बंद कमरे में विकास की योजना या भ्रष्टाचार की ‘सेटिंग’? मैनपुर जनपद पंचायत में भारी हंगामा!, 33 में से सिर्फ 7 अधिकारी मौजूद, बाकी नदारद
Closed-door development plans or corrupt "set-ups"? Huge uproar erupts at the Mainpur District Panchayat! Only seven of the 33 officers are present, the rest absent.
गरियाबंद : मैनपुर पत्रकार जनता की आंख और कान होते हैं. जो जनता नहीं देख पाती, वो पत्रकार देखता है और जो जनता नहीं सुन पाती, वो पत्रकार सुनता है. लेकिन जब जनहित की चर्चाएं बंद कमरों में होने लगें। तो दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली नजर आती है. सवाल यह है कि आखिर मैनपुर जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में ऐसा क्या हो रहा था जिसे जनता और मीडिया से छिपाया जा रहा था? क्या वहां ब्लॉक के विकास की रूपरेखा तय हो रही थी या फिर सरकारी योजनाओं में ‘घालमेल’ और ‘गोटी मारने’ की कोई सीक्रेट डील चल रही थी?
मैनपुर जनपद पंचायत की इस सामान्य सभा में कुल 33 विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी जरुरी थी. लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि सिर्फ 7 विभागों के अधिकारी ही वहां पहुंचे. बाकी 26 विभागों के जिम्मेदार नदारद रहे. यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ दर्शाता है कि प्रशासन ब्लॉक के विकास को लेकर कितना गंभीर है.
बैठक के दौरान भारी गहमागहमी और तीखी नोकझोंक देखने को मिली। जनपद सदस्यों ने कई योजनाओं में हो रही अनियमितताओं को लेकर जमकर आवाज उठाई. सबसे प्रमुख मुद्दा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के पदों पर हो रही नियुक्तियों का रहा. जिस पर सदस्यों ने अधिकारियों को आड़े हाथों लिया और पारदर्शिता की कमी पर सवाल खड़े किए.
जनपद क्षेत्र क्रमांक 17 के सदस्य योगीराज माखन कश्यप ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सख्त ऐतराज जताया. उन्होंने सीधे कलेक्टर से अपील करते हुए गैरहाजिर अधिकारियों को ‘कारण बताओ‘ लिखित नोटिस जारी करने की मांग की.
माखन कश्यप ने बताया कि पिछले महीने भी आम सभा की बैठक नहीं हो पाई थी. और इसके बावजूद इस बार भी अधिकारी नदारद रहे. वहीं, जनपद क्षेत्र क्रमांक 11 के सदस्य परमेश्वर जैन ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी बातें कड़ाई से दर्ज कराईं.
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला रवैया जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) डी.एस. नागवंशी का रहा.बताया जा रहा है कि सीईओ के निर्देश पर ही सामान्य सभा का दरवाजा अंदर से बंद करवाया गया था. बैठक खत्म होने के बाद जब मीडिया ने उनसे जनहित के मुद्दों पर बात करनी चाही. तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया और दफ्तर से बाहर निकल गए.
पंचायती राज व्यवस्था में ब्लॉक स्तर पर विकास कार्यों के निष्पादन, निगरानी और समन्वय,समीक्षा की अहम जिम्मेदारी जनपद CEO की होती है. लेकिन एक प्रशासनिक अधिकारी की ऐसी रहस्यमयी और गैर-जिम्मेदाराना गतिविधियां ब्लॉक के विकास कार्यों में सीधे तौर पर अवरोध पैदा कर रही हैं. बंद कमरे की यह बैठक अब पूरे क्षेत्र में चर्चा और भारी संदेह का विषय बन गई है.
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