अडानी भगाओ-छत्तीसगढ़ बचाओ के नारों से गूंजा प्रदेश, संयुक्त किसान मोर्चा ने कॉर्पोरेट विरोधी दिवस मनाकर किया जोरदार प्रदर्शन

The state reverberated with slogans of Adani Bhagao-Chhattisgarh Bachao, Samyukta Kisan Morcha celebrated Anti-Corporate Day and staged a massive protest

अडानी भगाओ-छत्तीसगढ़ बचाओ के नारों से गूंजा प्रदेश, संयुक्त किसान मोर्चा ने कॉर्पोरेट विरोधी दिवस मनाकर किया जोरदार प्रदर्शन

रायपुर : संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के देशव्यापी आह्वान पर बुधवार को छत्तीसगढ़ के कई जिलों में कॉर्पोरेट विरोधी दिवस मनाया गया. राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक किसान संगठनों ने सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन किया. रैलियाँ निकालीं और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र व राज्य सरकार की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों का विरोध किया.
संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर आज छत्तीसगढ़ में भी मोर्चा के घटक संगठनों ने पूरे प्रदेश में कॉर्पोरेट विरोधी दिवस मनाया. धरना-प्रदर्शन आयोजित किए और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए. इस आंदोलन के जरिए संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत छोड़ो आंदोलन की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और देश के संसाधनों को चंद कारपोरेट घरानों के सुपुर्द करने का कड़ा विरोध किया. आंदोलनकारियों ने भारत के कृषि क्षेत्र को विदेशी आयात के लिए खोलने, बिहार में एसआईआर के नाम पर पिछले दरवाजे से एनआरसी को लागू करने का भी विरोध किया.
संयुक्त किसान मोर्चा ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ को अदानी कंपनी की लूट का चारागाह बना दिया गया है. पेसा और वनाधिकार अधिनियम और सभी संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन करते हुए यहां जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण का विनाश किया जा रहा है. इसके लिए उन्होंने केंद्र और राज्य की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए अडानी और अन्य कॉर्पोरेट कंपनियों को छत्तीसगढ़ से भगाने की जरूरत पर भी जोर दिया है.
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान के पालन के क्रम में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने गरियाबंद, दुर्ग, जगदलपुर, बीजापुर और नारायणपुर जिले में, अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान संगठन और आदिवासी भारत महासभा द्वारा मैनपुर, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा द्वारा दल्ली राजहरा और बालोद में, जिला किसान संघ द्वारा राजनांदगांव में, छत्तीसगढ़ किसान महासभा द्वारा रायपुर में, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति द्वारा हसदेव में, छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ द्वारा कुसमुंडा (कोरबा) और लुण्ड्रा (सरगुजा) में धरना और प्रदर्शन किया गया.
विभिन्न जगहों पर हुए इन आंदोलनों का नेतृत्व तेजराम विद्रोही, प्रवीण श्याेकंद, नरोत्तम शर्मा, सौरा यादव, भीमसेन मरकाम, युवराज नेताम, जनकलाल ठाकुर, रमाकांत बंजारे, सुदेश टीकम, आलोक शुक्ला, प्रशांत झा, जवाहर कंवर, दीपक साहू, सोमेंद्र सिंह, दामोदर श्याम और ऋषि गुप्ता आदि किसान नेताओं ने किया.
सभी जगहों पर प्रशासन के अधिकारियों को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में अमेरिका के साथ कृषि समझौते का और भारत पर थोपे गए 50 प्रतिशत टैरिफ का विरोध किया गया. राष्ट्रीय सहकारी नीति को किसानों के लिए नुकसानदेह बताया गया. लाभकारी समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी और किसानों पर चढ़े सभी ऋणों को माफ करने और सभी वृद्ध किसानों को 10000 रुपए पेंशन देने की मांग की गई. स्मार्ट मीटर सहित बिजली क्षेत्र के निजीकरण का विरोध किया गया. इसके साथ ही कॉरपोरेट खनन रोकने और आदिवासियों के विस्थापन पर रोक लगाने की भी मांग की गई.
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार को अपनी कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों के विरोध में आम जनता और किसान समुदाय का तीखा विरोध झेलना पड़ेगा. भाजपा की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ पूरे प्रदेश में किसानों और आदिवासियों को लामबंद करने की योजना बनाई जा रही है.
मोर्चा के नेताओं ने इस दिन को भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए कहा कि आज के समय में देश को विदेशी पूंजी, बड़े कॉर्पोरेट घरानों और संसाधनों की लूट से बचाना उतना ही जरुरी है. जितना उस दौर में अंग्रेजी साम्राज्य से मुक्ति.. उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ को अडानी समूह की खुली लूट का केंद्र बना दिया गया है. जहाँ पेसा कानून, वनाधिकार अधिनियम और संवैधानिक प्रावधानों को नजरअंदाज करते हुए जल, जंगल, जमीन का विनाश किया जा रहा है.
कॉर्पोरेट विरोधी दिवस के तहत
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने गरियाबंद, दुर्ग, जगदलपुर, बीजापुर और नारायणपुर में प्रदर्शन किया.
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान संगठन और आदिवासी भारत महासभा ने मैनपुर में मोर्चा संभाला.
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने दल्ली राजहरा और बालोद में आंदोलन किया.
जिला किसान संघ ने राजनांदगांव में प्रदर्शन किया.
छत्तीसगढ़ किसान महासभा ने रायपुर में विरोध रैली निकाली.
हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने हसदेव क्षेत्र में आवाज बुलंद की.
छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ ने कोरबा के कुसमुंडा और सरगुजा के लुण्ड्रा में विरोध जताया.
मुख्य मांगें और विरोध के मुद्दे
राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापनों में किसानों ने निम्नलिखित मांगें और आपत्तियाँ दर्ज कीं.
अमेरिका के साथ हुए कृषि समझौते और भारत पर थोपे गए 50% टैरिफ का विरोध.
राष्ट्रीय सहकारी नीति को किसानों के लिए हानिकारक बताते हुए इसका विरोध.
लाभकारी समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी की गारंटी.
किसानों के सभी ऋणों की माफी और सभी वृद्ध किसानों को ₹10,000 मासिक पेंशन.
स्मार्ट मीटर और बिजली क्षेत्र के निजीकरण का विरोध.
कॉर्पोरेट खनन और आदिवासियों के जबरन विस्थापन पर रोक.
सरकार को चेतावनी
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने साफ किया कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार को अपनी नीतियों के चलते आम जनता और किसान समुदाय के तीखे विरोध का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने घोषणा किया कि आने वाले दिनों में प्रदेश भर में किसानों और आदिवासियों को एकजुट कर व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा.
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