बोल कालिया के जयघोष से गूंज उठा अमलीपदर और देवभोग क्षेत्र, उमड़ा आस्था का जनसैलाब, मंत्री गुरू खुशवंत साहेब ने प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना

The Amlipadar and Devbhog regions resounded with chants of "Bol Kaliya"; a massive crowd of devotees gathered, and Minister Guru Khushwant Saheb prayed for happiness, peace, and prosperity across the state.

बोल कालिया के जयघोष से गूंज उठा अमलीपदर और देवभोग क्षेत्र, उमड़ा आस्था का जनसैलाब, मंत्री गुरू खुशवंत साहेब ने प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना

गरियाबंद/देवभोग-अमलीपदर : गरियाबंद जिले के देवभोग और अमलीपदर में आज शुक्रवार को बाहुड़ा यात्रा महापर्व को गहरी आस्था, वैदिक परंपरा और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ. मौसी के घर नौ दिन प्रवास के बाद भगवान श्री जगन्नाथ भव्य रूप से सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर अपने निज मंदिर लौटे. जैसे ही रथ नगर के प्रमुख मार्गों से आगे बढ़ा पूरा देवभोग एवं अमलीपदर क्षेत्र जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंज उठा. हजारों श्रद्धालुओं ने प्रभु के रथ की रस्सियां खींचकर स्वयं को इस दिव्य यात्रा का सहभागी बनाया.
इस मौके पर शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब पहुंचे तो उनका आत्मीयता के साथ आचार्य पंडित युवराज पाण्डेय द्वारा स्वागत किया गया. मंत्री खुशवंत साहेब के साथ राजिम विधायक रोहित साहू, विधायक अनुज शर्मा, बिन्द्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव एवं जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप भी भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना कर क्षेत्र प्रदेश मे सुख शांति समृद्धि की कामना की. इस दौरान मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा भगवान श्री जगन्नाथ रथयात्रा भारत की संस्कृति परंपरा समाजिक समरसता और लोककल्याण की भावना का प्रतीक है. अमलीपदर में रथयात्रा महोत्सव कार्यक्रम मे शामिल होने का अवसर मिला. इस मौके पर प्रमख रूप से अमलीपदर के सरपंच हेमोबाई नागेश, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव, महामंत्री गेंदु यादव, कृष्णकुमार त्रिपाठी, सौरभ सिन्हा, तुषार, भोजलाल साहू, मुकेश साहू, बंशी साहू, सेवन पुजारी, ललिता यादव व क्षेत्रभर से हजारो की संख्या मे जनप्रतिनिधि श्रद्धालु उपस्थित थे.
नगर सहित दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की. रथयात्रा के दौरान पूरा नगर धार्मिक रंग में रंगा नजर आया. महिलाओं,पुरुषों, युवाओं और बच्चों सहित सभी वर्गों के लोग भक्ति भाव से यात्रा में शामिल हुए. भजन-कीर्तन, शंखनाद और घंटियों की मधुर ध्वनि ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया. श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखते ही बन रही थी.
एकल विग्रह की अनूठी परंपरा, देवभोग मंदिर की विशेष पहचान
देवभोग का प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपरा के कारण पूरे क्षेत्र में अलग पहचान रखता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल भगवान श्री जगन्नाथ का एकल विग्रह विराजमान है. देश के अधिकांश जगन्नाथ मंदिरों में भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा के साथ भगवान जगन्नाथ की पूजा होती है. लेकिन देवभोग का यह मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के कारण श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है. मंदिर की पूजा-अर्चना और परंपराओं का निर्वहन वर्षों से टेमरा के बेहेरा परिवार द्वारा किया जा रहा है. जय जगन्नाथ सेवा समिति के सहयोग से प्रतिवर्ष रथयात्रा और बाहुड़ा यात्रा का आयोजन वैदिक विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया जाता है.
भक्ति,परंपरा और सामाजिक समरसता का बना अनुपम संगम
बाहुड़ा यात्रा के दौरान सुबह से ही मंदिर और रथ मार्ग पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. भगवान के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं. श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य महसूस किया. धार्मिक मान्यता है कि बाहुड़ा यात्रा में भगवान जगन्नाथ के दर्शन तथा रथ खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख,समृद्धि एवं मंगल का आगमन होता है. मंदिर पहुंचने के बाद भगवान श्री जगन्नाथ का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना एवं महाआरती की गई. जय जगन्नाथ सेवा समिति ने पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संभाला. सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक परंपराओं के पालन का विशेष ध्यान रखा गया. देवभोग की बाहुड़ा यात्रा एक बार फिर केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और जनआस्था का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई.
अमलीपदर बोल कालिया के जयकारों से गूंज उठा
आज रथयात्रा महोत्सव के बाहुड़ा जात्रा पर अमलीपदर मे हजारो की भीड़ उमड़ी छत्तीसगढ़ सहित ओड़िशा प्रदेश से श्रद्धालु यहां पहुंचे भगवान जगन्नाथ महाप्रभु गुंड़िचा मंदिर से पुनः मुख्य मंदिर के लिए प्रस्थान किये इस दौरान पूरा क्षेत्र बोल कालिया के जयकारो से गूंज उठा.
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