एंटी करप्शन ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई, फसल बीमा की राशि दिलाने के बदले मांगी रिश्वत, किसानों से 10 हजार की रिश्वत लेते दो कृषि अधिकारी गिरफ्तार
Major crackdown by the Anti-Corruption Bureau: Two agriculture officials arrested for accepting a bribe of ₹10,000 from farmers in exchange for facilitating the release of crop insurance payouts.
कांकेर : किसानों को फसल बीमा की रकम दिलाने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उन्हीं पर इसके बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा है. छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बुधवार को कार्रवाई करते हुए दो ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को कथित तौर पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा. आरोपियों की पहचान प्रवीण चंद्राकर और सुंदर बछड़ के रूप में हुई है. दोनों पर किसानों को फसल बीमा की राशि दिलाने के एवज में पैसे मांगने का आरोप है. किसानों की शिकायत के बाद एसीबी ने योजना बनाकर यह कार्रवाई की.
बीमा राशि के लिए भटक रहे थे किसान..
मामला कांकेर जिले के आमाबेड़ा तहसील क्षेत्र का है. ग्राम पंचायत आलानार निवासी किसान सुनील कोमरा और सगाऊ कोमरा फसल बीमा की राशि लेने का प्रयास कर रहे थे. इसी दौरान दोनों ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर उनसे 20 हजार रुपये की मांग किए जाने का आरोप सामने आया.
किसानों का आरोप था कि फसल बीमा का लाभ दिलाने के बदले उनसे रिश्वत मांगी जा रही है. इससे परेशान होकर उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की जांच की और आरोपों के आधार पर कार्रवाई की प्लान बनाई.
शिकायत के बाद एसीबी ने बिछाया जाल..
शिकायत की जांच के बाद एसीबी की टीम ने आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया. तय प्लान के मुताबिक बुधवार 14 अक्टूबर को किसान 20 हजार रुपये लेकर संबंधित अधिकारियों के पास पहुंचे. इसी दौरान एसीबी की टीम ने कार्रवाई करते हुए ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी प्रवीण चंद्राकर और सुंदर बछड़ को रिश्वत लेते पकड़ लिया.
कार्रवाई के बाद दोनों अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है. हालांकि रिश्वत मांगने से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा.
किसानों को राहत देने वाली योजना पर सवाल..
फसल बीमा योजना का मकसद प्राकृतिक आपदा और योजना में अधिसूचित अन्य परिस्थितियों के कारण फसल को नुकसान होने पर पात्र किसानों को आर्थिक राहत देना है. खेती में नुकसान उठाने वाले किसानों के लिए बीमा की रकम अगली फसल की तैयारी और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मददगार होती है.
ऐसे में बीमा राशि से संबंधित काम के बदले रिश्वत मांगने का आरोप सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और किसानों को मिलने वाली सेवाओं पर सवाल खड़े करता है. किसानों को यदि योजना का लाभ पाने के लिए अतिरिक्त रकम देने की मजबूरी का सामना करना पड़े. तो इसका सीधा असर उन पर पड़ता है. जो पहले से ही खेती की लागत और फसल के नुकसान जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं.
शिकायत से सामने आया मामला..
आमाबेड़ा क्षेत्र के इस मामले में किसानों की शिकायत के बाद एसीबी की कार्रवाई हुई. यह घटना बताती है कि सरकारी कामकाज में कथित अनियमितता की शिकायत संबंधित एजेंसी तक पहुंचने पर जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे.
फिलहाल, प्रवीण चंद्राकर और सुंदर बछड़ पर रिश्वत लेने के आरोप हैं. मामले में उनकी कानूनी स्थिति और आगे की कार्रवाई के बारे में आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए.
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