मृत व्यक्तियों और अपात्रों को पीएम आवास, जनपद के 5 कर्मचारी बर्खास्त, सचिव समेत 6 के खिलाफ FIR दर्ज, जांच जारी, सरपंच को बचाने का आरोप

Deceased and ineligible individuals allotted PM Awas homes; 5 district employees dismissed, FIRs registered against 6 (including a Panchayat Secretary), and investigation underway; allegations of shielding the Sarpanch.

मृत व्यक्तियों और अपात्रों को पीएम आवास, जनपद के 5 कर्मचारी बर्खास्त, सचिव समेत 6 के खिलाफ FIR दर्ज, जांच जारी, सरपंच को बचाने का आरोप

कोरबा : सांसद आदर्श ग्राम तिलकेजा में मृतकों और अपात्रों को पीएम आवास स्वीकृत करने और पहली किश्त की राशि का गबन करने के मामले में 6 कर्मचारियों की सेवाएं खत्म कर दी गई हैं. वहीं इस मामले में उरगा पुलिस थाने में सचिव समेत 6 दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दिया गया है. हालांकि इस मामले में सरपंच के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिलने की बात कही जा रही है. जबकि घोटाले में उसकी पूरी सहभागिता सामने आयी है.
इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता जितेन्द्र साहू की शिकायत पर जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन ने जांच के लिए जिला स्तरीय दल का गठन किया. इसके तहत प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के क्रियान्वयन से जुड़े कई अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की जांच की गई. कोरबा के पूर्व सांसद स्व डॉ बंशीलाल महतो द्वारा सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत ग्राम तिलकेजा का चयन किया गया था। यहां कई विकास कार्य भी कराये गए. मगर यहां पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों द्वारा जिस तरह का घोटाला किया गया उससे इस गांव की काफी बदनामी हुई है. तिलकेजा पंचायत में पूर्व में जिन ग्रामीणों को पीएम आवास के लिए अपात्र घोषित किया गया था. उनमें से 48 को ग्रामसभा की अगली बैठक में पात्र बताते हुए आवास स्वीकृत कर दिया गया.
मृतकों व्यक्तियों के नाम भी आवास
मजे की बात यह है कि कथित ग्रामसभा ने स्वर्गवासी हो चुके कई ग्रामीणों के नाम पर भी आवास स्वीकृत कर दिया। बाद में जब मामला परवान चढ़ा और जांच हुई तब 48 में से सिर्फ 4 ग्रामीण ही आवास के लिए पात्र पाए गए. अपात्रों में से करीब 11 तो सालों पहले मृत हो चुके हैं.
हितग्राहियों को जानकारी नहीं
सबसे गंभीर बात यह है कि जिन अपात्र ग्रामीणों को आवास स्वीकृत किये गए उनमें से कई को इस बात की जानकारी ही नहीं थी. विशेष तौर पर जो हितग्राही मृतक हैं. उनके परिजनों को इस बात का पता ही नहीं था. फर्जीवाड़ा करने वालों ने चालाकी दिखाते हुए पीएम आवास की राशि के भुगतान के लिए हितग्राहियों की बजाय अन्य मिलते जुलते नाम वाले ग्रामीणों के खाते जुड़वा लिए. बाद में जब पहली किश्त की राशि आयी तब उसकी बंदर-बांट कर ली गई.
जांच में ये पाए गए दोषी
जांच प्रतिवेदन में पंचायत सचिव के साथ ही ब्लॉक समन्वयक आवास, तकनीकी सहायक, डाटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर ऑपरेटर और आवास मित्र की भूमिका पाए जाने का उल्लेख किया गया. इसके बाद संबंधितों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया. मिले जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर पांचों संविदा कर्मचारियों की सेवाएं खत्म करने की कार्रवाई की गई. इस मामले में ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। है. उसके खिलाफ विभागीय जांच संस्थित की गई है.
एफआईआर में क्या है शिकायत
