कांग्रेस विधायक के दरबार में नतमस्तक हुए मंत्री रामविचार नेताम!, अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को दुत्कारा, करोड़ों लुटाने पर संगठन में मचा हाहाकार

Minister Ramvichar Netam bows before a Congress MLA! He rebukes his own party workers, while his lavish spending of crores sparks an uproar within the organization.

कांग्रेस विधायक के दरबार में नतमस्तक हुए मंत्री रामविचार नेताम!, अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को दुत्कारा, करोड़ों लुटाने पर संगठन में मचा हाहाकार

रायपुर : सत्ता जब सिर चढ़कर बोलती है. तो अपने और पराए का फर्क मिट जाता है. कम से कम छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम के हालिया राजनांदगांव दौरे को देखकर तो यही लगता है. सवाल यह है कि जो मंत्री अपनी ही पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं से दो मिनट बात करने का समय नहीं निकाल पाते हैं. उनके पास कांग्रेसी विधायक के फार्म हाउस पर घंटों दावत उड़ाने का वक्त कहां से आ गया?
डोंगरगांव विधायक दलेश्वर साहू के आलीवारा स्थित आलीशान फार्म हाउस पर मंत्री जी का यह गुपचुप प्रवास किसी राजनीतिक भूल से ज्यादा सत्ता और विपक्ष की एक सोची-समझी गलबहियां लग रही है. बिना किसी पूर्व सूचना, बिना किसी जिला संगठन को बताए और बिना प्रोटोकॉल के मंत्री जी सीधे विपक्षी खेमे में जा पहुंचे. वहां न सिर्फ शाही भोजन का आनंद लिया. बल्कि कृषि उपकरण के नाम पर ढाई करोड़ और पॉली हाउस के लिए एक करोड़ रुपए ‘खैरात’ में बांट दिए. क्या सरकारी खजाना अब विपक्षी याराने निभाने का साधन मात्र बन गया है?
मंत्री का असली चेहरा तब बेनकाब हुआ. जब वे चिद्दो ग्राम पहुंचे. वहां कड़कड़ाती धूप में अपने नेता का इंतजार कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने जब अपनी जायज मांगों का ज्ञापन देना चाहा. तो मंत्री जी ने उन्हें सरेआम दुत्कार दिया. “हटाओ, आवेदन नही लेता, जाकर टमाटर देखो,” यह अहंकार भरे शब्द किसी कद्दावर नेता के नहीं, बल्कि सत्ता के नशे में चूर दिशाहीन मंत्री के ही हो सकते हैं.
जो हाथ कार्यकर्ताओं के आवेदन लेने से कतरा रहे थे. वे ही हाथ कांग्रेसी विधायक के घर करोड़ों की सौगात लुटाते वक्त नहीं कांपे. जिन्होंने पार्टी को खून-पसीने से सींचकर सत्ता के शिखर तक पहुंचाया. आज उन्हीं की अनदेखी की जा रही है. लेकिन मंत्री यह भूल गए कि मजबूत संगठन हमेशा व्यक्ति से बड़ा होता है. पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दिनेश गांधी ने इसे हर दृष्टिकोण से अनुचित बताते हुए साफ कर दिया है कि यह अपमान कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. न्यायसंगत संगठन ने अब इस बेलगाम रवैये की शिकायत शीर्ष नेतृत्व से करने का बिगुल फूंक कर बता दिया है कि पार्टी में कार्यकर्ता सर्वोपरि है, कोई भटका हुआ मंत्री नहीं.
विधायक दलेश्वर साहू भले ही इसे विधानसभा में किए गए वादे का लिबास पहनाएं. लेकिन पर्दे के पीछे की यह ‘राजनीतिक फिक्सिंग’ और गुपचुप दावतें कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं. क्या जनादेश इसलिए मिला था कि सत्ता पक्ष और विपक्ष मिलकर मलाई खाएं?
लोकतंत्र में सत्ता किसी की बपौती या जागीर नहीं होती. यह जनता की अमानत है. जिसे पूरी ईमानदारी से निभाया जाना चाहिए. किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता ही सुशासन की असली आत्मा होती है. बंद कमरों की सियासत और बिना प्रोटोकॉल के होने वाले ऐसे दौरे इस पारदर्शी व्यवस्था पर करारा तमाचा हैं. जब पारदर्शिता खत्म होती है, तो व्यवस्था में केवल नेताओं का अहंकार ही गूंजता है. समय आ गया है कि इस तरह के आचरण पर लगाम लगाई जाए. वरना जनता और संगठन का यह आक्रोश किसी भी मंत्री के राजनीतिक पतन की वजह बन सकता है.
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