11वीं के 25 छात्रों को जानबूझकर किया फेल, आक्रोशित पालकों ने प्रदर्शन कर स्कूल गेट में जड़ा ताला, आखिरकार पद से हटाए गए प्रिंसिपल
25 students of class 11 were deliberately failed, angry parents protested and locked the school gate, finally the principal was removed from his post
गरियाबंद/छुरा ब्लॉक/अकलवारा : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक स्थित अकलवारा हाई स्कूल में उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब विद्यालय के प्रिंसिपल जे.पी. वर्मा के खिलाफ ग्रामीणों और छात्र-पालकों ने मोर्चा खोल दिया. प्रिंसिपल की कथित मनमानी और छात्रों के साथ गलत व्यवहार के आरोपों से नाराज पालकों ने स्कूल गेट में ताला जड़कर जोरदार प्रदर्शन किया. 5 घंटों में शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रिंसिपल को पद से हटा दिया.
आरोप है कि प्रिंसिपल जे.पी. वर्मा ने छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार किया और 11वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में गंभीर हेराफेरी कर पास हुए छात्रों को जानबूझकर फेल कर दिया गया. ग्रामीणों और पालकों ने मांग किया कि प्रिंसिपल जे.पी. वर्मा को तत्काल पद से हटाने की मांग की. कहा कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो. प्रदर्शनकारी यह भी कहा कि जब तक कार्रवाई नहीं होती. वे स्कूल संचालन में मदद नहीं करेंगे. जिससे शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई.
स्कूल में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो गई. मामले की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग के अधिकारी भी हरकत में आए.
हालात बिगड़ते देख मौके पर तहसीलदार रमेश मेहता और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) किशन लाल मतावले पहुंचे. उन्होंने छात्रों और पालकों से बात की और उन्हें समझाकर बमुश्किल गेट का ताला खुलवाया.
छात्रों और पालकों के स्पष्ट अल्टीमेटम दिया कि प्रिंसिपल नहीं हटेगा तो पढ़ाई नहीं होगी. आखिरकार शिक्षा विभाग को झुकना पड़ा और प्रिंसिपल जे.पी. वर्मा को पद से हटा दिया गया. इसके साथ ही सुरेश कुमार वर्मा को प्रभारी प्रिंसिपल का चार्ज सौंप दिया गया. इस फैसले के बाद गुस्साए छात्रों और पालकों ने राहत की सांस ली और स्कूल गेट का ताला खोला.
शाला विकास समिति के अध्यक्ष उदित सेन ने कहा, “स्कूल खुलते ही परिणाम में हेरफेर और छेड़छाड़ की शिकायत की गई थी. जांच में सब कुछ साफ़ हुआ, फिर भी प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है.”
छुरा बीईओ किशन लाल मतावले ने कहा कि प्रिंसिपल को हटाने का फैसला शासन को पत्र भेजकर पक्का किया जाएगा. ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न कर सके. इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा है कि अब शिक्षा संस्थानों में मनमानी करने वालों को सबक मिलेगा.
इधर, डीईओ ए.के. सारस्वत ने कहा कि आरोपी प्रिंसिपल को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है. “पहली जांच में उनके द्वारा सहयोग नहीं किया गया था. इसलिए दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं, जो सोमवार तक पूरी होगी. उसके बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी.”
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी क्रूर मजाक है. अगर बच्चों के भविष्य को बचाना है तो ऐसी मनमानी पर तत्काल अंकुश लगाना होगा.
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