श्रद्धेय अटल जी के नाम पर भी 'कमीशनखोरी': कांस्य प्रतिमा के बजट में सीमेंट-लोहे का ढांचा तैयार, ऊपर से चढ़ा दिया ब्रांज पेंट!, निष्पक्ष जांच कराने की मांग
'Kickbacks' even in the name of the revered Atal Ji: A cement-and-iron structure was built for the bronze statue, then simply coated with bronze-colored paint; demand raised for an impartial inquiry.
नाकाबपोश भ्रष्टाचारियों ने अपने ही मार्गदर्शक के सम्मान को छल में बदला—सरकारी नियमों, GeM और भण्डारण क्रय नियमों की धज्जियां उड़ाकर बजट डकारने का शर्मनाक कारनामा.
रायपुर : दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री, 'भारत रत्न' श्रद्धेय स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी—जिनकी सादगी, निष्ठा और देश के प्रति समर्पित सेवाभाव की मिसालें पूरा देश देता है- उनका नाम भी छत्तीसगढ़ के कमिशनखोरों और ठेकेदारों की नीयत साफ नहीं कर पाया.
छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में अटल जी की यादों को चिरस्थायी बनाने के लिए 'अटल परिसर' का निर्माण कराया जा रहा है. सरकार का उद्देश्य सुशासन दिवस की भावना को बढ़ावा देना था. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सुशासन के नाम पर खुलेआम कुशासन और वित्तीय डकैती का खेल खेला गया.
जो दस्तावेज और तथ्य सामने आए हैं. वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के प्रशासनिक तंत्र पर सीधे सवाल खड़े करते हैं. बता दें कि कटघोरा नगर पालिका परिषद ने अटल परिसर का निर्माण कराया है. जबकि निर्माण कार्य का ठेका नगर के व्यवसायी और ठेकेदार मनोज अग्रवाल को दिया गया था.
कांस्य प्रतिमा का बजट, लेकिन खड़ी कर दी सीमेंट-लोहे की मूरत!
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के स्पष्ट तकनीकी दिशानिर्देशों और स्वीकृत प्राक्कलन (Estimate) के अनुसार:
धातु व मापदंड: अटल परिसर में 7 फीट ऊंची और 810 किलोग्राम वजन की 'आर्किटेक्चरल ब्रॉन्ज' (कांस्य) की ठोस प्रतिमा स्थापित करना अनिवार्य था. रासायनिक संरचना: निविदा नियमों के तहत प्रतिमा के धातु में 55% से 59% तांबा (Copper) होना अनिवार्य था और अंतिम भुगतान से पहले लैब टेस्ट सर्टिफिकेट (Metallurgical Test Certificate) जमा करना था.
जमीनी हकीकत (तहलका पत्रिका का बड़ा खुलासा): कांस्य ढलाई का पूरा बजट डकार कर प्रतिमा का आंतरिक व बाहरी निर्माण सीमेंट, कंक्रीट और साधारण लोहे से कर दिया गया. इतना ही नहीं, इस फर्जीवाड़े को छिपाने के लिए ऊपर से केवल ब्रांज (कांस्य) कलर का पेंट चढ़ाकर काम पूरा दिखा दिया गया और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से लाखों रुपये के बजट का निपटारा (भुगतान) कर लिया गया!
सरकारी आदेशों और विभागीय नियमों को दिखाया ठेंगा
इस पूरे कारनामे में छत्तीसगढ़ शासन, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (महानदी भवन, नवा रायपुर) द्वारा जारी आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं:
शासकीय पत्रों का उल्लंघन: पत्र क्रमांक GENCOR- 35/306/2026-UAD (दिनांक 20-05-2026) एवं पत्र क्रमांक GENCOR- 21/1092/2026-UAD (दिनांक 25-05-2026) में वर्णित कड़े प्रावधानों और दिशा-निर्देशों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया.
भण्डारण क्रय व GeM नियमों की अनदेखी:
छत्तीसगढ़ भण्डारण क्रय नियम, कर्म विभाग मैनुअल और GeM (Government e-Marketplace) के अनिवार्य पारदर्शी नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया. गुणवत्ता जांच में लीपापोती: PWD नियमों के तहत थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (TPI) और मेटल लैब टेस्ट की अनिवार्य शर्त को कागजों में समेट दिया गया.
'डबल इंजन' सरकार के दावों पर उठे गंभीर सवाल:
एक तरफ राज्य में सुशासन और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे किए जाते हैं. वहीं दूसरी तरफ अपने ही शीर्ष मार्गदर्शक और देश के महान जननायक की प्रतिमा निर्माण में इस स्तर का फर्जीवाड़ा कई तीखे सवाल खड़े करता है:क्या अपने ही पथ-प्रदर्शक और पूर्व प्रधानमंत्री के प्रति यह रवैया छल और घोर अनादर नहीं है?
810 किलो कांस्य के नाम पर स्वीकृत लाखों रुपये की राशि किसकी जेब में गई?
बिना धातु परीक्षण (Metallurgical Test) और बिना गुणवत्ता जांच के अंतिम भुगतान के देयकों पर हस्ताक्षर करने वाले इंजीनियरों व अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
राज्यभर में तहलका की खोजी पत्रकारिता की सराहना;
उच्च स्तरीय जांच की मांगतहलका पत्रिका की टीम द्वारा इस बहुचर्चित और शर्मनाक मामले का पर्दाफाश करने के बाद आम जनता, प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रदेश एवं केंद्र स्तर की उच्च स्तरीय जांच एजेंसियों (CBI/ACB) से इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग जोर पकड़ रही है. मांग की जा रही है कि:
दोषी ठेकेदारों, अधिकारियों और कमिशनखोरों पर तत्काल FIR दर्ज की जाए.
ठेकेदार की परफॉर्मेंस गारंटी/सिक्योरिटी डिपॉजिट राजसात कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए.
प्रदेश के सभी 114 नगर पंचायतों, 49 नगर पालिकाओं और 14 नगर निगमों में निर्माणाधीन/स्थापित सभी अटल प्रतिमाओं की धातु जांच (Metallurgical Audit) कराई जाए.
"ताजा खब्त का स्पष्ट संदेश:"
पत्रकारिता का धर्म सच को सामने लाना है। अटल जी की स्मृतियों और जनता के टैक्स के पैसे पर डाका डालने वाले इन भ्रष्टाचारियों के चेहरे बेनकाब होने तक हमारी यह जंग जारी रहेगी.
राज्यभर में किया गया है निर्माण
राज्य के सभी नगरीय निकायों में 'अटल परिसर' का निर्माण कराया गया है. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत शहरों और नगरों के प्रमुख स्थलों एवं उद्यानों का सौंदर्यीकरण करते हुए वहां अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाएं स्थापित की गईं हैं. उनका विधिवत लोकार्पण भी किया गया. राज्य के कुल 187 नगरीय निकायों, जिनमें 14 नगर निगम, 50 नगर पालिका और 123 नगर पंचायत शामिल हैं. जहां अटल परिसर बने हैं. इसके लिए शासन ने लगभग 46 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अनुदान के रूप में स्वीकृत की. योजना के अनुसार नगर निगमों को 50 लाख रुपए, नगरपालिकाओं को 30 लाख तो नगर पंचायतों को 20 लाख रुपये की राशि दी गई है.
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