पटवारी ने खुद को समझा धमतरी जिला का मुखिया!, सरकारी पट्टेदार जमीन को निजी खजाने में किया तब्दील, पीड़ित लगा रहा दफ्तरों के चक्कर

Patwari considers himself the head of Dhamtari district!, Government leased land converted into private property, victim running around offices

पटवारी ने खुद को समझा धमतरी जिला का मुखिया!, सरकारी पट्टेदार जमीन को निजी खजाने में किया तब्दील, पीड़ित लगा रहा दफ्तरों के चक्कर

धमतरी/नगरी : धमतरी जिले के राजस्व विभाग में कथित अनियमितताओं का एक नया अध्याय सामने आया है. जहां एक पटवारी ने खुद को जिला मुखिया समझकर शासन की जमीन को निजी संपत्ति में तब्दील कर दिया.
मिली जानकारी मुताबिक नगरी तहसील के ग्राम बटनहर्रा में खसरा नंबर 123 (रकबा 1.82 हेक्टर, यानी करीब चार एकड़ पचपन डिसमिल) की जमीन राजस्व सर्वेक्षण मिसल अभिलेख में सखाराम के नाम पर शासकीय पट्टेदार मद में दर्ज थी. यह जमीन गरीब किसानों को जीवनयापन के लिए शासन द्वारा दी जाती है, जिसे बिना कलेक्टर की अनुमति न बेची जा सकती है, न ही भूमिस्वामी में बदली जा सकती है.
यह छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 181-182 का स्पष्ट प्रावधान है. खाताधारक की मौत के बाद उनके वारिस का नाम दर्ज हुआ. 2004 में अंजोरसिंग की मौत के बाद  उनके वारिसो का नाम शासकीय पट्टेदार के रुप में जोड़ा गया. लेकिन सहखातेदार सुकालु आदि का नाम त्रुटि से छूट गया.
सुकालु आदि ने तहसीलदार नगरी के न्यायालय में सह-खातेदार के रुप में नाम दर्ज करने का आवेदन दिया. मामले ई-कोर्ट में दर्ज होने पर हल्का पटवारी के.के. चंद्रवंशी को जांच सौंपी गई. पटवारी ने दस्तावेज जांचे तो पाया उक्त भूमि 1986-87 के राजस्व सर्वे में शासकीय पट्टेदार मद में दर्ज, 2005-06 से 2014-15 के खसरा पंचशाला में भी यही स्थिति.. लेकिन खतौनी बी-1 (2009-10 से 2013-14) में त्रुटिपूर्ण रूप से ‘भूमिस्वामी’ लिखा मिला.
 यहां पटवारी ने साठगांठ का खेल खेला!.. आवेदकों से कथित रुप से रिश्वत लेकर उसने न्यायालय को गुमराह कर सिर्फ सह-खातेदारो का नाम जोड़ने की सिफारिश की. जबकि शासकीय पट्टे मद की भूमि को भूमिस्वामी में बदलने की रिपोर्ट दी. खुद डिजिटल दस्तखत कर अभिलेख ‘दुरुस्त’ कर दिया. ताकि पट्टेदार सभी लाभ लें और समय आने पर बेच सकें. 
।यह अकेला मामला नहीं... ग्राम भठेली के किसान संतलाल ने जिला जनदर्शन में शिकायत की. उनकी शासकीय पट्टे की जमीन पर कलेक्टर अनुमति के बाद रजिस्ट्री हुई, फिर भी अभिलेखों में पट्टेदार ही दिख रही है. अब वे भूमि स्वामी दर्ज कराने दोबारा आवेदन करने सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. संतलाल को अनुमति धारा 165(6) में (आदिवासी से गैर-आदिवासी) मिली. जबकि 165(7ख) होनी चाहिए थी. गलत धारा में भी रजिस्ट्री और नामांतरण हो गया. लेकिन सुधार के चक्कर में वे आज भी भटक रहे हैं. इसके विपरीत वहीं, बटनहर्रा के किसान ने पटवारी को कथित रुप से रिश्वत देकर अपना काम बना लिया.
जिला प्रशासन पर सवाल विधायक के ध्यानाकर्षण पर भी चुप्पी? जनदर्शन की शिकायतें ठंडे बस्ते में? क्या पटवारी चंद्रवंशी पर कार्रवाई होगी. या यह भी कथित भ्रष्टाचार की फेहरिस्त में जुड़ जाएगा? क्या अब इस मामले में पटवारी पर FIR और निलंबन जैसी कार्यवाही होगी या यूं ही जारी रहेगा खेल, और जुड़ता रहेगा धमतरी राजस्व में नया अध्याय?
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