AI ने काट दिए गरीबों के नाम?” या हो गया इसमें खेल..? आवास सूची से सैकड़ों परिवार बाहर, जनपद पंचायत कुरुद में फूटा जनाक्रोश, जिम्मेदार कौन?
"Did AI strike the names of the poor?" Or was there foul play involved? Hundreds of families left out of the housing list; public outrage erupts in Kurud Janpad Panchayat—who is responsible?
धमतरी/कुरुद : प्रधानमंत्री आवास योजना की नई लिस्ट में पात्र हितग्राहियों के नाम नहीं आने से जनपद पंचायत कुरुद में गुरुवार को भारी जनआक्रोश देखने को मिला. करगा, जरवायडीह, खर्रा, मुल्ले, सिरसिदा, चर्रा, सिंधौरीखुर्द, दर्रा, गुदगुदा, भैसमुंडी सहित आसपास के गांवों से पहुंचे दो सौ से ज्यादा ग्रामीणों ने जनपद कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर उनका नाम आवास सूची से किस आधार पर काट दिया गया.
आवास की उम्मीद लगाए बैठे गरीब परिवारों का कहना था कि वे सालों से कच्चे मकानों में रह रहे हैं. शासन की सभी पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं. फिर भी उनका नाम लिस्ट में नहीं है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है.
प्रदर्शन करने वालों में ग्राम करगा से दीपिका साहू, राजा साहू, कामता साहू, प्रेमलाल साहू, चेतन साहू, खिलेश साहू, महेश साहू, तेजराम साहू, सीताराम साहू, नीलकमल साहू, घनश्याम डहरे, बिंदुबाई, तामेश्वरी सिन्हा, जरवायडीह से बिन्दु पाल, धनेश्वर पाल, उमेंद्र यादव, कल्याणी पाल, बेनीराम पाल, उमेंदी यादव, सुरेश यादव, खर्रा से कामदेव साहू, नूतनलाल साहू, नरेंद्र ध्रुवंशी, हेमलाल यादव, मुल्ले से सीताबाई यादव, टिकेश्वरी साहू, सिरसिदा से देवनारायण साहू, चर्रा से अनुसुइया साहू, कुलेश्वरी साहू, देवकुमारी साहू, पिंगला साहू, प्रेमीन साहू, अहिल्या साहू, तामेश्वरी साहू सहित बड़ी तादाद में ग्रामीण शामिल रहे.
“AI ने बनाई लिस्ट, स्थानीय स्तर पर जानकारी नहीं”
जब आक्रोशित हितग्राहियों ने अधिकारियों से पूछा कि उनका नाम आखिर क्यों काटा गया, तो उन्हें जो जवाब मिला उसने लोगों की नाराजगी और बढ़ा दी. जनपद कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों द्वारा बताया गया कि लिस्ट केंद्रीय स्तर पर तैयार की गई है और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों एवं सर्वे डाटा का परीक्षण कर पात्रता तय की गई है.
इस बारे में जनपद पंचायत कुरूद के सीईओ अमित कुमार सेन ने बताया कि केंद्रीय टीम द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जानकारी दी गई है कि एआई आधारित प्रणाली के जरिए सर्वे और छंटनी की प्रक्रिया हुई है. उन्होंने कहा कि पूरा डाटा केंद्रीय एजेंसी के पास है. इसलिए स्थानीय स्तर पर यह बताना संभव नहीं है कि किसी विशेष हितग्राही का नाम किस वजह से लिस्ट में शामिल हुआ या नहीं हुआ.
जवाब से बढ़े सवाल
सीईओ के इस बयान के बाद मौजूद ग्रामीणों ने कई सवाल खड़े किए. लोगों का कहना था कि अगर स्थानीय प्रशासन के पास ही यह जानकारी नहीं है कि नाम क्यों कटा, तो प्रभावित परिवार अपनी समस्या लेकर आखिर कहां जाएं? क्या गरीबों के जीवन से जुड़े बड़े फैसले अब पूरी तरह मशीनों और एल्गोरिदम के भरोसे होंगे? अगर किसी पात्र परिवार के साथ अन्याय हुआ है तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तकनीक का इस्तेमाल पारदर्शिता बढ़ाने के लिए होना चाहिए. लेकिन यहां तो पात्र लोगों को ही लिस्ट से बाहर कर दिया गया और कोई स्पष्ट कारण बताने वाला भी नहीं है.
जनपद कार्यालय में बढ़ती गई भीड़, मच गई अफरा-तफरी
चश्मदीदों के मुताबिक जैसे-जैसे कई गांवों से हितग्राही जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचते गए. कार्यालय परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई. लोगों ने अधिकारियों और कर्मचारियों से जवाब मांगते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई. इस दौरान कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. ग्रामीणों का आरोप है कि भीड़ और नाराजगी बढ़ते देख कई कर्मचारी अपने कक्षों से निकल गए. जिससे लोगों में और अधिक रोष व्याप्त हो गया.
“छत का सपना टूटने नहीं देंगे”
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर पात्र परिवारों के नामों की फिर से जांच कर उन्हें योजना का लाभ नहीं दिया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों को सम्मानजनक आवास देने के लिए बनाई गई है. लेकिन पात्र लोगों के नाम कटने से उनके सपनों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है.
सबसे बड़ा सवाल
आखिर अगर किसी गरीब परिवार का नाम आवास सूची से बाहर हो गया है. तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है?
एआई की, केंद्रीय एजेंसी की, या फिर उस प्रशासनिक व्यवस्था की जो आज भी प्रभावित लोगों को यह नहीं बता पा रही कि उनका नाम लिस्ट से क्यों गायब हुआ?
कुरुद क्षेत्र में यह मुद्दा अब तेजी से जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है और सैकड़ों परिवार शासन से जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
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