सरकार के आदेश के बाद गर्ल्स स्कूल में लड़कों के एडमिशन की मांग, महिलाओं ने स्कूल के गेट पर ताला लगाकर किया प्रदर्शन

After the government's order, demanding admission of boys in girls' school, women protested by locking the school gate

सरकार के आदेश के बाद गर्ल्स स्कूल में लड़कों के एडमिशन की मांग, महिलाओं ने स्कूल के गेट पर ताला लगाकर किया प्रदर्शन

गौरेला पेंड्रा मरवाही : गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निमधा में महिलाओं ने प्रदर्शन किया. महिलाओं ने स्कूल की गेट पर ताला लगाकर अपने बेटों के एडमिशन की मांग की. महिलाओं का कहना था कि शासन ने इस स्कूल में लड़कों के एडमिशन के लिए रजामंदी दी है. तो फिर क्यों लड़कों का एडमिशन स्कूल में नहीं हो रहा है. महिलाओं ने आरोप लगाए कि शासन के आदेश के बाद भी स्कूल प्रबंधन मनमानी कर रहा है.
ये पूरा विवाद बालकों को कन्या स्कूल में एडमिशन नहीं देने से जुड़ा हुआ है. निमधा गांव में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला है. जहां सिर्फ लड़कियां पढ़ती है. लेकिन गांव में दूसरा सरकारी स्कूल नहीं होने की वजह से ग्रामीण चाहते हैं कि हायर सेकंडरी क्लासेस में छात्रों को एडमिशन दिया जाए. जिसके लिए ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई थी. जिस पर प्रशासन ने एडमिशन देने का आदेश जारी किया था. फिर भी महिलाओं का आरोप है कि प्रिंसिपल एडमिशन नहीं दे रहा है. और रोजाना चक्कर कटवा रहा है.
हम यहां सोमवार से चक्कर लगा रहे हैं. एडमिशन के लिए परेशान हैं. प्रिंसिपल के पास आए थे तो वो बोले कि आदेश लेकर आओ. हम लोग कलेक्टर के पास गए थे. आदेश लेकर आए. तो फिर बोलने लगे कल आना.ऐसा करते-करते चार दिन हो गया है. खेती किसानी का काम छोड़कर आए हैं. हम परेशान हो गए हैं- रुकमणी, ग्रामीण
प्रिंसिपल आदेश के बाद भी परेशान कर रहे हैं. प्रिंसिपल बोलता है एडमिशन नहीं होगा चाहे जो कर लो. जहां भी जाना है चले जाओ. ऐसे में हम लोगों के बच्चों का एडमिशन कैसे होगा. इसलिए हम लोग स्कूल में ताला लगा दिए हैं- सुनीता, ग्रामीण
वहीं इस मामले में स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि प्रिंसिपल अभी डीईओ सर के पास गए हैं.जब वो वापस आएंगे तो एडमिशन को लेकर बात होगी.
ये गर्ल्स स्कूल है. इसलिए नियमत: बालिकाओं का एडमिशन लिया जा रहा है. लेकिन महिलाओं का कहना है कि उनके लड़कों का एडमिशन स्कूल में किया जाए. ऐसे में एडमिशन को लेकर फैसला प्रिंसिपल ही लेंगे -राज कुमार कुर्रे, शिक्षक
स्कूल में मैं जब आया तो ताला लगा हुआ था. पता नहीं कौन ताला लगाकर चला गया है. गांव के सरपंच और अफसरों को इसकी जानकारी दी गई है. जब वो आएंगे तो फैसला करेंगे कि क्या करना है- कपिल करेलिया, स्पोर्ट्स शिक्षक.
इस पूरे मामले में ईटीवी भारत ने जब जिला शिक्षाधिकारी दिलीप पटेल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि 9वीं और 11वीं में एडमिशन सभी बच्चों का किया जाएगा. वहीं 10वीं और 12वीं में क्राइटेरिया तय रहेगा. बच्चों की तादाद ज्यादा होने पर लॉटरी सिस्टम से एडमिशन लिया जाएगा. डीईओ चाहे कुछ भी कहे लेकिन जो बातें महिलाएं बता रही है उससे यही लग रहा है कि स्कूल में लड़कों के एडमिशन के लिए अभी भी की पापड़ बेलने होंगे.
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