फर्जी यूपीआई पेमेंट मैसेज दिखाकर मेडिकल दुकान को दिया जोर का झटका, डिजिटल ठगी का आरोपी गिरफ्तार, जानिए कैसे बचें
Medical shop got a big blow by showing fake UPI payment message, accused of digital fraud arrested, know how to avoid it
बिलासपुर : मेडिकल दुकानों से ऑनलाइन पेमेंट के नाम पर फर्जी UPI मैसेज दिखाकर ठगी करने वाले एक युवक को सरकंडा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी ने 1700 रुपए का मेडिकल सामान फर्जी भुगतान दिखाकर लिया था. पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर फौरन कार्रवाई करते हुए आरोपी की पहचान की और मोबाइल समेत उसे गिरफ्तार कर लिया,
मिली जानकारी के मुताबिक राधिका विहार निवासी चन्द्रकांत साहू ने 1 जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराया कि एक अज्ञात युवक उसकी मेडिकल दुकान से वेट मशीन और शुगर स्ट्रीप खरीदने आया. युवक ने 1700 रुपए का सामान लेने के बाद मोबाइल पर फर्जी UPI भुगतान मैसेज दिखाया. चेक करने पर खाते में कोई राशि नहीं आई.
उनके साउंड बाक्स में पेमेंट का एनाउंस नहीं हुआ था. दुकान संचालक ने बैंक सर्वर डाउन होने की बात सोचकर उसे जाने दिया। रकम बड़ा होने की वजह से उन्होंने में स्टेटमेंट चेक किया. उनके एकाउंट में पेमेंट नहीं आया. तब उन्होंने अपने परिचित से बात की. इसमें पता चला कि कई दुकानों में इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं. व्यापारी ने इसकी शिकायत सरकंडा थाने में की.
इस रिपोर्ट पर थाना सरकंडा पुलिस ने धारा 318(4) बीएनएस व 66(डी) आईटी एक्ट के तहत जुर्म दर्ज किया, इस मामले में छानबीन अभियान चलाया. CCTV फुटेज की गहराई से जांच करने पर आरोपी की पहचान तन्मय देवांगन , निवासी सूर्या विहार, सरकंडा के रुप में हुई. आरोपी ने पूछताछ मे अपना जुर्म कबूल किया. आरोपी ने बताया कि फर्जी पेमेंट जनरेट करने के लिए मोबाइल में “प्रैंक ऐप्स” डाउनलोड किया था. नकली मैसेज दिखाकर दुकानदारों को धोखा देता था.
आरोपी के कब्जे से घटना में इस्तेमाल मोबाइल जब्त किया गया. आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, और इस मामले में आईटी एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं.
पुलिस ने बताया कि मोबाइल पर किसी दुकान पर फर्जी पेमेंट की स्क्रीनशाट दिखाकर ठगी के मामले सामने आए हैं. ऐसे मामले में सावधानी जरुरी है. इस तरह के मामले में व्यापारियों के पास किसी तरह के ट्रांजेक्शन का कोई रसीद नहीं रहती। इसके कारण ठगी करने वालों तक पहुंचना कठिन होता है. इस तरह की ठगी से बचने के लिए सतर्कता रखना जरूरी है.
जब तक उनके मोबाइल पर ट्रांजेक्शन की रसीद नहीं आती, तब तक सामान नहीं देना चाहिए। अगर बैंक की कोई समस्या या अन्य परेशानी हो तो व्यक्ति दूसरे दिन दुकान आकर सामान ले जा सकता है. वहीं, अगर ठगी हो जाए तो व्यापारी उस व्यक्ति तक नहीं पहुंच सकते। व्यापारियों को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के दौरान सावधान रहने की जरुरत है.
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ठग नकली यूपीआई ऐप के जरिये क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करते है और फिर पेमेंट करके फर्जी स्क्रीनशॉट शो करता है. इस ऐप्स में पेमेंट करने के बाद साउंड नोटिफिकेशन भी आता है जो बिल्कुल रियल ऐप की तरह लगता है. ऐसे में साउंड और स्क्रीनशॉट से दुकानदार या लोगों को लगता है कि पेमेंट हो गई है और वह इस तरह स्कैम में फंस जाते हैं.
कहा जा रहा है कि टेलीग्राम (Telegram) पर नकली यूपीआई के लिंक्स शेयर हो रहे हैं. इन लिंक के जरिये लोग नकली यूपीआई ऐप इंस्टॉल करके पेमेंट कर देते हैं.
अब ऐसे में सवाल है कि इस फ्रॉड से कैसे बचें? कैसे पता चलेगा कि पेमेंट असली ऐप से हुई है या फिर नकली यूपीआई ऐप से?
कैसे करें असली और नकली पेमेंट की पहचान?
आपको सबसे खुद से ही पेमेंट वेरिफाई करना चाहिए। अपने यूपीआई ऐप या फिर बैंक स्टेटमेंट के जरिये चेक करें कि पेमेंट आई है या नहीं.
अगर आपको कोई भी पेमेंट को लेकर शक होता है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए और खुद से पेमेंट की जांच करनी चाहिए.
गलती से आप साइबर फ्रॉड के शिकार हो जाते हैं तो तुरंत 1930 पर कॉल करें. इसके अलावा आप भारत सरकार के साइबर क्राइम पोर्टल ([cybercrime.gov.in] (https://cybercrime.gov.in) पर शिकायत भी कर सकते हैं.
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