टीईटी अनिवार्यता खत्म करने की मांग, सैकड़ों शिक्षकों ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर जिलाध्यक्ष कुमेन्द्र कश्यप के नेतृत्व में विधानसभा का किया घेराव

Demanding the abolition of the TET requirement, hundreds of teachers—led by District President Kumendra Kashyap—laid siege to the Legislative Assembly to press for a seven-point list of demands.

टीईटी अनिवार्यता खत्म करने की मांग, सैकड़ों शिक्षकों ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर जिलाध्यक्ष कुमेन्द्र कश्यप के नेतृत्व में विधानसभा का किया घेराव

रायपुर/गरियाबंद : छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेशव्यापी विधानसभा घेराव आंदोलन में टीईटी (TET) की अनिवार्यता खत्म करने की मांग प्रमुखता से उठी. गरियाबंद जिले के सैकड़ों शिक्षकों ने जिलाध्यक्ष कुमेन्द्र कश्यप के नेतृत्व में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुये सात सूत्रीय मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर आयोजित इस विशाल आंदोलन में प्रदेशभर से हजारों शिक्षक शामिल हुए और सरकार से लंबित मांगों पर तत्काल सकारात्मक फैसला लेने की मांग रखी.
प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राठौर के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि सेवारत शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त की जाए. क्योंकि वर्षों से विद्यालयों में अपनी सेवायें दे रहे शिक्षकों के अनुभव और कार्यकुशलता को प्राथमिकता मिलनी चाहिये. शिक्षकों का कहना था कि पदोन्नति, क्रमोन्नति वेतनमान एवं अन्य सेवा लाभों के लिये टीईटी की बाध्यता उचित नहीं है. इसके साथ ही सात सूत्रीय मांगों का शीघ्र निराकरण किये जाने की भी मांग की गई.
गरियाबंद जिले के पांचों विकास खण्डों से बड़ी तादाद में शिक्षक आंदोलन में शामिल हुए. विकास खण्ड फिंगेश्वर के अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार ध्रुव, छुरा के अध्यक्ष धनंजय वर्मा, मैनपुर के अध्यक्ष नीलाधर प्रधान,गरियाबंद के अध्यक्ष तिलक यादव और देवभोग विकास खण्ड के पदाधिकारियों के नेतृत्व में शिक्षक साथियों ने आंदोलन को कामयाब बनाया और शासन के सामे अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से रखा.
इस मौके पर फेडरेशन के प्रांतीय प्रवक्ता दिनबंधु वैष्णव, रूपिका रानी मरकाम, जिला संयोजक फनेंद्र साहू,जिला कार्यकारी अध्यक्ष लोकेश्वर सोनवानी, जिला सचिव गणेश दुर्गा सहित जिला पदाधिकारी यशवंत बघेल, पप्पू सिन्हा, रुपेश सिन्हा, फनेश्वर कंवर, सुनील सिन्हा, ओमप्रभा साहू, डालिमा ठाकुर, नीता सार्वा,मीना यादव, मिलन सोनवानी, दुर्गेश तंडिल्य,नरोत्तम साहू, आसा राम रजक, लोचन बघेल, विजय महोबिया और नरेंद्र कँवर मौजूद रहे.
इसके साथ ही ब्लॉक पदाधिकारी परमेश्वर बघेल, त्रिलोक सेन,पूनम चंद्राकर, गोकुल बघेल,लक्ष्यहेंद्र साहू, अनुसूया ध्रुव एवं सरिता गायकवाड़ ने भी आंदोलन में सक्रिय सहभागिता निभाई और शिक्षकों की मांगों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की.
सभा को संबोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक वर्षों से वेतन विसंगति दूर करने,क्रमोन्नति वेतनमान प्रदान करने, पूर्व सेवा अवधि की गणना कर सभी सेवा लाभ देने, सेवारत शिक्षकों के लिये टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने सहित सात सूत्रीय मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं. शासन को शिक्षकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुये शीघ्र निर्णय लेना चाहिए.
जिलाध्यक्ष कुमेन्द्र कश्यप ने कहा कि गरियाबंद जिले के शिक्षक साथियों ने अनुशासन, एकजुटता और संघर्ष की मिसाल पेश करते हुए आंदोलन को सफल बनाया है. उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवायें दे रहे शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता बनाये रखना न्यायसंगत नहीं है. सरकार को इस बाध्यता को समाप्त कर शिक्षकों को पदोन्नति,क्रमोन्नति एवं अन्य सेवा लाभों से वंचित होने से बचाना चाहिए.
उन्होंने सभी ब्लॉक अध्यक्षों, जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारियों तथा आंदोलन में शामिल प्रत्येक शिक्षक साथी के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कहा कि यह संघर्ष सिर्फ सात सूत्रीय मांगों का नहीं,बल्कि शिक्षकों के सम्मान,अधिकार और भविष्य का संघर्ष है. अगर सरकार शीघ्र सकारात्मक फैसला नहीं लेती है तो फेडरेशन चरणबद्ध एवं लोकतांत्रिक आंदोलन को और तेज करेगा.
प्रदेशव्यापी इस विधानसभा घेराव ने स्पष्ट संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ के सहायक शिक्षक एवं समग्र शिक्षक टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने सहित अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं और मांगों के निराकरण तक उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा.
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