मृत व्यक्तियों के नाम में पीएम आवास बांटने वाले कर्मचारियों को बर्खास्त करने के साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. जिला पंचायत कोरबा में जिला समन्वयक प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण (PMAY- G) आशीष कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराया है कि 14 फ़रवरी 2026 से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत ग्राम पंचायत तिलकेजा में 48 अपात्र हितग्राहियों का आवास, अन्य परिवार एवं मृतक के नाम पर किश्त की राशि जारी करने और राशि आहरण कर भ्रष्टाचार किया गया.
कार्यालय जिला पंचायत के पत्र का हवाला देते हुए आशीष कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत ग्राम पंचायत तिलकेजा में 48 अपात्र हितग्राहियों का आवास, अन्य परिवार एवं मृतक के नाम पर किश्त की राशि जारी करने व राशि आहरण कर भ्रष्टाचार किये जाने के संबंध में शिकायत मिली है.
जिसकी जांच के लिए गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर देवानंद श्रीवास (विकासखण्ड समन्वयक), अभिषेक चौरसिया (तकनीकी सहायक), ध्रुव कुमार साहू (डाटा एंट्री ऑपरेटर), धनंजय पटेल (कम्प्यूटर ऑपरेटर) जनपद पंचायत-कोरबा एवं सुश्री रामेश्वरी कँवर (आवास मित्र) व नमिता दुबे (पंचायत सचिव) के खिलाफ गलत मंशा से असंबंद्ध व्यक्तियों के खाते में रकम ट्रांसफर करने का आरोप सिद्ध पाया गया है, इन सबके खिलाफ जुर्म दर्ज करने के बाद मामले की जांच की जा रही है. इस घोटाले में करीब 16 लाख रुपयों का गबन पाया गया है.
बख्श दिया गया सरपंच को
ग्राम पंचायत तिलकेजा में हुए इस बड़े घोटाले महिला सरपंच तेरस कंवर और उसके पति की अहम भूमिका रही. मगर सरपंच के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है. स्वाभाविक है कि जांच प्रतिवेदन में ही उसे पाक साफ घोषित कर दिया गया. जबकि आरटीआई से निकाले गए दस्तावेज बताते हैं कि ग्रामसभा की 14 अप्रैल 2026 की कथित बैठक की कार्यवाही पंजी के हर पन्ने में बाकायदा सरपंच तेरस कंवर और सचिव नमिता दुबे के हस्ताक्षर और सील लगे हुए हैं. वैसे तो ग्राम सभा की कार्यवाही में पूरे ग्रामीण होते हैं और मनोनीत ग्रामसभा अध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करता है. मगर ग्रामसभा अध्यक्ष अनुसुईया कंवर ने मीडिया को बताया था कि संबंधित ग्रामसभा में वह उपस्थित ही नहीं थी और न ही पंजी में उसके हस्ताक्षर हैं. यह बात सच भी है, क्योंकि कार्यवाही पंजी में ग्रामसभा अध्यक्ष के हस्ताक्षर नजर नहीं आ रहे हैं.
जिला पंचायत सीईओ ने क्या कहा?
इस मामले में जिला पंचायत कोरबा के सीईओ आईएएस प्रतीक जैन ने बताया कि आवास स्वीकृति का कार्य ग्राम सभा के जिम्मे है और सरपंच की इसमें सीधे भूमिका नहीं होती। यही वजह है कि इस मामले में सपंच को दोषी नहीं पाया गया है. हालांकि जैन यह भी कबूल करते हैं कि पंचायत में किसी भी योजना का कार्य हो और वह जनप्रतिनिधि की जानकारी में न हो यह संभव नहीं होता। तिलकेजा में पीएम आवास में इतना बड़ा घोटाला हुआ. वह जन प्रतिनिधि के संज्ञान में जरूर होगा, मगर जांच में जो भी तथ्य सामने आए हैं. उसके मुताबिक कार्रवाई हुई है.
उठ रहे हैं कई सवाल
इस मामले में कार्यवाही को लेकर कई सवाल उठाये जा रहे हैं. पीएम आवास स्वीकृति के लिए हुई ग्रामसभा की कार्यवाही पंजी में सरपंच-सचिव दोनों के हस्ताक्षर हैं. मगर सिर्फ सचिव को दोषी ठहराया गया. सरपंच को क्यों नहीं? वहीं अगर आवास स्वीकृति में ग्रामसभा की भूमिका है तो उसके पदाधिकारियों को इस मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया है.
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