सावन के अंतिम रविवार भूतेश्वरनाथ धाम में गूंजी सेवा की मिसाल, क्लोज फ्रेंड ग्रुप मॉर्निंग क्लब ने कराया भंडारा, उमड़ा आस्था का सैलाब
An inspiring example of service was witnessed at Bhuteshwarnath Dham on the last Sunday of Sawan; the 'Close Friend Group Morning Club' organized a *Bhandara* (community feast), drawing a massive surge of devotees.
गरियाबंद : सावन के अंतिम रविवार को गरियाबंद के मौरदा स्थित विश्व प्रसिद्ध एवं विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग भूतेश्वरनाथ महादेव के पावन धाम में आस्था का सैलाब उमड़ा. हजारों की संख्या में श्रद्धालु और कांवड़िये बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे. पूरे परिसर में हर-हर महादेव के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा.
इसी अवसर पर क्लोज फ्रेंड ग्रुप मॉर्निंग क्लब, रायपुर के तत्वावधान में भूतेश्वरनाथ धाम में भंडारे का आयोजन किया गया. क्लब के सदस्यों ने श्रद्धालुओं को प्रसाद एवं भोजन वितरित कर सेवा कार्य किया. इसके साथ ही सभी सदस्यों ने भगवान भूतेश्वरनाथ महादेव का जलाभिषेक कर विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की.
क्लब से जुड़े अमोल गरुड़ी, परमांसद सिंह, मंगलेश्वर सिंह, नितिन पांडे, संतोष सिंह, संतोष यादव, मार्तण्ड सिंह, अनुराग, सुजीत कसलेवाल, तागेशकुमार और मनोज झा सहित अन्य सदस्यों ने भंडारे में अपनी सहभागिता निभाई.
अमोल गरुड़ी ने कहा कि सावन के अंतिम रविवार को भूतेश्वरनाथ महादेव की सेवा करने का अवसर मिलना पूरे ग्रुप के लिए सौभाग्य की बात है. बाबा के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करना ही हमारे लिए सबसे बड़ा पुण्य है. उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ग्रुप सामाजिक और धार्मिक सेवा के ऐसे आयोजनों में बढ़-चढ़कर सहभागिता करता रहेगा.
नितिन पांडे ने कहा कि भूतेश्वरनाथ धाम में सावन के अंतिम रविवार को जिस तरह हजारों श्रद्धालु और कांवड़िये पहुंचे. वह अद्भुत आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भंडारे के माध्यम से श्रद्धालुओं की सेवा कर सभी सदस्यों को आत्मिक संतुष्टि मिली. बाबा भूतेश्वरनाथ की कृपा सभी पर बनी रहे और क्षेत्र में सुख-शांति एवं समृद्धि आए, यही कामना है.
सावन के अंतिम रविवार को भूतेश्वरनाथ धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही. कांवड़िये दूर-दूर से जल लेकर पहुंचे और बाबा का जलाभिषेक किया. भक्ति, सेवा और आस्था के इस संगम ने सावन के अंतिम रविवार को भूतेश्वरनाथ धाम में यादगार बना दिया.
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भव्य दंड बम यात्रा — आस्था की डगर, भक्ति का सफर
गरियाबंद/मैनपुर : गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत अमलीपदर में कांवरिया संघ द्वारा भगवान भोलेनाथ की भक्ति और आस्था से ओत-प्रोत भव्य दंड बम यात्रा का आयोजन किया गया. इस धार्मिक यात्रा को लेकर क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना रहा. यात्रा की शुरुआत सुखा नदी से हुई, जहां कांवरिया श्रद्धालु पवित्र जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए अपनी भक्ति यात्रा पर निकले. सुखा नदी से लेकर अमलीपदर बड़े तालाब स्थित शिव मंदिर तक लगभग 2 किलोमीटर की दूरी श्रद्धालु आस्था और भक्ति के साथ तय किया.
इस दौरान कांवरियों के जयकारों से पूरा क्षेत्र ‘हर हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के उद्घोष से गूंज उठी. कठिन डगर पर दंडवत यात्रा करते हुए श्रद्धालु अपनी श्रद्धा, समर्पण और भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था का परिचय दिया. यात्रा को लेकर स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह देखने को मिला. सुखा नदी से शुरू होकर बड़े तालाब के शिव मंदिर तक यह दो किलोमीटर का सफर सिर्फ दूरी तय करने की यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या और भक्ति का एक अद्भुत संगम बनने जा रहा है. हर कदम पर भोलेनाथ का नाम… हर सांस में भक्ति का भाव… और हर जुबां पर एक ही जयकारा— हर हर महादेव! बोल बम.
