धान घोटाले के आरोपी का फर्जी टॉयलेट सफाई वीडियो वायरल, कलेक्टर पर लगाए गंभीर झूठे आरोप, VIDEO बनाकर फंसा कर्मचारी शशिकांत महंत
A fake video showing an accused in the paddy scam cleaning a toilet has gone viral; the accused leveled serious, false allegations against the Collector, and employee Shashikant Mahant was implicated after creating the video.
सक्ती : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में एक अजीब मामला सामने आया है. यहां धान खरीदी में करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार हुआ था. इस घोटाले का आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में है. प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में पदस्थ आरोपी शशिकांत महंत पर 89 लाख रुपए के धान घोटाले का आरोप है.
घोटाला उजागर होने के बाद कार्रवाई शुरू हुई. प्रशासन ने अप्रैल में ही FIR दर्ज करा दी थी. इसके बाद से ही आरोपी लगातार बचने के रास्ते खोज रहा था. आरोपी शशिकांत महंत ने मानवाधिकार आयोग में एक शिकायत दर्ज कराई. उसने 6 अगस्त 2026 को यह पत्र भेजा था. इसमें सक्ती कलेक्टर पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए थे.
उसने दावा किया कि उससे टॉयलेट साफ कराया गया. इसके सबूत के तौर पर उसने एक वीडियो भी पेश किया. वीडियो में वह खुद टॉयलेट की सफाई करता दिख रहा था. कोई अन्य व्यक्ति उसका वीडियो बना रहा था.
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा. वीडियो सामने आते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया. मीडिया ने फौरन इस मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया.
सक्ती कलेक्टर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से झूठा आरोप है. आरोपी भ्रष्टाचार से बचने के लिए नाटक कर रहा है. कलेक्टर ने सीधे तौर पर कहा कि यह एक साजिश है. आरोपी खुद कहीं भी जाकर ऐसा वीडियो बना सकता है. प्रशासन उसकी हर हरकत पर चौबीसों घंटे निगरानी नहीं रख सकता. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी चल रही है. अगर प्रशासन ने ऐसा कराया होता तो वीडियो आरोपी के पास कैसे मिलता.
दो महीने बाद हुई पुलिस कार्रवाई
पुटीडीह केंद्र में 89 लाख रुपए का धान कम पाया गया था. जांच के दौरान सहकारी समितियों के सहायक पंजीयक ने सख्त रुख अपनाया. उन्होंने 29 जून 2026 को एक नया आदेश पत्र जारी किया.
इस पत्र में अन्य दोषियों के खिलाफ भी मामला दर्ज करने को कहा गया. इसमें कंप्यूटर ऑपरेटर द्रोण प्रताप शांडिल्य का नाम भी शामिल था. इसके अलावा प्राधिकृत अधिकारी श्याम बाई पर भी कार्रवाई के निर्देश थे.
निर्देश के बाद भी पुलिस कार्रवाई में देरी होती रही. आरोप है कि पुलिस दो महीने तक टालमटोल करती रही. आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जा रही थी. जब वरिष्ठ अधिकारियों का भारी दबाव बना तब पुलिस हरकत में आई. पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया. कोर्ट के आदेश के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है. मामले की आगे की जांच जारी है प्रशासन का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा. फर्जी वीडियो बनाकर जांच को भटकाने की कोशिश सफल नहीं होगी.
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