सर्पदंश मुआवजा घोटाला, 17 करोड़ का फर्जीवाड़ा, डॉक्टर के बाद एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय के तीन बाबू गिरफ्तार, 14 मामलों में FIR दर्ज
Snakebite compensation scam: ₹17 crore fraud; after a doctor, an SDM and three clerks from the Tehsildar's office have been arrested; FIRs registered in 14 cases.
बिलासपुर : बिलासपुर में सांप काटने से मौत के फर्जी दस्तावेज बनाए गए. फर्जी रिपोर्ट के दम पर 17 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा बांटा गया. विधानसभा में मामला उठने के बाद सरकार ने जांच शुरू कराई. पुलिस ने इस केस में एक महिला डॉक्टर को पहले ही जेल भेजा है. अब तहसील दफ्तर के तीन बाबुओं को भी गिरफ्तार किया गया है.
सर्पदंश के नाम पर बंदरबांट
बिलासपुर जिले में राजस्व विभाग की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. यहां सर्पदंश के नाम पर करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया. लोगों ने अपनों की सामान्य मौत को सर्पदंश बताकर मुआवजा लिया. इस पूरे खेल में फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए. तहसील और अस्पताल के कर्मचारियों ने मिलकर सरकारी पैसे की बंदरबांट की। मामला उजागर होने के बाद हड़कंप मच गया है.
कैसे शुरू हुई जांच
विधानसभा में बेलतरा के विधायक सुशांत शुक्ला ने यह मुद्दा उठाया. उन्होंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए फर्जीवाड़े की तरफ ध्यान खींचा. इसके बाद सदन में काफी हंगामा भी हुआ. राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने उच्च स्तरीय जांच का भरोसा दिया था. शासन के नियमानुसार सर्पदंश पर 4 लाख रुपये मुआवजा मिलता है. इसी राशि को हड़पने के लिए यह पूरा सिंडिकेट बनाया गया.
आंकड़ों का बड़ा अंतर
जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. जशपुर जिले में 3 साल में सिर्फ 96 मौतें दर्ज हुईं. वहीं बिलासपुर में 431 मौतें दिखाकर मुआवजा बांटा गया. इतनी बड़ी तादाद देखकर अफसरों के कान खड़े हो गए. पुलिस ने मामले की परतें खोलना शुरू किया. जांच में पाया गया कि कई मामलों में परिजनों को पता भी नहीं था.
महिला डॉक्टर और बाबू अरेस्ट
सरकंडा और तोरवा पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. तोरवा पुलिस ने सिम्स (SIMS) की तत्कालीन महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को जेल भेजा. उन पर फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाने का आरोप है. इसके बाद सरकंडा पुलिस ने तहसील दफ्तर के तीन बाबुओं को पकड़ा. गिरफ्तार क्लर्कों में नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और हरिशंकर राठौर शामिल हैं. इन्होंने अपनी आईडी से फर्जी रिपोर्ट बनाई थी.
तहसीलदार का ड्राइवर निकला सरगना
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. तहसील कार्यालय का ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा इस कांड का मास्टरमाइंड निकला. उसने ही गिरोह बनाकर पूरा फर्जीवाड़ा रचा. ड्राइवर के साथ वकील और अन्य लोग भी शामिल थे. पुलिस ने वकील हीराप्रसाद खांडेकर और बैंककर्मी कुशकुमार गुप्ता को पकड़ा है. मुख्य सरगना वकील श्रवण वस्त्रकार अभी फरार है. अब तक इस मामले में 14 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं. एसएसपी (SSP) रजनेश सिंह खुद जांच की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. कई और डॉक्टरों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.
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