चलती ट्रेन से तेंदुए ने युवक को खींचा!, दरवाजे से नीचे गिरा दिया!, AI का अब तक का सबसे खतरनाक वीडियो, सोशल मीडिया पर जमकर वायरल

A leopard pulls a young man from a moving train and throws him through the door, the most dangerous AI video ever, and it goes viral on social media.

चलती ट्रेन से तेंदुए ने युवक को खींचा!, दरवाजे से नीचे गिरा दिया!, AI का अब तक का सबसे खतरनाक वीडियो, सोशल मीडिया पर जमकर वायरल


28 दिसंबर 2025 को एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है. जिसमें दिखता है कि जंगल के बीच से गुजर रही चलती ट्रेन के खुले दरवाजे पर खड़े एक युवक पर अचानक तेंदुआ कूद पड़ता है. तेंदुआ युवक को पकड़ने की पूरी कोशिश करता है और युवक बाल-बाल बचता है. यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. वीडियो में हड़कंप मच जाता है. लोग चिल्लाते हैं, और कैप्शन कुछ ऐसा है-
“अगर आप ट्रेन का सफर कर रहे हैं तो, दरवाजे पर खड़े ना रहे और दरवाज़े बंद रखे… क्योंकि तेंदुए ने ट्रेन पर हमला किया!”
वीडियो देखने वाले लोग दंग रह गए –
कुछ ने लिखा: “इस चीते ने तो बड़ी हिम्मत दिखाई, फुल कोशिश में लगा है पकड़ने के लिए!”
“जंगल वाले रुट पर विशेष सावधानी रखें, नहीं तो दुर्घटना पक्की!”
“सावधानी बरतनी चाहिए वरना कुछ भी हो सकता है!”
लेकिन लोग कभी भी किसी भी घटना से सीख नहीं लेते हैं. ट्रेन के दरवाजे पर नहीं खड़ा होना चाहिए। सब जगह लिखा भी होता है. लेकिन लोग है कि मानते नहीं, हालांकि यह वीडियो AI से बना हुआ है.
लेकिन अब ट्विस्ट सुनिए…
जांच करने पर पता चला कि ये वीडियो AI-जनरेटेड या डिजिटली मैनिपुलेटेड है.
तेंदुए की मूवमेंट्स में कई जगह अनैचुरल लगती हैं (टेल गायब हो जाती है, बॉडी वार्प्ड दिखती है)
इस मामले की कोई आधिकारिक न्यूज़, रेलवे या फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट नहीं मिली है. दिसंबर 2025 में ऐसी कोई रियल घटना रिपोर्ट नहीं हुई (ज्यादातर तेंदुआ हमले गांवों, सफारी बस या बाइक पर होते हैं)
सच्चाई ये है कि AI अब इतना एडवांस हो गया है कि लोग सच-झूठ में फंस जाते हैं. लेकिन हां यह वीडियो उन लोगों को सचेत करता है जो लापरवाही से ट्रेन के पर या खिड़कियों पर लापरवाह हो जाते हैं. यह जरुरी नहीं कि घटना सिर्फ जानवर के हमले से ही हो. यह घटना मोबाइल छीना झपटी या पर्स लूटने की भी हो सकती है. या फिर चलती ट्रेन पत्थरबाजी की भी हो सकती है.
बता दें कि ट्रेन में सफर करते वक्त दरवाजे बंद रखना और लटकना नहीं तो सही सलाह है. लेकिन ये वाला “हमला” बस एक मजेदार AI क्रिएशन है.
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आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है. पिछले कुछ समय से टेक फील्ड में मेटा एआई, जेमिनी, चैट-जीपीटी जैसे कई सारे AI टूल्स आ गए हैं. लोग अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए AI को वर्चुअल दोस्त बना रहे हैं. यह बिल्कुल आम इंसान की तरह आपके साथ बातें भी कर रहा है. लेकिन कहीं न कहीं यह वर्चुअल दोस्त सेहत पर असर डाल रहा है.
लोग धीरे-धीरे AI का आदी हो रहे हैं. हाल फिलहाल में बलरामपुर अस्पताल, सिविल अस्पताल और केजीएमयू के मनोरोग विभाग में बहुत से ऐसे मरीज पहुंचे जो AI से चैट कर रहे थे. उनसे बातचीत करने के आदी हो चुके थे. परिवार के लोगों को जब शक हुआ कि व्यक्ति किसी और से बात कर रहा है, तो पता चला कि वह किसी इंसान से नहीं, बल्कि AI से चैटिंग कर रहा है, जो एक मशीन है.
सिविल अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. दीप्ति सिंह ने कहा कि यह सच बात है कि इस तरह के मामले अब आ रहे हैं. पहले न ऐसी टेक्नोलॉजी थी और न इस तरीके के मामले आते थे, लेकिन अब टेक्नोलॉजी का दुष्प्रभाव बहुत हो रहा है. लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट पर चैटिंग कर रहे हैं. एक आम इंसान को ऐसा महसूस होता है कि जिससे वह चैटिंग कर रहा है वह भी कोई इंसान है. उसके अंदर भी वैसे ही फीलिंग है. जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. वह एक मशीन है एक टेक्नोलॉजी है.
