संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य ने चौथी मंजिल से कूदकर, कटा हुआ प्राइवेट पार्ट, कमरे में ग्राइंडर-धोती, सीढ़ियों पर खून, संतों ने उठाए सवाल, CBI जांच की मांग
Disciple of Saint Premanand Maharaj jumps from fourth floor; severed private part found; grinder and dhoti discovered in the room; blood on the stairs; saints raise questions and demand a CBI probe.
वृंदावन : उत्तर प्रदेश के वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत हो गई. प्रेमानंद महाराज के शिष्य वृंदावन के वराह घाट मार्ग पर गऊ कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से गिर गए. जिस वजह से उनकी मौत हो गई. उनकी मौत को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. अभी यह पता नहीं चल पाया है कि प्रेमानंद के शिष्य ने आत्महत्या की थी या उनकी हत्या की गई थी. इस मामले को लेकर मथुरा पुलिस की जांच-पड़ताल जारी है.
मिली जानकारी के मुताबिक प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी उम्र 25 साल की मौत हुई. प्रेमानंद महाराज का शिष्य बनने से पहले रसिक दुलारी का नाम दीपक लोधी था. जो प्रेमानंद महाराज के केली कुंज आश्रम में रहते थे. गुरुवार शाम रसिक दुलारी इसी बिल्डिंग की चौथी मंजिल से गिरे थे. जिसके बाद उन्हें सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान पुलिस ने उन्हें मृत घोषित किया. पुलिस को जैसे ही इस मामले के बारे में पता चला. वे अस्पताल पहुचें. जहां पुलिस ने रसिक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
संदिग्ध हालत में हुई मौत
मृतक रसिक के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान थे. जिसकी वजह से उनका काफी खून बह चुका था. जब पुलिस ने मृतक रसिक के कमरे की तलाशी ली तो उन्हें कमरे से ग्राइंडर मिला.
मृतक रसिक ने 2015 में दीक्षा ली थी। इससे पहले वह जबलपुर में बिजली मिस्त्री के तौर पर काम करते थे. प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद रसिक दुलारी वृंदावन के केली कुंज में रहने लगे थे. केली कुंज में प्रेमानंद महाराज के 50 अन्य शिष्य भी रहते हैं.
साधु-संतों ने इस तरह की घटना पर चिंता जताई है. साथ ही मामले की सीबीआई जांच की मांग की है. घटना को लेकर वृंदावन के साधु-संतों के बीच कई तरह की चर्चाएं हैं. पुलिस इस मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है, ताकि पता चल सके कि रसिक की हत्या हुई थी या उन्होंने आत्महत्या की थी.
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दो साल पहले जबलपुर से आए थे वृंदावन
दीपक पटेल जबलपुर के रहने वाले थे. परिवार के मुताबिक करीब दो साल पहले उनका जबलपुर में मन नहीं लग रहा था. धार्मिक रुचि के चलते वह वृंदावन आए थे. बाद में उन्होंने प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली और उनका नाम रसिक दुलारी शरण हो गया.
परिवार के मुताबिक वृंदावन आने से पहले दीपक नर्मदा की परिक्रमा भी कर चुके थे. एक बार वृंदावन से जबलपुर लौटने के बाद वह करीब दो साल पहले दोबारा यहां आए और फिर वापस नहीं गए.
परिवार से कम हो पाती थी बातचीत
दीपक के भाई मनीष पटेल ने बताया कि उनके पिता चेतन पटेल के दो बेटे और एक बेटी हैं. दीपक ने कॉलेज तक पढ़ाई की थी और पढ़ने में होशियार थे. धार्मिक रुचि के कारण वह साधु जीवन की तरफ बढ़े। मनीष के मुताबिक वृंदावन आने के बाद दीपक से बातचीत कम हो पाती थी. परिवार के लोग जब उनसे मिलने आते थे तो उन्हें दूसरी जगह रुकना पड़ता था. इसलिए मुलाकात भी सीमित समय के लिए हो पाती थी.
पिछले साल मां आई थीं मिलने
दीपक की मां लोंग बाई पटेल ने बताया कि शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे परिवार को फोन कर कहा गया कि दीपक की तबीयत खराब है और उन्हें वृंदावन आने के लिए कहा गया. मां के मुताबिक वह पिछले साल दीपक से मिलने वृंदावन आई थीं. वह करीब पांच दिन यहां रुकी थीं. इस दौरान दीपक ने उन्हें मथुरा-वृंदावन घुमाया था.
मोबाइल और डायरी पुलिस के कब्जे में
पुलिस ने दीपक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. फॉरेंसिक टीम ने मौके से जरूरी सबूत जुटाए हैं. पुलिस ने दीपक का मोबाइल और डायरी भी कब्जे में ली है.
कोतवाली प्रभारी अश्विनी कुमार ने बताया कि इमारत और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है. सीओ संदीप सिंह के मुताबिक अस्पताल से खबर मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की. पुलिस मौत की वजह के साथ-साथ प्राइवेट पार्ट कटने की घटना की भी जांच कर रही है.
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