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खोकसरा शिव मंदिर में ‘बोल बम’ के जयकारों की गूंज: ओडिशा के कालाहांडी से बड़ी संख्या में पहुंचे नाग बम श्रद्धालु
गरियाबंद/देवभोग : श्रावण सोमवार के पावन अवसर पर अंचल के प्रसिद्ध एवं प्राचीन खोकसरा शिव मंदिर में आस्था और भक्ति का भव्य जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरा मंदिर परिसर “बोल बम, हर-हर महादेव” और “जय शिव शंभू” के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर पड़ोसी राज्य सेमला ओडिशा के कालाहांडी जिले से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं नाग बम की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही.
कालाहांडी से खोकसरा तक की कठिन पैदल यात्रा
ओडिशा के कालाहांडी से पहुंचे नाग बम श्रद्धालुओं ने विभिन्न पवित्र नदियों से जल उठाकर मीलों लंबी पैदल यात्रा तय की। हाथ में कंवर, मन में अटूट भक्ति और जुबां पर बाबा भोलेनाथ का नाम लिए ये कांवरिया नंगे पांव खोकसरा शिव मंदिर पहुंचे। कड़ी धूप और शारीरिक थकान के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई। कांवड़ियों का मानना है कि भगवान शिव की सेवा और जलाभिषेक से जीवन के समस्त दुखों का निवारण होता है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.
नाग बमों का विशेष आकर्षण और अनुष्ठान
कालाहांडी से आए ‘नाग बम’ श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रांगण में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया। नाग बम परंपरा के तहत श्रद्धालुओं ने पारंपरिक परिधानों और विशेष धार्मिक नियमों का पालन करते हुए शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित किया। कई श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में दंडवत प्रणाम करते हुए अपनी यात्रा पूरी की। उनके इस कठिन संकल्प और अटूट श्रद्धा को देखकर स्थानीय ग्रामीण व अन्य दर्शनार्थी भावविभोर हो गए.
मंदिर समिति और ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत
ओडिशा से आए अतिथियों व कांवड़ियों के लिए खोकसरा मंदिर समिति और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे। सीमा पार कर पहुंचे नाग बम श्रद्धालुओं का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर और ‘बोल बम’ के जयकारों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया गया। मंदिर परिसर और यात्रा मार्ग में कांवरियों के विश्राम, स्वास्थ्य जांच, शीतल पेयजल और महाप्रसाद भंडारे की व्यवस्था की गई थी.
सुरक्षा व व्यवस्था के कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मंदिर के प्रवेश और निकास द्वार पर पुरुषों व महिलाओं के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई थीं, ताकि सभी भक्त सुगमता से जलाभिषेक कर सकें। शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ स्थानीय स्वयंसेवक भी निरंतर तैनात रहे.
अंचल में भक्तिमय वातावरण
खोकसरा शिव मंदिर में तड़के सुबह से शुरू हुआ जलाभिषेक का सिलसिला देर शाम तक अनवरत जारी रहा। मंदिर के चारों ओर बज रहे धार्मिक भजनों, धूप-अगरबत्ती की महक और कांवरियों की गूंज ने पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के इस अंतरराज्यीय सांस्कृतिक व धार्मिक संगम ने दोनों क्षेत्रों के बीच भ्रातृभाव और अटूट आस्था की मिसाल पेश की है.
सरनाबहाल शिव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, सावन के अंतिम सोमवार पर 'बम-बम भोले' से गूंजा अंचल
गरियाबंद/ सरनाबहाल : पवित्र सावन मास के चौथे और अंतिम सोमवार को गरियाबंद-मैनपुर क्षेत्र के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल सरनाबहाल शिव मंदिर में भक्ति का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। सावन के आखिरी सोमवार और विशेष संयोग के कारण सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। पूरा क्षेत्र 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से गुंजायमान रहा.
तड़के सुबह 4 बजे से खुलीं कपाट, लगी लंबी कतारें
सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर था। सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खुलते ही कांवरियों और स्थानीय भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की.
कांवरियों का आकर्षण और विशेष पूजा-अर्चना
इस अवसर पर विभिन्न नदी-घाटों से पवित्र जल लेकर पहुंचे कांवरियों के जत्थों ने माहौल को पूरी तरह शिवमय बना दिया। मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा सुबह बाबा भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार किया गया। दोपहर और शाम को हुई महाआरती में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। सावन के अंतिम सोमवार को लेकर मंदिर समिति द्वारा महाप्रसाद (भंडारा) की भी विशेष व्यवस्था की गई है.
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