए भवन कमरा नसीब नही हो पा रहा है. वहीं शिक्षको की भारी कमी से पढाई प्रभावित हो रही है. नतीजन मजबूर होकर छात्र और पालक आंदोलन की राह पकड़ रहे हैं. ऐसे समय में चाहिए कि संबंधित विभाग के जिम्मेदार अफसर मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों और छात्रो की जायज मांगो को गंभीरता से सुने और उनके समाधान करने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाए लेकिन जिले मे एक अलग ही तरह की शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया दिखाई दे रहा है. जिसकी वजह से ग्रामीणों और छात्रो का आक्रोश बढता जा रहा है.
करोड़ों के शिक्षा बजट के बीच भवन के लिए संघर्ष
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 22,466 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. शिक्षा और स्कूल अधोसंरचना के लिए बड़े बजट के बावजूद रुवाड़ के बच्चों को अपने विद्यालय भवन की मांग को लेकर आंदोलन करना पड़ रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा किसी भी राजनीतिक दल या जनप्रतिनिधि की राजनीति से ऊपर होनी चाहिए. विद्यालय भवन का अभाव लंबे समय तक बना रहा तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है.
आदिवासी नेत्री लोकेश्वरी नेताम ने किया छात्रों के आदोलन का समर्थन
आदिवासी महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती लोकेश्वरी नेताम, आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष उमेंन्दी कोर्राम ने भी छात्रों के आंदोलन को जायज बताते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्र के बच्चों को शिक्षक और स्कूल भवन जैसे समस्याओं के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है. जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो हम खुद बच्चों के समर्थन में आंदोलन में शामिल होंगें.
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