मजदूर दिवस पर छत्तीसगढ़िया अंदाज में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्षद छगन यादव ने मजदूरों के साथ खाया बोरे-बासी, नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का संदेश

On Labour Day, former Chief Minister Bhupesh Baghel and Councilor Chhagan Yadav ate sack-stale food with laborers in Chhattisgarhi style, sending a message to the new generation to connect with their roots.

मजदूर दिवस पर छत्तीसगढ़िया अंदाज में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्षद छगन यादव ने मजदूरों के साथ खाया बोरे-बासी, नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का संदेश

दुर्ग : अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर राजीव भवन में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दुर्ग पहुंचे. इस कार्यक्रम में शामिल होने बड़ी तादाद में स्थानीय लोग और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे. भूपेश बघेल ने मजदूरों के साथ जमीन पर बैठकर पारंपरिक बोरे-बासी का आनंद लिया. श्रमिकों के प्रति सम्मान प्रकट किया. श्रमिकों को शुभकामनाएं दीं. और कहा कि यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति और मेहनतकश वर्ग की पहचान है. इस मौके पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर, धीरज बाकलीवाल, राकेश ठाकुर समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं ने भी बोरे बासी का मजा लिया.
उन्होंने अपने संबोधन में श्रमिकों के योगदान को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता दोहराई. इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर उत्साह का माहौल देखने को मिला और लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत किया. यह आयोजन न सिर्फ परंपरा को जीवित रखने का संदेश देता है. बल्कि मजदूर वर्ग के प्रति सम्मान और एकजुटता का भी प्रतीक माना जा रहा है.
बोरे बासी की परंपरा और महत्व
भूपेश बघेल ने कहा कि बोरे बासी छत्तीसगढ़ के किसान और मजदूर वर्ग के जीवन का अहम हिस्सा है. उनकी सरकार ने इसे पहचान दिलाने के लिए ‘बोरे बासी दिवस’ के रूप में स्थापित किया था. उन्होंने इसे गर्मी में शरीर के लिए अमृत समान बताते हुए इस परंपरा को आगे भी बनाए रखने की जरूरत बताई. साथ ही उन्होंने इसके पोषण मूल्य का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भरपूर विटामिन होते हैं और यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है.
भाजपा सरकार पर तीखा हमला
इस दौरान बघेल ने भाजपा सरकार पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि ‘सुशासन तिहार’ के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है. उनके मुताबिक राज्य में बिजली की समस्या बनी हुई है. शराब की बिक्री बढ़ रही है. सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार है और किसानों को समय पर खाद तक नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब मजदूरों को काम और युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा तो इसे सुशासन कैसे कहा जा सकता है.
चुनावी राज्यों में कांग्रेस की स्‍थिति को बताया मजबूत
आगामी चुनावी माहौल को लेकर भी बघेल ने कांग्रेस की स्थिति मजबूत बताई. उन्होंने दावा किया कि पार्टी केरल, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी और असम जैसे राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करेगी. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की मौजूदा सरकार का संचालन राज्य से बाहर, दिल्ली या अहमदाबाद से हो रहा है. जिससे प्रदेश की जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
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पार्षद छगन यादव का ठेठ छत्तीसगढ़िया अंदाज
गरियाबंद : अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर गरियाबंद जिला कांग्रेस सहायक कार्यालय प्रभारी और पार्षद छगन यादव ने अपने निवास पर पारंपरिक अंदाज में बोरे-बासी खाकर श्रमिक दिवस मनाया. इस मौके पर उन्होंने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि मेहनतकश वर्ग के सम्मान का प्रतीक है.
छगन यादव ने कहा कि बोरे-बासी छत्तीसगढ़ के किसान और मजदूरों का सदियों पुराना मुख्य आहार रहा है. जिसे आज पहचान मिल रही है. उन्होंने इसे गर्मी के मौसम में “अमृत” बताते हुए कहा कि इसमें भरपूर पोषक तत्व और विटामिन होते हैं. जो शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों प्रदान करते हैं.
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह परंपरा अब गांवों से निकलकर शहरों तक पहुंच रही है. स्कूलों, दफ्तरों और सामाजिक कार्यक्रमों में बोरे-बासी को अपनाया जा रहा है. जिससे नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ रही है. “यह सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और श्रमिक सम्मान का प्रतीक बन चुका है,
यादव ने कहा कि तपती गर्मी और 45 डिग्री के पार जाते तापमान में काम करने वाले मजदूरों के लिए बोरे-बासी किसी पावरहाउस से कम नहीं है. यह शरीर में पानी की कमी को दूर करता है और लू से बचाने में मददगार साबित होता है. खेतों और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए यह सस्ता, सुलभ और बेहद प्रभावी आहार है.
स्वाद के साथ इसका भावनात्मक जुड़ाव भी गहरा है. आम की चटनी, प्याज और हरी मिर्च के साथ खेत की मेड़ पर बैठकर बोरे-बासी खाने का अनुभव आज भी लोगों के दिलों में ताजा है. आधुनिक जीवनशैली के बीच भी यह देसी परंपरा अपनी सादगी के साथ जीवित है.
गौरतलब है कि बोरे-बासी में रात के बचे चावल को पानी में भिगोकर सुबह खाया जाता है. इसमें मौजूद प्रोबायोटिक गुण पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं. चिकित्सकों के मुताबिक यह पारंपरिक भोजन फास्ट फूड की तुलना में कहीं अधिक स्वास्थ्यवर्धक है.
श्रमिक दिवस पर बोरे-बासी का सेवन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि मेहनतकश वर्ग के प्रति सम्मान और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनता जा रहा है.
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