हाथियों के रास्ते में बिछाया करंट का जाल, चिंघाड़ और आग की लपटों से खुला राज, वन विभाग की टीम ने किया खुलासा, 4 शिकारियों को गिरफ्तार कर भेजा जेल

Live-wire trap laid in elephants' path; trumpeting and flames exposed the plot; Forest Department team uncovers the scheme, arrests four poachers, and sends them to jail.

हाथियों के रास्ते में बिछाया करंट का जाल, चिंघाड़ और आग की लपटों से खुला राज, वन विभाग की टीम ने किया खुलासा, 4 शिकारियों को गिरफ्तार कर भेजा जेल

धरमजयगढ़/लैलूंगा : जंगल में घूम रहे हाथियों की सुरक्षा के लिए निगरानी कर रहे वन अमले की सतर्कता से वन्यजीवों के शिकार की एक कोशिश का खुलासा हुआ है. वन क्षेत्र में विद्युत करंट प्रवाहित करने के लिए तार बिछाए जाने की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने रात भर निगरानी और घेराबंदी अभियान चलाया. इस दौरान चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. आरोपियों ने वन्यजीवों के शिकार के मकसद से तार बिछाया था. सभी आरोपियों को अदालतमें पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.
यह कार्रवाई धरमजयगढ़ वन मंडलाधिकारी सत्यदेव शर्मा के मार्गदर्शन और लैलूंगा वन परिक्षेत्र अधिकारी ए.एस. किंडो के नेतृत्व में वन अमले तथा ट्रैकिंग टीम ने की. हाथियों की लगातार निगरानी के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने जंगल में वन्यजीवों के लिए बिछाए जाने वाले अवैध विद्युत तारों के खतरे को भी उजागर किया है.
हाथियों की निगरानी के दौरान सामने आया मामला
मिली जानकारी के मुताबिक 18 सितंबर 2026 से लैलूंगा वन परिक्षेत्र में हाथियों का एक बड़ा दल घूम रहा है. हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग के कर्मचारी और ट्रैकर्स लगातार सक्रिय थे. हाथियों के संभावित विचरण क्षेत्र में आने वाले गांवों के लोगों को भी सतर्क किया जा रहा था.
मानव-हाथी द्वंद्व की आशंका को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों के सरपंचों को खबर देने के साथ ही कोटवारों के जरिए मुनादी कराई जा रही थी. ग्रामीणों से हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और जंगल में सावधानी बरतने की अपील की जा रही थी. इसी निगरानी के दौरान वन अमले को ऐसी घटना का पता चला. जिसने हाथियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी.
हाथी की चिंघाड़ और आग की लपटों ने खींचा ध्यान
19 सितंबर की रात करीब 12 बजे कक्ष क्रमांक 302 पीएफ क्षेत्र में हाथियों का दल घूम रहा था. इसी दौरान हाथियों के विद्युत तार के संपर्क में आने से मौके पर चिंगारी और आग की लपटें दिखाई दीं. साथ ही हाथी की चिंघाड़ सुनाई देने पर वन अमले को किसी अनहोनी की आशंका हुई.
हाथियों के आगे निकल जाने के बाद वन विभाग की टीम ने फौरब संबंधित क्षेत्र का मुआयना किया. जांच के दौरान वहां बांस की खूंटियों के सहारे जीआई तार बिछाकर उसमें बिजली करंट देने की व्यवस्था पाए जाने की जानकारी सामने आई. वन विभाग ने मौके पर कांच की शीशियों के इस्तेमाल की बात भी बताई है. इस घटनाक्रम के बाद वन अमले ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी और तार बिछाने वालों की तलाश शुरु कर दी.
रात भर निगरानी, सुबह तीन बजे पहुंचे आरोपी
वन विभाग की टीम ने घटनास्थल के आसपास रात में ही निगरानी शुरू कर दी थी. विभागीय कर्मचारियों और ट्रैकर्स की नजर संदिग्ध गतिविधियों पर बनी हुई थी. इसी दौरान करीब सुबह तीन बजे चार लोग कथित तौर पर बिछाए गए विद्युत तार को निकालने के लिए मौके पर पहुंचे.
वन अमले और ट्रैकिंग टीम ने घेराबंदी की. कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को मौके से पकड़ लिया गया. जबकि दो अन्य भागने में कामयाब रहे. इसके बाद फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई. लगातार तलाश और पूछताछ के बाद फरार दोनों आरोपियों को भी पकड़ लिया गया. इस तरह मामले में कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई
पूछताछ के दौरान आरोपियों से विद्युत तार बिछाकर करंट प्रवाहित किए जाने के बारे में जानकारी सामने आई. इसके बाद विभाग ने प्रकरण क्रमांक 20290/16, तारीख 20 सितंबर 2026 दर्ज किया. मामले में भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई. गिरफ्तार चारों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया. जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
1.सुशील, पिता नानसाय लोहार, उम्र 40 साल
2.शील सागर, पिता मुटून कलंगा, उम्र 42 साल
3.करमसिंह, पिता बनाऊ कलंगा, उम्र 25 साल
4.धोबा, पिता लुकेश्वर कलगा, उम्र 60 साल
चारों आरोपी भकुर्रा के मूल निवासी
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