अब रायपुर में पेपर लीक, परीक्षा रद्द, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच, टंकराम वर्मा के इस्तीफे की उठी मांग, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं- अरुण वोरा

Now, a paper leak in Raipur has led to the cancellation of the exam; a five-member committee will investigate the matter. Demands for Tankram Verma's resignation have been raised, with Arun Vora stating that playing with students' futures will not be tolerated.

अब रायपुर में पेपर लीक, परीक्षा रद्द, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच, टंकराम वर्मा के इस्तीफे की उठी मांग, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं- अरुण वोरा

रायपुर : नीट पेपर लीक होने के बाद केंद्र सरकार पेपर लीक को रोकने के लिए तमाम दावे कर रही है. लेकिन दूसरी तरफ़ लगातार पेपर लीक की देश भर से खबरें सामने आ रही है. अब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से पेपर लीक की खबर सामने आई है. एग्जाम से पहले ही सोशल मीडिया पर पेपर वायरल होने लगा. मामले को लेकर छात्रों ने विरोध करते हुए विश्व विद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है,
मिली जानकारी के मुताबिक इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में एंटोमोलॉजी का सेमेस्टर एग्जाम होना था. परीक्षा 10 बजे से आयोजित की गई थी. लेकिन सुबह 8 बजे ही सोशल मीडिया पर सेमेस्टर एग्जाम का पेपर वायरल होने लगा. पेपर लीक होने की बात सामने आने के बाद छात्रों में भारी आक्रोश देखने को मिला.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत के बाद संबंधित परीक्षा रद्द कर दी है और पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है. समिति को एक हफ्ते के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.
अब इस विषय की परीक्षा नए सिरे से आयोजित की जाएगी. इसके लिए नई तारीख विश्वविद्यालय की तरफ से बाद में जारी की जाएगी. परीक्षा रद्द होने के बाद विद्यार्थियों के बीच नई परीक्षा तिथि को लेकर इंतजार है. वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाहर कैसे पहुंचा और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
पूर्व विधायक अरुण वोरा ने कहा कि अगर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुआ है तो यह सिर्फ परीक्षा व्यवस्था की विफलता नहीं बल्कि मेहनत करने वाले हजारों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है.
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस पूरे मामले की *निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच* कराए और यह पता लगाए कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर कैसे पहुंचा. दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति, अधिकारी या किसी भी जिम्मेदार तंत्र के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए.
वोरा ने कहा कि विद्यार्थियों ने पूरे साल मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई की है. किसी भी लापरवाही या भ्रष्टाचार की कीमत छात्रों को नहीं चुकानी चाहिए. अगर पेपर लीक की पुष्टि होती है तो छात्रों के हित में परीक्षा को लेकर उचित फैसला लिया जाए और किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय न हो.
उन्होंने मामले पर नाराजगी जताते हुए शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा के इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में पेपर लीक होना सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है. एक तरफ सरकार पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और व्यवस्था की बात करती है. वहीं दूसरी तरफ इस तरह की घटनाएं सामने आना पूरी परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है.
वोरा ने सरकार से सवाल किया है कि आखिर पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक कब लगेगी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कितनी सख्त कार्रवाई होगी? NEET विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था को लेकर देश में बड़ी बहस छिड़ी थी. अब छत्तीसगढ़ में सामने आए पेपर लीक के मामले ने इस बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है.
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सियासी सवाल यही है- क्या पेपर लीक की जिम्मेदारी तय करते हुए शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा को इस्तीफा देना चाहिए? अरुण वोरा की इस मांग के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में इस मुद्दे के और गरमाने के आसार हैं.
आप को बता दें कि छत्तीसगढ़ में पेपर लीक का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले 12वीं बोर्ड का हिंदी पेपर लीक होने के दावे पर जमकर बवाल मचा था. 14 मार्च 2026 को 12वीं की हिंदी की परीक्षा थी,जो सफलतापूर्वक संपन्न हो गई थी. लेकिन 15 मार्च को सोशल मीडिया पर छात्र संगठनों ने पेपर लीक होने की जानकारी दी थी. मामले में माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव ने सिविल लाइन्स और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. सब मिलाकर ये कहा जा सकता है कि जब तक देश की सरकारें छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं होंगी. तब तक देश में कहीं ना कहीं से ऐसी खबरें देखने सुनने को मिलती रहेगी.
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