कोर्ट-रुम में क्लर्क ने लगाई फांसी, मचा हड़कंप, ज्यादा काम का दबाव और प्रताड़ना का लगा आरोप, पुलिस ने कहा- नहीं मिला कोई सुसाइड नोट

Clerk hanged himself in court room, uproar ensued, allegations of excessive work pressure and harassment were made, police said no suicide note was found

कोर्ट-रुम में क्लर्क ने लगाई फांसी, मचा हड़कंप, ज्यादा काम का दबाव और प्रताड़ना का लगा आरोप, पुलिस ने कहा- नहीं मिला कोई सुसाइड नोट

दुर्ग : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया. जब कोर्ट परिसर पर एक क्लर्क का शव फांसी से फंद पर लटकता मिला. जिले के पुरानी भिलाई कोर्ट परिसर में पदस्थ क्लर्क ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के अंदर ही फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली. मृतक क्लर्क की पहचान सोमनाथ ठाकुर के रुप में हुई है. बताया जा रहा है कि क्लर्क वर्कलोड से काफी परेशान था इसी वजह से उसने खुदकुशी करने का फैसला किया.
इस घटना खुलासा तब हुआ जब मंगलवार की सुबह कुछ लोग कोर्ट पहुंचे. जैसे ही लोग कोर्ट रूम पहुंचे तो उन्हें सोमनाथ की फंदे से लटकी हुई मिली. इस घटना से कोर्ट में हड़कंप मच गया. इसकी सूचना तत्काल भिलाई-3 थाना पुलिस को दी गई.
घटना की खबर मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने शव को फंदे से उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मामले की जांच में जुट गई है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मृतक के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. जिस कारण खुदकुशी के कारणों का खुलासा हो सके. इस मामले की जांच हर एंगल से की जाएगी.
सुसाइड नोट नहीं मिला
पुरानी भिलाई थाना प्रभारी अंबर सिंह ने बताया कि क्लर्क सोमनाथ ठाकुर ने मजिस्ट्रेट अभिनव डहरिया के कोर्ट रुम में फांसी लगाकर खुदकुशी की है. खुदकुशी की वजह साफ नहीं है. क्योंकि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है.
आर्थिक तंगी भी हो सकती है वजह
इस घटना के बाद कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया. वहां मौजूद स्टाफ और अन्य लोग के मुताबिक मृतक काफी दिनों से परेशान था. मृतक सोमनाथ के कुछ साथियों का कहना है कि वह कुछ समय से आर्थिक तंगी और कर्ज को लेकर परेशान रहता था. फिलहाल पुलिस आत्महत्या के कारणों की छानबीन में जुटी है.
प्रताड़ना का आरोप
कोर्ट यूनियन के अध्यक्ष मनोहर कुमार खड़गी ने अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि वह वर्कलोड की वजह से काफी परेशान रहता था. इसके साथ ही उसने कई बार अधिकारियों पर प्रताड़ना का भी आरोप लगाया है. फिलहाल परिजनों को खबर दे दी गई. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. यह घटना न्यायिक व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है.
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