देश के बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा!: एक बैंक खाते से 21 राज्यों में फैला नेटवर्क, 150 लोगों से 113 करोड़ रुपये की ठगी, आरोपी महेश गिरफ्तार, देवनारायण फरार
Major cyber fraud uncovered: Network spanning 21 states linked to a single bank account; ₹113 crore swindled from 150 people; accused Mahesh arrested, Devnarayan absconding.
सूरजपुर : देश के 21 राज्यों में 150 खाताधारकों से 113 करोड़ रुपये से ज्यादा की ऑनलाइन ठगी के मामले में सूरजपुर पुलिस की जांच अब एक कदम और आगे बढ़ गई है. साइबर ठगी की रकम जिस बैंक खाते में पहुंची थी. उसमें अब तक करीब 50 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन की पुष्टि हुई है. पुलिस इन रकमों को आगे जिन खातों में भेजा गया. उनकी जानकारी जुटाकर पूरे लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में लगी है. इस मामले में डीएन चक्रधारी एजुकेशन डेवलपमेंट एशोसिएशन के को-डायरेक्टर महेश कुमार चक्रधारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. जबकि उसका चचेरा भाई और संस्था का डायरेक्टर देवनारायण चक्रधारी फरार है.
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के समन्वय पोर्टल से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने स्टेट बैंक सूरजपुर में संचालित संस्था के संयुक्त खाते की जांच शुरू की थी. जांच में सामने आया कि जनवरी 2024 से जुलाई 2025 के बीच 21 राज्यों में दर्ज 150 शिकायतों में 113 करोड़ 32 लाख रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन का कनेक्शन इस खाते से सामने आया.
पुलिस के मुताबिक अब तक खाते से करीब 50 लाख रुपये का वास्तविक ट्रांजेक्शन सामने आया है. रकम किन-किन खातों में गई, उन खाताधारकों का साइबर ठगी से क्या संबंध है और रकम आगे कहां पहुंची. इसकी पड़ताल की जा रही है. बैंक से लेनदेन का विस्तृत विवरण भी लिया जा रहा है.
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में महेश चक्रधारी ने पुलिस को बताया कि संयुक्त खाता उसके चचेरे भाई देवनारायण ने खुलवाया था. उसका कहना है कि वह देवनारायण के यहां ऑपरेटर के रूप में काम करता था और उसे संस्था का को-डायरेक्टर बनाए जाने की भी जानकारी नहीं थी. उसने साइबर ठगी के लेनदेन से अनभिज्ञता जताई है. हालांकि पुलिस के लिए यह बयान इसलिए अहम है. क्योंकि महेश पूर्व में भी तीन बार साइबर ठगी के मामलों में म्यूल अकाउंट धारक के रूप में जेल जा चुका है. गिरफ्तारी से महज दो दिन पहले ही वह जेल से बाहर आया था. इसके बाद उसे इस मामले में गिरफ्तार किया गया.
2023 में हुआ था संस्था का पंजीयन
फरार देवनारायण चक्रधारी ने 25 मई 2023 को मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स, गुरुग्राम से संस्था का पंजीयन कराया था. इसके बाद सूरजपुर स्थित स्टेट बैंक में संस्था के नाम से संयुक्त खाता खोला गया. पुलिस अब संस्था के गठन, बैंक खाता खुलवाने, केवाईसी दस्तावेज, मोबाइल नंबर और खाते से जुड़े अन्य बैंकिंग विवरण की भी जांच कर रही है.।फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि सामान्य किसान परिवार से जुड़े बताए जा रहे दोनों आरोपितों के बैंक खाते में इतनी बड़ी साइबर ठगी की रकम का कनेक्शन कैसे पहुंचा.
देवनारायण की गिरफ्तारी पर टिकी जांच
पुलिस का मानना है कि फरार देवनारायण चक्रधारी की गिरफ्तारी इस पूरे मामले की अहम कड़ी साबित हो सकती है. उसके पकड़े जाने के बाद यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि वह किन लोगों के संपर्क में था, साइबर ठगी की रकम खाते तक कैसे पहुंचती थी और उसे आगे किन खातों में भेजा जाता था. सूरजपुर टीआइ अलरिक लकड़ा ने बताया कि फरार आरोपित की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं. बैंक से लेनदेन की और जानकारी निकाली जा रही है. आरोपितों के अन्य बैंक खातों की भी जानकारी जुटाई जा रही है. उन्होंने कहा कि देवनारायण की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क और आरोपितों की वास्तविक भूमिका का खुलासा होने की संभावना है. पुलिस अब मामले की जांच को एक बैंक खाते तक सीमित न रखते हुए उससे जुड़े पूरे नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही है.
इन राज्यो से ठगी की रकम का ट्रांजेक्शन
छत्तीसगढ़ समेत मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़िसा, पंजाब, राजस्थान तमिलनाडु उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तराखंड, तेलंगाना मेघालय, कर्नाटक, केरल, हरियाणा, गुजरात, दिल्ली, बिहार व जम्मू कश्मीर में दर्ज 150 शिकायतों में 113 करोड़ से ज्यादा की ऑनलाइन ठगी की जांच में उक्त खाते में रकम का ट्रांजेक्शन किए जाने की पुष्टि हुई थी. इस मामले में 22 फरवरी 2026 को कोतवाली सुरजपुर मे उक्त दोनों आरोपितों के खिलाफ बीएनएस की धारा 317 (4), 316 (2), 61 (2) (ए), 3 (5) के तहत जुर्म दर्ज किया था. गिरफ्तार आरोपित महेश चक्रधारी व फरार आरोपित देवनारायण चक्रधारी बांसा पारा गंगौटी गांव के रहने वाले है. देवनारायण अपनी पंजीकृत संस्था के बैंक खाते का उपयोग म्यूल एकाउंट के रूप में करता है. गिरफ्तार आरोपित फस्ट लेयर का आरोपित नजर आ रहा है.
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