भाजपा नेता की तहसीलदार को खुलेआम धमकी, कहा- हमारी ताकत नहीं जानते हो क्या, किसने मां का दूध पिया है जो.., वीडियो जमकर वायरल, राजनैतिक बवाल
BJP leader openly threatens Tehsildar, asking, "Don't you know our power? Who dares to cross us?" — video goes viral, sparking a political uproar.
सूरजपुर : छत्तीसगढ़ में लगातार प्रशासनिक और राजनैतिक विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. लगातार प्रशासनिक अधिकारियों को खुलेमंच सरेराह सत्ता और संगठन का दबाव दिखाकर अपना रौब दिखाने वाले वीडियो की सीरीज में एक और इसी तरह का वीडियो आया है. सूरजपुर में सरकारी जमीन संबंधी कार्रवाई के दौरान कानून और प्रशासन को चुनौती देने का मामला सामने आया है. कोर्ट के आदेश पर कब्जा हटाने पहुंचे तहसीलदार सूर्यकांत साय को भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री राजेश अग्रवाल खुलेआम धमकाते नजर आए.
कथित वायरल वीडियो में पूर्व भाजपा पदाधिकारी तहसीलदार से कहते सुनाई दे रहे हैं- “आप हमारी ताकत को जानते नहीं हैं… ताकत दिखाना पड़ेगा तो दिखा भी देंगे. अपना लहजा सुधारो ,किसकी मां ने दूध पिया है जो पजेशन लेने से रोके. जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर अपना राजनैतिक रौब दिखाते हुए सरकारी काम को प्रभावित करने की कोशिश की गई.
दरअसल, यह पूरा मामला सूरजपुर में साहू परिवार की खसरा नंबर 2170, 0.04 डिसमिल और खसरा नंबर 2171, 0.09 डिसमिल यानी कुल 13 डिसमिल जमीन से जुड़ा हुआ है. यहां लंबे समय से सूरजपुर के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष लालचंद अग्रवाल के अलावा विमला अग्रवाल, शुभम अग्रवाल, अशोक कुमार अग्रवाल आर रामू अग्रवाल ने कब्जा जमा रखा था.
वर्ष 1994 से यह मामला अदालत में चल रहा था. इसी बीच हाईकोर्ट ने कुंजबिहारी साहू के पक्ष में डिक्री पारित करते हुए जमीन का सुपुर्दनामा दिलाने का आदेश जारी किया था. 17 जून की दोपहर उक्त जमीन का सुपुर्दनामा दिलाने सूरजपुर तहसीलदार सूर्यकांत साय राजस्व अमले के साथ मौके पर पहुंचे थे. इस दौरान लालचंद अग्रवाल के अलावा उनके भतीजे राजेश महलवाला भी मौजूद थे.
राजेश महलवाला सूरजपुर भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री रह चुके हैं. तहसीलदार ने लालचंद अग्रवाल से कुछ कहा ही था कि राजेश महलवाला ने धमकी भरे लहजे में कहा कि या तो आप हमें पहचानते नहीं हो या हमारी ताकत जानते नहीं हो. ताकत दिखाना होगा तो दिखा भी देंगे। पहले आप अपना लहजा ठीक करिए। आप हमारे चाचा से बात कर रहे हैं. किसने मां का दूध पिया है जो इस जमीन का पजेशन लेकर दिखा दे. इस पूरे मामले का वीडियो सामने आया है. जोकि तेजी से वायरल हो रहा है.
बताया जा रहा है कि विवादित जमीन पर कथित कब्जे को हटाने राजस्व अमला पहुंचा था. इसी दौरान राजनीतिक रसूख और पद की धौंस दिखाते हुए सरकारी अधिकारी पर दबाव बनाने की कोशिश की गई.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कोर्ट के आदेश का पालन कराने पहुंचे एक तहसीलदार को ही इस तरह धमकाया जाएगा तो कानून का सम्मान कौन करेगा? क्या राजनीतिक प्रभाव के दम पर प्रशासनिक कार्रवाई रोकने की कोशिश की जा रही थी? वायरल वीडियो ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि कुछ नेताओं को आखिर कानून से ऊपर होने का भ्रम क्यों है?
तहसीलदार को धमकी देने का वीडियो वहां मौजूद कुछ लोगों ने बना लिया और इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया. अब यह वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. वीडियो देखने वाले भाजपा नेताओं के प्रशासनिक अधिकारियों से इस लहजे में बात करने की निंदा कर रहे हैं.
अब देखना होगा कुछ दिनों पहले भी नायब तहसीलदार और विधायक के मामले के तुल पकड़ने के बाद क्या एक बार फिर क्या मुद्दा राजनैतिक और प्रशासनिक रंग लेगा? और क्या एक बार फिर सत्ता और प्रशासन आमने सामने एक दूसरे के खिलाफ खड़ा नजर आएगा?
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