सदन में गूंजा हसदेव जंगल की कटाई और APL को फर्जी तरीके से BPL कार्ड बनाने का मामला, गर्भगृह में नारेबाजी, सभी कांग्रेस विधायक निलंबित

The issue of cutting of Hasdeo forest and making of BPL cards for APL resonated in the House, sloganeering took place in the sanctum sanctorum, all Congress MLAs were suspended.

सदन में गूंजा हसदेव जंगल की कटाई और APL को फर्जी तरीके से BPL कार्ड बनाने का मामला, गर्भगृह में नारेबाजी, सभी कांग्रेस विधायक निलंबित

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसेदिन हसदेव अरण्य के जंगलों में पेड़ों की कटाई का मुद्दा जमकर गरमाया. विपक्ष ने सरकार पर जंगल बचाने के वादे तोड़ने का आरोप लगाते हुए सदन की कार्यवाही रोकने तक की मांग कर दी. स्थगन प्रस्ताव नामंजूर होते ही माहौल इतना गर्म हो गया कि कांग्रेस विधायक सीधे गर्भगृह में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे. जिसके बाद 32 विधायकों को दिन भर के लिए निलंबित कर दिया गया.​
रायपुर में चल रहे शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन विपक्ष ने हसदेव जंगल में हो रही कथित पेड़ों की कटाई को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई. विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश के बड़े जंगलों में पुलिस बल तैनात कर ‘छावनी’ जैसा माहौल बनाकर पेड़ों की कटाई करवाई जा रही है. जबकि पहले पारित प्रस्तावों को सरकार ने कूड़े की टोकरी में फेंक दिया.
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सदन में कहा कि हसदेव जैसे संवेदनशील वन क्षेत्रों में स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों की राय को नजरअंदाज कर सिर्फ कंपनियों के हित में जंगल उजाड़े जा रहे हैं. उनका कहना था कि सदन में पारित प्रस्तावों की अवहेलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति गंभीर लापरवाही भी है. इसलिए पहले जंगल बचाने के सवाल पर ही बहस होनी चाहिए.
पेसा कानून और ‘फर्जी’ जनसुनवाई
पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि पेसा कानून की अनदेखी करते हुए गांवों में ‘फर्जी जनसुनवाई’ की जा रही है और इन्हीं कागज़ी प्रक्रियाओं के दम पर पेड़ों की कटाई को वैध ठहराया जा रहा है। विपक्षी सदस्यों का कहना है कि वनाधिकार, ग्राम सभाओं की सहमति और आदिवासी हितों को दरकिनार कर जिस तरह से फाइलें आगे बढ़ाई जा रही हैं, वह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है.​
इसी मुद्दे पर विपक्ष ने सदन की सारी कार्यवाही रोककर हसदेव जंगल की कटाई पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग रखी. लेकिन सरकार की ओर से जवाब के बाद भी स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया. इसके बाद से ही विपक्ष और सरकार के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई और नारेबाजी का दौर शुरु हो गया.​
गर्भगृह में नारेबाजी, 32 विधायक निलंबित
स्थगन प्रस्ताव खारिज होने के बाद कांग्रेस विधायक अपनी सीटों से उठकर सीधे गर्भगृह में पहुंच गए और ‘जंगल बचाओ’, ‘हसदेव बचाओ’ जैसे नारे लगाने लगे. विधानसभा की कार्यवाही के बीच हुई इस जोरदार नारेबाजी से सदन का माहौल पूरी तरह शोरगुल में बदल गया और कार्यवाही सुचारु रुप से नहीं चल सकी.​ हालात बिगड़ने पर अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए गर्भगृह में आए कांग्रेस के 32 विधायकों को दिनभर के लिए निलंबित करने की घोषणा कर दी. बताया जा रहा है कि इस प्रदर्शन में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी अग्रिम पंक्ति में रहे. जिन्होंने सरकार पर ‘जंगल विरोधी’ नीति अपनाने का आरोप दोहराया.
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विधानसभा में गूंजा एपीएल को फर्जी तरीके से बीपीएल कार्ड बनाने का मामला, जांच के निर्देश
बिलासपुर जिले में पिछले दो साल में एपीएल कार्ड को बगैर हितग्राहियों की अनुमति से बीपीएल में फर्जी तरीके से बदलने का मामला विधानसभा में गूंजा. सत्ता पक्ष के विधायक ने इसकी आड़ में गरीबों के हक पर डाका डालने का आरोप लगाते हुए इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की. विभागीय मंत्री इसके लिए तैयार नहीं हुए लेकिन स्पीकर ने इसे गंभीरता से लेते हुए खाद्य मंत्री को जांच के लिए निर्देशित किया.
छत्तीसगढ़ विधानसभा में शीत सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने यह मामला उठाते हुए खाद्य मंत्री दयालदास बघेल को जमकर घेरा. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच कई APL कार्ड को बगैर हितग्राही की अनुमति के बीपीएल में परिवर्तित कर दिया गया. इस मामले में जिला प्रशासन ने FIR भी दर्ज कराया था. लेकिन दोषी अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.
भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि विभाग में भ्रष्टाचार को खुलेआम संरक्षण दिया जा रहा है. विभागीय मंत्री दयालदास बघेल ने बताया कि इस मामले में उनके विभाग से कोई FIR दर्ज नहीं कराई गई थी. 19 ऐसे कार्ड की शिकायत मिली थी जिसमें 15 हितग्राहियों ने बी पी ए ल के लिए सहमति दी थी. निगम के जोन कमिश्नर की तरफ से FIR कराई गई थी. इसमें उनके विभाग की कोई भूमिका नहीं है.
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भाजपा विधायक ने मंत्री पर सवालों की झड़ी लगाते हुए इसी जांच कराकर दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की. जिसके लिए मंत्री तैयार हुए. सत्ता पक्ष के ही विधायक अजय चंद्राकर ने चर्चा में भाग लेते हुए इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इस विषय पर सदन में आधे घंटे की चर्चा कराने का आग्रह आसंदी से किया. अंत में स्पीकर डॉ रमन सिंह ने विभागीय मंत्री को इस मामले की जांच के लिए निर्देश दिए.
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विधायक रेणुका सिंह ने उठाया मोबाइल नेटवर्क का मुद्दा, भरतपुर–सोनहत के 410 गांव आज भी नेटवर्क से वंचित
रतपुर–सोनहत विधानसभा क्षेत्र की विधायक रेणुका सिंह ने शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री से अहम सवाल किया. उन्होंने सदन में बताया कि उनका विधानसभा क्षेत्र दो जिलों एमसीबी और कोरिया में विभाजित है. जहां आज भी मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा से कई गांव वंचित हैं.
विधायक ने जानकारी देते हुए कहा कि कुल 410 गांवों वाले इस विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में गांवों में अब तक मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है. एमसीबी जिले के 93 गांवों में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा नहीं है. वहीं कोरिया जिले के 32 गांव आज भी नेटवर्क विहीन हैं.
रेणुका सिंह ने सरकार से मांग किया कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में संचार सुविधाओं के विस्तार के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं. ताकि आमजन को डिजिटल सुविधाओं से जोड़ा जा सके.
वहीं विधायक रेणुका सिंह की जवाब पर मुख्यमंत्री ने अपना जवाब देते हुए कहा कि सदस्य महोदय का विधानसभा क्षेत्र दो जिलों में है जिला कोरिया और जिला मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर और दूरसंचार विभाग के अनुसार उनके विधानसभा क्षेत्र में कल 337 ग्राम है जिसमें दूरसंचार विभाग द्वारा 290 नेटवर्क का कवरेज है. 47 में नहीं है. लेकिन इसमें भी 40 में स्वीकृत हो गई है. वहां पर काम चालू है. और भारत सरकार को पत्र लिखा गया था. 5000 नए टावरों के लिए जिसमें 10 दिसंबर को पत्र का जवाब मिला है कि 500 टावरों की स्वीकृति मिली है. जिसमें जो सात गांव बच्चे थे वह भी स्वीकृत है.
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विधायक रिकेश ने उठाया कुरुद रोड डामरीकरण का मामला : उप मुख्यमंत्री साव बोले- सड़क पर एसबीडीसी कार्य जल्द होगा शुरु
विधायक रिकेश सेन ने कुरूद साईं मंदिर स्थित सड़क के डामरीकरण की गुणवत्ता को लेकर सवाल किया. लोक निर्माण मंत्री ने जवाब में बताया कि सचमुच ठेकेदार का कार्य गुणवत्तापूर्ण नहीं था. नोटिस देकर सड़क में एसडीबीसी करने निर्देश दिए गए हैं.
विधानसभा में विधायक रिकेश सेन ने वैशाली नगर विधानसभा अंतर्गत कुरुद में नगर पालिक निगम द्वारा कराए गए सड़क डामरीकरण कार्य की ओर उप मुख्यमंत्री अरुण साव का ध्यानाकर्षण कराया. सेन ने सदन को बताया कि ढांचा भवन कुरुद से शासकीय प्राथमिक शाला कुरुद और साईं मंदिर होते हुए 80 एलआईजी तक सड़क डामरीकरण किया गया. यह कार्य गुणवत्ताविहीन था. इसकी शिकायत के बाद क्या कार्रवाई की जा रही है?
उप मुख्यमंत्री (लोक निर्माण) अरुण साव ने सदन में बताया कि नगर निगम भिलाई द्वारा कुरुद भिलाई में ढांचा भवन कुरुद से शासकीय प्राथमिक शाला कुरुद और साईं मंदिर से होते हुये से 80 एलआईजी तक सड़क डामरीकरण कार्य में गुणवत्ता के बारे में शिकायत मिली थी. ठेकेदार द्वारा सुधार के बाद मानक अनुरुप गुणवत्तापूर्वक बनाया गया है. सड़क में एसडीबीसी का काम बाकी है जो कि बारिश के कारण रुका था. अब जल्द काम होगा. गुणवत्ताहीन सड़क की शिकायत मिलने पर ठेकेदार को गुणवत्ता के संबंध में तीन नोटिस दिया गया है. नोटिस के बाद ठेकेदार द्वारा मापदण्ड के अनुरूप सुधार कार्य कराया गया. सुधार के बाद सड़क की गुणवत्ता की जांच केन्द्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला शासकीय लोक निर्माण विभाग दुर्ग परिक्षेत्र से कराई गई. अब यह निर्माण कार्य रिपोर्ट मानक के अनुरुप है.
सेन ने कुरुद की इस सड़क को लेकर क्षेत्रवासियों से कहा है कि इस सड़क निर्माण कार्य में सेमी डेंस बिटुमिनस कंक्रीट (एसबीडीसी) एक महत्वपूर्ण ऊपरी परत का कार्य जल्द शुरु होगा. ताकि सड़क मजबूत और टिकाऊ रहे.
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