आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं का फूटा गुस्सा, विशाल धरना-प्रदर्शन, मांगो को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, प्रधानमंत्री को भेजा मांग पत्र
Anganwadi workers and helpers burst out in anger, massive sit-in demonstration, submitted memorandum to the collector regarding demands, demand letter sent to the Prime Minister
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का गरियाबंद में विशाल धरना-प्रदर्शन
गरियाबंद : आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को गरियाबंद के गांधी मैदान में विशाल धरना-प्रदर्शन किया. तेज बारिश के बावजूद कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं हुआ. इस दौरान कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव मंच पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को अपना समर्थन दिया.
धरना स्थल पर जनक ध्रुव ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले कई वादे किए थे. लेकिन आज तक उन्हें पूरा नहीं किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि “डबल इंजन की भाजपा सरकार पूरी तरह फेल हो चुकी है. यही वजह है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं समेत प्रदेश के कई विभागों के कर्मचारी लगातार आंदोलन कर रहे हैं.”
धरने में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संघ की अध्यक्ष ने कहा कि चाहे बारिश हो. आंधी आए या तूफान, वे अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगी. उन्होंने बताया कि विधायक जनक ध्रुव के समर्थन से कार्यकर्ताओं का हौसला और बढ़ा है और वे तब तक संघर्ष जारी रखेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती.
धरना और रैली में करीब ढाई हजार कार्यकर्ता शामिल हुए. गांधी मैदान से गौरव पथ और तिरंगा चौक तक रैली निकालने के बाद कार्यकर्ताओं ने गरियाबंद एसडीएम को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार से चुनाव पूर्व किए गए आश्वासनों को फौरन लागू करने की मांग की.
संघ की तरफ़ से चेतावनी दी गई कि अगर मांगे जल्द पूरी नहीं की गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र होगा. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने ऐलान किया कि 19 सितंबर को रायपुर में विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा.
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कलेक्ट्रेट घेराव, प्रधानमंत्री को भेजा मांगपत्र
बिलासपुर : आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की आवाज एक बार फिर सड़कों पर गूंजी. छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ की सैकड़ों पदाधिकारी और सदस्य सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे. उन्होंने अपनी मांगों को लेकर ज़ोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम जिला प्रशासन को विस्तृत मांगपत्र सौंपा.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि “हम भी इस देश की नागरिक हैं. महिला मतदाता हैं. पिछले 50 साल से केंद्र और राज्य सरकारों की हर योजना को घर-घर तक पहुंचाने का काम कर रही हैं. इसके बावजूद हमें न तो कर्मचारी का दर्जा मिला है. न ही न्यूनतम मजदूरी, पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं.
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि 2 अक्टूबर 1975 को आईसीडीएस, एकीकृत बाल विकास सेवा योजना शुरु हुई थी. तब से देश भर में करीब 27 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं. छत्तीसगढ़ में इनकी तादाद तकरीबन लाख में है.
सहायिका और कार्यकर्ता संगठन पदाधिकारियों ने बताया कि “केंद्र सरकार सिर्फ नाममात्र का पारिश्रमिक देती है. जो जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं है. महंगाई भत्ता, पेंशन, चिकित्सा सुविधा या पदोन्नति का लाभ भी हमें नहीं मिलता. केंद्र और राज्य सरकारें एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालती रहती हैं. लेकिन वर्तमान में दोनों ही जगह एक ही पार्टी की सरकार है. इसलिए हमारी पीड़ा को गंभीरता से समझा जाना चाहिए.”
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शिक्षाकर्मी और सहायिकाओं को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए. कर्मचारी घोषित होने तक कार्यकर्ताओं को 26,000 और सहायिकाओं को 22,100 मासिक वेतन दिया जाए. सेवानिवृत्ति पर पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिले. कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर और सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर पदोन्नति का फायदा मिले.
संगठन पदाधिकारी ने जानकारी दिया की मांग पत्र में हमने डिजिटल प्रणाली पोषण ट्रैकर, फेस कैप्चर, ई-KYC आदि से होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को देखते हुए इन्हें बंद कर कार्य ऑफलाइन किया जाए.
पदाधिकारी ने कहा कि गुजरात हाई कोर्ट के न्यूनतम वेतन और ग्रेच्युटी संबंधी फैसले को छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जाए। बुढ़ापे में कार्यकर्ताओं को 5 लाख और सहायिकाओं को 4 लाख ग्रेच्युटी राशि मिले और मासिक पेंशन क्रमशः 10,000 और 8,000 दी जाए. इसके अलावा आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति मिले.
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. उन्होंने कहा कि “50 साल से हम बच्चों और माताओं के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए समर्पित हैं. अब समय आ गया है कि सरकार हमें भी सम्मान और सुरक्षा दे.
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं का फूटा गुस्सा, कई मांगो को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
खैरागढ़ : 50 साल से सेवा दे रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है. सोमवार सुबह से ही उन्होंने नगर के अंबेडकर चौक पर डेरा डाल दिया. सड़क पर धरना-प्रदर्शन के चलते अंबेडकर चौक से इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय मार्ग घंटों तक बंद रहा. हालात को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात किया. करीब दोपहर 2 बजे प्रदर्शनकारी रैली की शक्ल में नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा.
संघ की जिला अध्यक्ष लता तिवारी ने कहा कि “आज हमने एक दिवसीय जिला स्तरीय हड़ताल की है. अब 19 सितंबर को राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा. अगर तब भी मांगें पूरी नहीं हुईं तो प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए मजबूर होंगी.
उनकी प्रमुख मांगों में कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम वेतन, पेंशन-ग्रेच्युटी, बीमा, चिकित्सा और पदोन्नति जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं. आक्रोशित महिलाओं ने चेतावनी दी कि इस बार आंदोलन किसी भी सूरत में अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा.
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