महादेव सट्टा संचालकों से संबंध रखने वाला प्रधान आरक्षक सस्पेंड, निलंबन आदेश के तुरंत बाद हेड कॉन्स्टेबल विजय पांडे का अचानक गायब
Head constable with links to Mahadev betting operators suspended; Head Constable Vijay Pandey suddenly disappears immediately after the suspension order.
रायपुर/कांकेर : राज्य पुलिस मुख्यालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजनांदगांव में कथित तौर पर पनप रहे एक नए ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट को शुरुआती स्तर पर ही रोक दिया। इस कार्रवाई के केंद्र में कांकेर जिले में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल विजय कुमार पांडे रहे, जिन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया. करीब 6,000 करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टा कांड से जुड़ा यह नाम पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है
शीर्ष पुलिस नेतृत्व की सीधी दखल
सूत्रों के अनुसार, कांकेर और राजनांदगांव से मिले विश्वसनीय इनपुट के बाद मामला सीधे पुलिस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा। पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) अमित कुमार को यह जानकारी मिली कि हेड कॉन्स्टेबल विजय पांडे हाल के दिनों में कुछ ऐसे राज्य पुलिस सेवा (SPS) अधिकारियों के संपर्क में थे. जिनका तबादला हाल ही में रायपुर से राजनांदगांव हुआ है.
इन इनपुट्स में आरोप था कि पांडे कथित तौर पर सट्टा संचालकों और पुलिस तंत्र के बीच “लायज़ॉन लिंक” की भूमिका निभा रहे थे और बदले में मासिक ‘प्रोटेक्शन मनी’ के ज़रिए कार्रवाई से राहत दिलाने की कोशिश की जा रही थी. इसके बाद कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने फौरन आदेश जारी करते हुए विजय पांडे को सस्पेंड कर दिया.
निलंबन के बाद रहस्यमय ग़ायब
निलंबन आदेश के फौरन बाद ही हेड कॉन्स्टेबल विजय पांडे का अचानक संपर्क से बाहर हो जाना पुलिस मुख्यालय के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया. इस घटनाक्रम को हल्के में नहीं लिया गया.
कांकेर एसपी को पांडे की अनुपस्थिति और मूवमेंट को लेकर तत्काल स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं. जबकि राजनांदगांव एसपी अंकिता शर्मा को ज़मीनी स्तर पर निगरानी और सतर्कता बढ़ाने की सलाह दी गई है. साथ ही यह भी निर्देश है कि अगर विजय पांडे के खिलाफ कोई औपचारिक शिकायत या पुष्ट सामग्री सामने आती है, तो उसके आधार पर तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए.
महादेव कांड से पुराना रिश्ता
इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बनाने वाला पहलू यह है कि विजय कुमार पांडे का नाम पहले ही महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप कांड की जांच में उभर चुका है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SEOIACB) की समानांतर जांचों के दौरान पांडे का नाम 2021 की एक विवादित विदेशी यात्रा को लेकर सामने आया था.
यह यात्रा दुबई की थी. जहां कथित तौर पर पांडे ने महादेव ऐप के प्रमोटर्स रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर से मुलाकात की थी. विवाद इस बात को लेकर है कि यह यात्रा सरकारी अनुमति के बिना की गई और बाद में इसके लिए ‘एक्स पोस्ट फैक्टो’ यानी यात्रा के बाद मंजूरी दी गई.
मौखिक आदेश और संदिग्ध भूमिका
उस समय विजय पांडे कांकेर जिले के डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (DCRB) में पदस्थ थे और उन्हें एक प्रभावशाली वरिष्ठ अधिकारी के साथ ‘मौखिक आदेश’ यानी बिना लिखित आदेश के अटैच किया गया था. यही वरिष्ठ अधिकारी उस छोटे लेकिन प्रभावशाली समूह का हिस्सा थे. जिन पर ईडी ने महादेव सट्टा सिंडिकेट से ‘प्रोटेक्शन मनी’ लेने के आरोप लगाए हैं.
फर्जी आवेदन और PHQ की भूमिका
मामले में नया मोड़ तब आया जब यह सामने आया कि दुबई यात्रा के लिए ‘एक्स पोस्ट फैक्टो’ मंजूरी का आवेदन कथित तौर पर चंद्रभूषण वर्मा द्वारा तैयार किया गया था. वर्मा, जो उस समय सहायक उप निरीक्षक (ASI) थे, फिलहाल सस्पेंड हैं और रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं.
यह आवेदन न सिर्फ संदिग्ध था बल्कि इसके बावजूद पुलिस मुख्यालय के प्रशासनिक शाखा ने इसकी अनुशंसा की और अंततः इसे स्वीकृति भी मिल गई. यह प्रक्रिया आज भी जांच एजेंसियों के लिए रहस्य बनी हुई है.
ईडी के सेक्शन 50 बयान में पांडे का नाम
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 22 अगस्त 2023 को दर्ज किए गए बयान में चंद्रभूषण वर्मा ने स्पष्ट रुप से विजय कुमार पांडे को उस करीबी समूह का सदस्य बताया था. जो 2021 में दुबई गया था.
वर्मा के मुताबिक, पांडे के साथ भीम यादव, अर्जुन यादव और सहदेव सिंह यादव भी इस नेटवर्क का हिस्सा थे. बयान में यह भी कहा गया कि ये लोग नागपुर के हवाला ऑपरेटरों से बड़ी नकदी इकठ्ठा कर उसे कथित तौर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाते थे. यह बयान ईडी की पहली प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट में RUD-39 के रूप में विशेष पीएमएलए कोर्ट में दाखिल है.
सीबीआई और ईडी भी सतर्क
हेड कॉन्स्टेबल विजय पांडे के निलंबन और उसके बाद ग़ायब होने की जानकारी अब केंद्रीय एजेंसियों तक भी पहुंच चुकी है. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में राज्य पुलिस के साथ समन्वय में हैं ताकि पांडे को जल्द ट्रेस कर पूछताछ की जा सके.
सूत्रों का यह भी कहना है कि पहले की जांच में कुछ अहम कड़ियां छूट गई थीं. खासकर पुलिस मुख्यालय में बैठे उन वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ नहीं हो पाई थी. जिन्होंने ‘एक्स पोस्ट फैक्टो’ विदेशी यात्रा को मंजूरी दी थी. यही वजह है कि ताज़ा घटनाक्रम को महादेव सट्टा कांड की अधूरी जांच से जोड़कर देखा जा रहा है. ताज़ा घटनाक्रम के बाद CBI और ED दोनों ही एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. माना जा रहा है कि महादेव सट्टा कांड की अधूरी कड़ियां एक बार फिर खुल सकती हैं.
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