फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के सहारे हथियाया ग्राम रोजगार सहायक का पद!, फिर दिया इस्तीफा, अब मारी राजनीति में एंट्री, उपसरपंच ने जांच के लिए खोला मोर्चा
Secured the post of Village Employment Assistant using a fake disability certificate, then resigned, and has now entered politics; the Deputy Sarpanch has launched a campaign seeking an investigation.
गरियाबंद : कहते हैं कि सरकारी नौकरी पाने के लिए लोग दिन-रात मेहनत करते हैं. लेकिन अगर आरोपों पर यकीन करें तो ग्राम पंचायत मुड़ागांव में मामला कुछ अलग ही नजर आता है. यहां आरोप है कि पहले दिव्यांग प्रमाण पत्र बना. फिर सरकारी नौकरी मिली. उसके बाद सालों तक नौकरी भी चली. फिर इस्तीफा देकर राजनीति में एंट्री हुई और अब पूरा मामला जांच की चौखट पर पहुंच गया है.
देवभोग विकासखंड के ग्राम पंचायत मुड़ागांव के उपसरपंच खिरसिंधु नागेश ने पूर्व ग्राम रोजगार सहायक उधोराम नागेश के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है. शिकायत में दावा किया गया है कि वर्ष 2007 में कथित रूप से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर ग्राम रोजगार सहायक की नौकरी हासिल की गई. उपसरपंच ने इस बारे में दस्तावेज भी सार्वजनिक करने का दावा किया है.
नौकरी के लिए बने दिव्यांग नौकरी के दौरान लाखों के भ्रष्टाचार के आरोप
शिकायत के मुताबिक नौकरी के दौरान मनरेगा कार्यों में लाखों रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे. बाद में पूर्व रोजगार सहायक ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और राजनीति में सक्रिय हो गए. जनपद पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ा और अध्यक्ष बनने का सपना देखा. लेकिन मतदाताओं ने उन्हें पसंद नहीं किया. अब आरोप है कि नौकरी छोड़ने के बाद भी वे ठेकेदारी के जरिए पंचायत के कार्यों में दखल दे रहे हैं.
नौकरी के लिए बने दिव्यांग सवालों के घेरे में दिव्यांग प्रमाण पत्र
पूरा विवाद कथित दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर है. शिकायतकर्ता का कहना है कि अगर संबंधित व्यक्ति वास्तव में दिव्यांग नहीं था तो प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ? अगर प्रमाण पत्र सही था तो उसकी जांच कभी क्यों नहीं हुई? और अगर प्रमाण पत्र गलत था तो इसे जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और चिकित्सकों की भूमिका क्या रही?
यही वे सवाल हैं जिनका जवाब अब प्रशासनिक जांच से ही सामने आ सकता है. फिलहाल शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ है और किसी भी तरह की दिव्यांगता दिखाई नहीं देती है. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है.
उपसरपंच ने मांगी निष्पक्ष जांच
उपसरपंच खिरसिंधु नागेश ने कलेक्टर औ मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि अगर फर्जी दस्तावेज के आधार पर सरकारी नौकरी ली गई है. तो यह शासन और वास्तविक पात्र दिव्यांग अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है.
अब कलेक्टर से गुहार दूध का दूध और पानी का पानी करे
अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकारी नौकरी सिर्फ प्रमाण पत्र से मिलती है या पात्रता से? और अगर नौकरी के समय दिव्यांगता जरूरी थी तो राजनीति में उतरते ही वह दिव्यांगता आखिर कहां चली गई? यह सवाल फिलहाल जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.
हालांकि यह साफ़ करना जरुरी है कि ये सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं. और इसकी शिकायत कलेक्टर को सौंपी गई है. इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है.
जिला पंचायत सीईओ बोले जांच दल गठित
इस पूरे मामले को लेकर गरियाबंद जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर बोले मामले की शिकायत मिली है इसके लिए जांच दल गठित कर दिया गया है. जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर जल्द से जल्द कार्यवाही की जाएगी.
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