क्या है AI का Text to video Feature
पहले आप वीडियो बनाने का एक मोटा-मोटी प्रोसेस समझ लीजिए. वीडियो बनाने के लिए पहले आपको स्क्रिप्ट लिखनी पड़ती है. उस स्क्रिप्ट को शूट करना पड़ता है. शूट करने के बाद उस वीडियो के लिए फुटेज निकालने पड़ते हैं. उसके बाद वो वीडियो जाता है एडिटिंग के लिए. इसके बाद वीडियो पूरी तरह तैयार होता है. AI का टेक्स्ट टू वीडियो फीचर अगर आ गया तो आपको केवल स्क्रिप्ट लिख देनी होगी. स्क्रिप्ट भी AI की मदद से लिखे जा सकते हैं. स्क्रिप्ट लिखने के बाद उसे AI सिस्टम में फीड करना होगा और AI उस स्क्रिप्ट के हिसाब से वीडियो बनाकर दे देगा
कैसे नुकसानदेह हो सकती है AI की यह दोस्ती?
सामाजिक विकास में बाधा- बच्चे सोशल स्किल्स लोगों के संपर्क में आकर सीखते हैं. बात करते समय आई कॉन्टेक्ट बनाना, भावनाओं को समझना, सहानुभूति दिखाना और मुश्किल सामाजिक परिस्थितियों को नेविगेट करना. AI एक प्रोग्राम है, जो पहले से तय जवाब देता है. इसके साथ लगातार बातचीत करने से बच्चों के सामाजिक विकास में रुकावट आ सकती है. उन्हें असली दोस्त बनाने और रिश्ते निभाने में परेशानी हो सकती है.
डाटा प्राइरेसी का खतरा- बच्चे अक्सर समझ नहीं पाते कि उनकी पर्सनल इन्फॉर्मेशन कितनी मूल्यवान है. वे AI के सामने अपने परिवार, दोस्तों, स्कूल या पर्सनल पसंद-नापसंद के बारे में अनजाने में कह सकते हैं. यह डाटा कंपनियां इकट्ठा कर सकती हैं और भविष्य में टार्गेटेड एडवर्टाइजिंग या और भी गंभीर चीजों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
गलत सूचना- AI डाटा से ट्रेन होने वाला एक मॉडल है. जिसके सभी जवाब सही हो. जरूरी नहीं.. ऐसे में बच्चे कई बार अपने मन की उलझन या स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी पाने के लिए AI से बात कर सकते हैं. ऐसे में संभावना है कि AI का दिया जवाब गलत हो.. इससे बच्चा खुद को नुकसान पहुंचा सकता है या गलत कदम उठा सकता है.
इमोशनल डिपेंडेंसी- AI चैटबॉट्स से बात करते वक्त हमेशा ऐसा लगता है. जैसे वे आपके लिए हमेशा मौजूद हैं और आपकी बातों को समझते हैं. यह विशेषता एक ऐसा इमोशनल सपोर्ट बन सकती है. जो इंसानों के रिश्तों से कहीं ज्यादा आकर्षक लगे. बच्चा असली दुनिया की परेशानियों से भागकर AI की वर्जुअल दुनिया का सहारा ले सकता है. जो डिप्रेशन और आइसोलेशन का कारण बन सकता है.
क्रिएटिविटी पर असर- AI तस्वीरें बना सकता है. कहानियां लिख सकता है और समस्याएं हल कर सकता है. अगर बच्चा हर सवाल का जवाब या हर समस्या का हल AI से मांगने लगे तो उसकी खुद की सोचने, कल्पना करने और क्रिएटिविटी दिखाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
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किन सावधानियों का ध्यान रखना जरुरी है?
गाइड बनें- बच्चों को AI के इस्तेमाल से रोकने के बजाय, उनके साथ बैठें और इस तकनीक के बारे में समझाएं. उन्हें बताएं कि AI एक मशीन है. एक इंसान नहीं. यह कैसे काम करता है और इसकी सीमाएं क्या हैं.
पर्सनल बाउंड्री तय करें- बच्चों को साफ-साफ समझाएं कि वे AI के सामने अपना नाम, पता, स्कूल का नाम, फोन नंबर या परिवार के बारे में कोई निजी जानकारी साझा न करें. उन्हें डिजिटल फुटप्रिंट का महत्व बताएं.
असल दुनिया को प्राथमिकता दें- बच्चों को उनके दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने, बाहर खेलने और फिजिकल एक्टिविटीज में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें. AI को एंटरटेनमेंट का एक विकल्प बनाए रखें, जीवन का आधार नहीं.
क्रिटिकल थिंकिंग विकसित करें- बच्चों को सिखाएं कि AI की दी गई हर जानकारी सही नहीं होती. उन्हें सवाल पूछने, जानकारी को दूसरे सोर्स से वेरिफाई करने और रिजनिंग करने के लिए मोटिवेट करें.
नजर रखें- बच्चे किस AI टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं और उससे क्या बातचीत कर रहे हैं. इस पर नजर रखें। पेरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल करें.
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